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Panipat News: हरियाणा की बेटियां बेटों से कम नहीं, खेल ही नहीं फैशन में भी आगे

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 03 Sep 2024 07:27 AM IST
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Haryana's daughters are no less than sons, not only in sports but also ahead in fashion.
पानीपत। मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता के लिए चुनी गईं प्राक्षी गोयल सोमवार को पानीपत पहुंची। बेटी की इस बड़ी उपलब्धि पर पिता राजीव गोयल और मां अनुपमा गोयल की आंखों में खुशी के आंसू आ गए। उन्होंने बेटी की उपलब्धि पर संस्कार और संस्कृति के साथ बेटी की दृढ़ इच्छा शक्ति को सहयोगी बताया। प्राक्षी गोयल ने भी यहां अपने मन के भाव सबके साथ साझा किए। उन्होंने फाइनल मुकाबले में कामयाब होने के लिए लोगों से आशीर्वाद और दुआ मांगी।
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प्राक्षी गोयल ने कहा कि हरियाणा की बेटियां बेटों से पीछे नहीं हैं। वे न केवल शिक्षा व खेल बल्कि फैशन की दुनिया में भी आगे जा रही हैं। प्राक्षी गोयल ने कहा कि पानीपत की हर महिला को उन पर गर्व है। प्राक्षी गोयल ने बताया कि मेरी मां अनुपमा गोयल अपने घर में सबसे बड़ी हैं। उन्होंने शादी के बाद एक कुशल गृहिणी की तरह अपना घर संभाला। उन्होंने मुझमें निस्वार्थ, आत्मनिर्भरता और हर चीज को संभालने के लिए जिम्मेदार मूल्यों को स्थापित किया। अपने शहर में अपनी सभ्यता और संस्कारों को अपनाया। मुझे दो छोटी बहनों की जिम्मेदारी के साथ अपने सपनों के बारे में दृढ़ रहना सिखाया है। उन्होंने कहा कि मैं कई लड़कियों से मिलती हूं, जो मेरी संस्कृति को जानकर आश्चर्य से पूछती हैं कि तेरे माता-पिता ने इंडस्ट्री में कैसे आने दिया। मेरा मानना है कि दृढ़ इच्छा शक्ति से हर मुकाम को हासिल किया जा सकता है। समाज की बातें मेरे सामने भी कई बार आईं, लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी। अपने माता-पिता के सहयोग से ही इस सफर में यहां तक पहुंची हूं। स्वागत कार्यक्रम में इनरव्हील क्लब की प्रधान मनाली पराशर, भूमिका गुप्ता और अजय सिंगला भी मौजूद रहे।
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मॉडलिंग गलत नहीं यहां भी संस्कार जीवित
प्राक्षी ने बताया की मॉडलिंग कोई गलत फील्ड नहीं है। यहां भी संस्कार जीवित हैं। आवश्यकता है कि माता-पिता अपने बच्चों को अच्छे संस्कार दें और अपने बच्चों पर विश्वास करें। उसके माता-पिता का उन पर पूरा विश्वास रहा है और वह भी इस पर खरी हैं। प्राक्षी ने अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपने परिवार को दिया, जिन्होंने उसे इस मुकाम तक पहुंचने के सफर में हर प्रकार से मदद की। पोषण और मानसिक कल्याण को बढ़ावा देने के लिए कार्यशालाओं के माध्यम से जागरूकता को बढ़ावा देना हाेगा। यह बच्चों के साथ उनके माता-पिता के लिए भी जरूरी है।
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