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जमाबंदी का रिकार्ड ऑनलाइन न होने से पेंडिंग पड़े सैंकड़ों इंतकाल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 17 Jul 2022 02:27 AM IST
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Hundreds of pending dues of Jamabandi record not being online
पानीपत। इंतकाल संपत्ति से जुड़ा एक ऐसा दस्तावेज है, जो संपत्तियों की रजिस्टरियां होने के बाद भी होना जरूरी है। अगर ये नहीं है तो समझा जाता है कि संपत्ति का रजिस्टरी होने के बावजूद भी सही और पूरा मालिकाना हक मालिक के पास नहीं है। पिछले तीन वर्षों से जमाबंदी न होने की वजह से शहर के सैकड़ों इंतकाल पेंडिंग पड़े हैं। जिनके ये इंतकाल हैं, वे संपत्तियों को आगे नहीं बेच पा रहे हैं। इस वजह से लोगों को मजबूरी में पावर ऑफ अटार्नी या फुल पेमेंट एग्रीमेंट करवाना पड़ रहा है। जिससे सरकार को भी राजस्व का नुकसान हो रहा है और लोग भी परेशान हैं।
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हालांकि तहसीलदार का दावा है कि उन्होंने शहर की चार में दो पत्तियों (पुराने शहर का क्षेत्र) की जमाबंदी ऑनलाइन करवा दी है। अब दो पत्तियों का ही काम बाकी है। इसे भी 31 जुलाई तक पूरा कर लिया जाएगा। पूरा शहर चार पत्तियों में बंटा है जबकि एक गद्दीवाड़ा है। इनमें पत्ती इंसार, पत्ती राजपूतान, पत्ती अफगान, गदीवाड़ा, बागशेर अफगान शामिल हैं। नियमानुसार हर पांच साल बाद जमाबंदी ऑनलाइन होनी चाहिए। इसे बनाने से ऑनलाइन करने तक की जिम्मेदारी तहसील की होती है लेकिन कुछ पत्तियों की जमाबंदी 2003-04 में बनी तो कुछ 2015-16 और 2018-19 में बनाई गई। अब सीधे इनको 2020-21 से जोड़ा जा रहा है।
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नियम है एक दिन का और एक महीने बाद भी नहीं मिल रहे इंतकाल
अगर किसी भी संपत्ति की रजिस्टरी होती है तो नियमानुसार उसी दिन उसका इंतकाल मंजूर किया जाना चाहिए। इससे पहले ये समयावधि 15 दिन की थी, जिसे 300 रुपये की म्यूटेशन फीस देने के एक दिन बाद कर दिया गया था। अब लोग पर्ची भी कटवा लेते हैं, लेकिन इसके बाद भी इंतकाल ऑनलाइन मंजूर नहीं होते।
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ऑफलाइन मिल सकते हैं रिकार्ड, लेकिन काम के नहीं
लोगों का कहना है कि तहसील में आपको अपनी संपत्ति का ऑफलाइन रिकार्ड भी मिल जाएगा। पटवारी ऑफलाइन इंतकाल भी बनाकर दे देंगे, लेकिन ये किसी काम के नहीं हैं। जब तक इंतकाल ऑनलाइन मंजूर नहीं होता, उसका कोई औचित्य नहीं है। सभी रजिस्टरियों में ऑनलाइन इंतकाल को ही देखा जाता है।
ये हो रही परेशानी-
किसी भी प्रॉपर्टी की अगर रजिस्टरी है और इंतकाल या जमाबंदी नहीं है तो बैंक से लोन लेने में बड़ी परेशानी होती है। बिना इंतकाल की रजिस्टरी होने के बावजूद भी प्रॉपर्टी की कीमत कम हो जाती है। लोग इसे खरीदने से कतराते हैं। एक प्रकार से ये कच्चा सौदा माना जाता है। इससे बचने को लोग फुल पेमेंट या पावर अटार्नी करवाते हैं।

वर्जन-
शहर की दो पत्तियों की जमाबंदी ऑनलाइन हो चुकी है। दो की बाकी है। इसे 31 जुलाई तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद लोगों को इंतकाल संबंधित परेशानी नहीं होगी। - जगदीश गिरदावा, तहसीलदार, पानीपत।
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