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बुजुर्गों व बच्चों की की मेंटल हेल्थ का ख्याल रखेगा स्वास्थ्य विभाग
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पानीपत। स्वास्थ्य विभाग मेंटल हेल्थ और नेशनल प्रोग्राम फॉर हेल्थ केयर आफ एल्डरली(एनपीएचसीई) एक साथ चलाया जाएगा। एएनएम और आशा वर्कर्स को ट्रेनिंग दी जा चुकी है। विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त बुजुर्गों, वृद्धाओं व बच्चों को चिन्हित किया जाएगा। हर आयु वर्ग के लोगों का मानसिक स्वास्थ्य भी जांचा जाएगा।
आशा को-आर्डिनेटर पूनम को इस प्रोग्राम की ट्रेनिंग मिल चुकी है। उन्होंने आशा वर्करों व एएनएम को दो सत्रों में ट्रेनिंग दी है। मरीज चिन्हित होने के बाद हर क्षेत्र में संजीवनी स्वास्थ्य समूह बनाए जाएंगे। इनका काम मरीजों के स्वास्थ्य पर निगरानी रखना, देखभाल और उपचार शामिल है।
समय के साथ साथ बुजुर्ग मानसिक रोगी हो रहे हैं। उनके रोगी होने का मुख्य कारण तनाव व बढ़ती उम्र में मानसिक संतुलन खोना है। सिविल अस्पताल में हर रोज ऐसे पांच- दस रोगियों की ओपीडी भी हो रही है। बुजुर्गों को मानसिक रोग से छुटकारा दिलाने के लिए इस प्रोग्राम की शुरूआत की जा रही है।
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बुजुर्गों को होने वाली बीमारियां
- मानसिक स्थिति कमजोर होना।
- याददाश्त कमजोर होना।
- नजर कमजोर होना।
-कम सुनाई देना।
-जोड़ों-मांसपेशियों में दर्द रहना।
-उच्च रक्तचाप और मधुमेह रोगी।
इन मानसिक विकारों पर रहेगी नजर-
-हर समय तनाव-चिंता में घिरे रहना।
-मन में घबराहट, उदासी या बेचैन रहना।
-मन में गलत विचारों का आना।
-नींद व भूख कम होना।
-जीवन नीरस लगना।
-दिमागी फितूर में तोड़-फोड़ करना।
-उन्माद या दिमागी तेजी, पागलनपन।
-बहकी-बहकी बातें करना।
-लगातार बोलते रहना।
-बिना वजह शक और गुस्सा करना।
-बहुत तेज घबराहट या डर जाना।
-अकेले यात्रा करने से डरना।
-अनचाहे विचारों का बार-बार आना।
-एक काम को कई-कई बार करना।
-बार-बार हाथ धोना।
-चीजों को अति व्यवस्थित रखने का प्रयास।
बच्चों में मानसिक रोग
-मंद बुद्धि बच्चे का अधिक चंचल होना।
-एक जगह स्थिर होकर नहीं बैठना।
-देर से बोलना, बैठना व खड़े होना।
-पढ़ाई में कमजोर होना, स्कूल ना जाना।
सिविल अस्पताल में भी इलाज
नेशनल प्रोग्राम फार हेल्थ केयर आफ एल्डरली (एनपीएचसीई) के तहत सिविल अस्पताल में भी सीनियर सिटीजन की स्वास्थ्य जांच और इलाज की सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां पर काउंसलिंग भी होती है। अस्पताल के प्रथम तल पर फिजियोथैरेपी यूनिट बनी हुई है। बुजुर्ग इसका भी लाभ ले सकते हैं। - डॉ. जितेंद्र कादियान, सिविल सर्जन
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आशा को-आर्डिनेटर पूनम को इस प्रोग्राम की ट्रेनिंग मिल चुकी है। उन्होंने आशा वर्करों व एएनएम को दो सत्रों में ट्रेनिंग दी है। मरीज चिन्हित होने के बाद हर क्षेत्र में संजीवनी स्वास्थ्य समूह बनाए जाएंगे। इनका काम मरीजों के स्वास्थ्य पर निगरानी रखना, देखभाल और उपचार शामिल है।
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समय के साथ साथ बुजुर्ग मानसिक रोगी हो रहे हैं। उनके रोगी होने का मुख्य कारण तनाव व बढ़ती उम्र में मानसिक संतुलन खोना है। सिविल अस्पताल में हर रोज ऐसे पांच- दस रोगियों की ओपीडी भी हो रही है। बुजुर्गों को मानसिक रोग से छुटकारा दिलाने के लिए इस प्रोग्राम की शुरूआत की जा रही है।
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बुजुर्गों को होने वाली बीमारियां
- मानसिक स्थिति कमजोर होना।
- याददाश्त कमजोर होना।
- नजर कमजोर होना।
-कम सुनाई देना।
-जोड़ों-मांसपेशियों में दर्द रहना।
-उच्च रक्तचाप और मधुमेह रोगी।
इन मानसिक विकारों पर रहेगी नजर-
-हर समय तनाव-चिंता में घिरे रहना।
-मन में घबराहट, उदासी या बेचैन रहना।
-मन में गलत विचारों का आना।
-नींद व भूख कम होना।
-जीवन नीरस लगना।
-दिमागी फितूर में तोड़-फोड़ करना।
-उन्माद या दिमागी तेजी, पागलनपन।
-बहकी-बहकी बातें करना।
-लगातार बोलते रहना।
-बिना वजह शक और गुस्सा करना।
-बहुत तेज घबराहट या डर जाना।
-अकेले यात्रा करने से डरना।
-अनचाहे विचारों का बार-बार आना।
-एक काम को कई-कई बार करना।
-बार-बार हाथ धोना।
-चीजों को अति व्यवस्थित रखने का प्रयास।
बच्चों में मानसिक रोग
-मंद बुद्धि बच्चे का अधिक चंचल होना।
-एक जगह स्थिर होकर नहीं बैठना।
-देर से बोलना, बैठना व खड़े होना।
-पढ़ाई में कमजोर होना, स्कूल ना जाना।
सिविल अस्पताल में भी इलाज
नेशनल प्रोग्राम फार हेल्थ केयर आफ एल्डरली (एनपीएचसीई) के तहत सिविल अस्पताल में भी सीनियर सिटीजन की स्वास्थ्य जांच और इलाज की सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां पर काउंसलिंग भी होती है। अस्पताल के प्रथम तल पर फिजियोथैरेपी यूनिट बनी हुई है। बुजुर्ग इसका भी लाभ ले सकते हैं। - डॉ. जितेंद्र कादियान, सिविल सर्जन