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निगम की गलती पड़ी सेक्टर-12 और हाउसिंग बोर्ड के 1270 मकानों पर भारी
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पानीपत। नगर निगम की एक गलती ने सेक्टर-12 और साथ लगती हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के 1270 मकान मालिकों पर मुसीबत डाल दी है। पुराने नक्शे और खामियों से भरे सर्वे में यहां के रिकॉर्ड को गलत एरिया बताकर दर्शाया गया है। मकानों को दूसरी कॉलोनियों में दिखाकर नाम तक बदल दिए हैं। इनको हुडा या हाउसिंग बोर्ड का नाम न देकर सनौली रोड और उझा रोड की बीच का एरिया दिखा दिया है। सर्वे में हुडा और सेक्टर से बाहर आते ही इन पर विकास शुल्क लग रहा है।
निगम के सर्वे में जिस एरिया को राज कॉलोनी का क्षेत्र दिखाया है, वहां राज कॉलोनी है ही नहीं। राज कॉलोनी को लाल डोरे में दिखा दिया है। जबकि चांदनीबाग, सैनी कॉलोनी और गणेश नगर के एरिया को राज कॉलोनी में दिखा दिया है।
जिससे सेक्टर और हाउसिंग बोर्ड के लोगों की जेब पर निगम का विकास शुल्क भारी पड़ रहा है। नियमानुसार यहां के बाशिंदों को प्रॉपर्टी टैक्स तो देना बनता है लेकिन विकास शुल्क का प्रावधान ही नहीं है। लोग इसे ठीक कराने के लिए निगम में चक्कर काट रहे हैं।
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माना जा रहा है कि ऐसा शहर की अन्य कॉलोनियों के साथ भी हो सकता है। शहर की इस समस्या को हल करने का के लिए पार्षद रविंद्र भाटिया ने निगम से सभी दस्तावेज निकलवाए, उनका बारीकी से अध्ययन किया और निगम अधिकारियों के सामने रखा। पहले तो निगम अधिकारी इसे मानने के लिए तैयार ही नहीं थे। जब उनको तथ्यों से रूबरू कराया तो अधिकारियों ने भी माना कि सर्वे में ये गलती हुई है।
बॉक्स
ये है गलत रिकॉर्ड, जिसने लगाया 1270 मकानों पर विकास शुल्क
पार्षद रविंद्र भाटिया ने दस्तावेज के आधार पर बताया कि सेक्टर 12 में मकान नंबर 1597 से लेकर 1993 तक के 397 मकान सर्वे में गलत जगह दर्शायी हैं। इसके अलावा साथ लगती हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में भी मकान नंबर 2201 से लेकर 3373 तक को गलत दिखाया है। इन सभी पर टैक्स लग गया है। हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में 40 गज से लेकर 150 गज तक के मकान हैं। इन पर 873 रुपये गज के हिसाब से विकास शुल्क जोड़ा गया है। इसके अलावा सेक्टर 12 में ज्यादातर 2 मरले और 4 मरले के मकान हैं। इनका विकास शुल्क 40 हजार रुपये से लेकर चार लाख तक बन गया है। यहां काफी दुकानें भी हैं, इन पर कमर्शिलय टैक्स और डेवलपमेंट चार्ज लगाया गया है।
संज्ञान में आया मामला- एक्सईएन
मामला संज्ञान में आया है। इस विषय पर निगम आयुक्त से चर्चा की जाएगी। इसके बाद जो भी उपयुक्त कार्यप्रणाली होगी अमल में लाई जाएगी।
- प्रदीप कल्याण, एक्सईएन एवं टाउन प्लानिंग ऑफिसर, नगर निगम।
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निगम के सर्वे में जिस एरिया को राज कॉलोनी का क्षेत्र दिखाया है, वहां राज कॉलोनी है ही नहीं। राज कॉलोनी को लाल डोरे में दिखा दिया है। जबकि चांदनीबाग, सैनी कॉलोनी और गणेश नगर के एरिया को राज कॉलोनी में दिखा दिया है।
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जिससे सेक्टर और हाउसिंग बोर्ड के लोगों की जेब पर निगम का विकास शुल्क भारी पड़ रहा है। नियमानुसार यहां के बाशिंदों को प्रॉपर्टी टैक्स तो देना बनता है लेकिन विकास शुल्क का प्रावधान ही नहीं है। लोग इसे ठीक कराने के लिए निगम में चक्कर काट रहे हैं।
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माना जा रहा है कि ऐसा शहर की अन्य कॉलोनियों के साथ भी हो सकता है। शहर की इस समस्या को हल करने का के लिए पार्षद रविंद्र भाटिया ने निगम से सभी दस्तावेज निकलवाए, उनका बारीकी से अध्ययन किया और निगम अधिकारियों के सामने रखा। पहले तो निगम अधिकारी इसे मानने के लिए तैयार ही नहीं थे। जब उनको तथ्यों से रूबरू कराया तो अधिकारियों ने भी माना कि सर्वे में ये गलती हुई है।
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ये है गलत रिकॉर्ड, जिसने लगाया 1270 मकानों पर विकास शुल्क
पार्षद रविंद्र भाटिया ने दस्तावेज के आधार पर बताया कि सेक्टर 12 में मकान नंबर 1597 से लेकर 1993 तक के 397 मकान सर्वे में गलत जगह दर्शायी हैं। इसके अलावा साथ लगती हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में भी मकान नंबर 2201 से लेकर 3373 तक को गलत दिखाया है। इन सभी पर टैक्स लग गया है। हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में 40 गज से लेकर 150 गज तक के मकान हैं। इन पर 873 रुपये गज के हिसाब से विकास शुल्क जोड़ा गया है। इसके अलावा सेक्टर 12 में ज्यादातर 2 मरले और 4 मरले के मकान हैं। इनका विकास शुल्क 40 हजार रुपये से लेकर चार लाख तक बन गया है। यहां काफी दुकानें भी हैं, इन पर कमर्शिलय टैक्स और डेवलपमेंट चार्ज लगाया गया है।
संज्ञान में आया मामला- एक्सईएन
मामला संज्ञान में आया है। इस विषय पर निगम आयुक्त से चर्चा की जाएगी। इसके बाद जो भी उपयुक्त कार्यप्रणाली होगी अमल में लाई जाएगी।
- प्रदीप कल्याण, एक्सईएन एवं टाउन प्लानिंग ऑफिसर, नगर निगम।