{"_id":"610ee8748ebc3e6fe153fe89","slug":"gaya-mhara-chora-buried-kasuta-lath-mhara-gold-agya-panipat-news-knl79239089","type":"story","status":"publish","title_hn":"छा गया म्हारा छोरा, गाड़ दिया कसूता लठ, म्हारा गोल्ड आग्या","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छा गया म्हारा छोरा, गाड़ दिया कसूता लठ, म्हारा गोल्ड आग्या
विज्ञापन
नीरज के घर में परिवार की महिलाएं मां सरोज का मुंह मीटा कराते हुए ( काले सूट में मां)
- फोटो : Panipat
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ओलंपिक में देश को पहला स्वर्ण पदक दिलाने वाले नीरज चोपड़ा की जीत के जश्न में जिले के लोगों ने जमकर धूम मचाई। हर आदमी की जुबां पर एक ही बात थी कि दुनिया भर से आए 11 धुरंधरों को पछाड़ कर अपने नीरज ने सोना जीत लिया है। नीरज चोपड़ा के गांव खंडरा में दस बाई दस फुट की एलईडी पर मैच देखने के लिए गांव का हर आदमी मौजूद रहा। उपायुक्त सुशील सारवान ने भी मौके पर पहुंचे और जीत के इस जश्न में शरीक हुए। जैसे ही नीरज ने पहली बार भाला 87.5 मीटर फेंका वैसे ही मैच देख रहे नीरज के परिजन और गांववासी एक आवाज में बोले छा गया म्हारा छोरा, गाड़ दिया लठ, म्हारा गोल्ड आग्या। मैच देखने वाले लोगों में नीरज की जीत का ऐसा जोश था कि मानों भाला नीरज नहीं हर वो शख्स फेंक रहा हो, जो वहां मौजूद था। जैसे ही नीरज की जीत दर्ज हुई उनके परिजनों, कोच, मित्रों व गांव वासियों की आंखों में खुशी के आंसुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।
कभी खुशी में नाचे तो कभी हाथ जोड़ मन्नत मांगते दिखे
शाम चार बजे नीरज चोपड़ा का मैच बड़ी एलईडी टीवी पर शुरू हुआ। नीरज के परिजनों के साथ गांव वासी भी मैच देख रहे थे। प्रतियोगिता में 12 प्रतिभागी थे। जैसे ही नीरज ने अपने पहले ही प्रयास में भाला 87 मीटर के पार पहुंचाया वैसे ही खंडरा गांव में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। नीरज के परिजन और गांव वासी नाचने लगे और जश्न मनाने लगे। इसके बाद दूसरे प्रयास में फिर से नीरज ने भाला 87 मीटर के पार पहुंचा दिया। इस बार जीत का जश्न दोगुना हो गया। लोग एक दूजे के गले लगकर बधाई देने लगे। तीसरे प्रयास में भाला 80 मीटर से पीछे रह गया, तो सभी लोगों के हाथ नीरज के लिए मन्नत करने के लिए उठ गए।
जीत के साथ ही फहरा तिरंगा, सभी ने किया सलाम
नीरज की जीत की घोषणा होते ही नीरज की चचेरी बहन एलईडी टीवी के पास तिरंगा लेकर पहुंची और तिरंगा हवा में लहरा दिया। इस क्षण खंडरा गांव के लोगों में देशभक्ति का जुनून देखने को मिला। सभी न एक साथ तिरंगे को सलाम किया। जय हिंद जय भारत के नारे लगाए। नीरज की जीत में मानों खंडरा गांव जश्न के माहौल में तबदील हो चुका हो। नीरज की तस्वीर पर फूलों की बरसात होने लगी। मौके पर लड्डू बांटे जाने लगे। जीत का ये जश्न रात को आतिश बाजियों में गजब दिखाई दे रहा था। ऐसा ही कुछ नजारा शहर के लोगों में भी देखने को मिला।
विज्ञापन
सोशल मीडिया पर लगा बधाइयों का तांता
नीरज की जीत के लिए शहर के करीब 10 लाख लोग उसके लिए मन्नत कर रहे थे। नीरज की मेहनत पर पूरे शहर को विश्वास था कि अबकी बार गोल्ड नीरज को ही मिलेगा। शहर के लोगों ने सोशल मीडिया पर एक ही स्टेटस डाला कि अपना नीरज सोना लाया। नीरज की जीत पर शहरवासी एक दूजे का बधाइयां देते नजर आए। हालांकि शाम को जिले भर के नेता भी नीरज के घर उनके परिजनों को बधाइयां देने के लिए पहुंचते रहे। वहीं, सीएम मनोहर लाल ने भी नीरज चोपड़ा के परिजनों से बातचीत की।
फख्र से उठा सिर, सीना हो गया चौड़ा
आज मेरा सिर फख्र से ऊपर है। मेरा सीना पहले से चौड़ा हो गया है। मेरे बेटे ने देश को पहला गोल्ड जीत कर दिया है। -सतीश चोपड़ा, नीरज के पिता
मेरा पोता, मेरा हीरो
मेरा पोता, मेरा हीरो है। आज वो पूरे देश का हीरो बन चुका है। मेरे पोते ने विश्व भर में अपने देश का नाम रोशन किया है। -धर्म सिंह, नीरज के दादा
भतीजे पर है गर्व
मुझे अपने भतीजे पर गर्व है कि आज उसने ओलंपिक में गोल्ड हासिल कर अपना, अपने देश का नाम सुनहरे अक्षरों में लिख दिया है। -भीम सिंह, नीरज के चाचा
देश के लिए फख्र की बात
यह पूरे देश के लिए फख्र की बात है कि जिले के एक नौजवान ने देश की गरिमा को बढ़ाया है। इसके लिए नीरज, उनके परिजनों, उनके कोच व शहरवासियों को बधाई। -सुशील सारवान, डीसी, पानीपत
विज्ञापन
कभी खुशी में नाचे तो कभी हाथ जोड़ मन्नत मांगते दिखे
शाम चार बजे नीरज चोपड़ा का मैच बड़ी एलईडी टीवी पर शुरू हुआ। नीरज के परिजनों के साथ गांव वासी भी मैच देख रहे थे। प्रतियोगिता में 12 प्रतिभागी थे। जैसे ही नीरज ने अपने पहले ही प्रयास में भाला 87 मीटर के पार पहुंचाया वैसे ही खंडरा गांव में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। नीरज के परिजन और गांव वासी नाचने लगे और जश्न मनाने लगे। इसके बाद दूसरे प्रयास में फिर से नीरज ने भाला 87 मीटर के पार पहुंचा दिया। इस बार जीत का जश्न दोगुना हो गया। लोग एक दूजे के गले लगकर बधाई देने लगे। तीसरे प्रयास में भाला 80 मीटर से पीछे रह गया, तो सभी लोगों के हाथ नीरज के लिए मन्नत करने के लिए उठ गए।
विज्ञापन
जीत के साथ ही फहरा तिरंगा, सभी ने किया सलाम
नीरज की जीत की घोषणा होते ही नीरज की चचेरी बहन एलईडी टीवी के पास तिरंगा लेकर पहुंची और तिरंगा हवा में लहरा दिया। इस क्षण खंडरा गांव के लोगों में देशभक्ति का जुनून देखने को मिला। सभी न एक साथ तिरंगे को सलाम किया। जय हिंद जय भारत के नारे लगाए। नीरज की जीत में मानों खंडरा गांव जश्न के माहौल में तबदील हो चुका हो। नीरज की तस्वीर पर फूलों की बरसात होने लगी। मौके पर लड्डू बांटे जाने लगे। जीत का ये जश्न रात को आतिश बाजियों में गजब दिखाई दे रहा था। ऐसा ही कुछ नजारा शहर के लोगों में भी देखने को मिला।
विज्ञापन
सोशल मीडिया पर लगा बधाइयों का तांता
नीरज की जीत के लिए शहर के करीब 10 लाख लोग उसके लिए मन्नत कर रहे थे। नीरज की मेहनत पर पूरे शहर को विश्वास था कि अबकी बार गोल्ड नीरज को ही मिलेगा। शहर के लोगों ने सोशल मीडिया पर एक ही स्टेटस डाला कि अपना नीरज सोना लाया। नीरज की जीत पर शहरवासी एक दूजे का बधाइयां देते नजर आए। हालांकि शाम को जिले भर के नेता भी नीरज के घर उनके परिजनों को बधाइयां देने के लिए पहुंचते रहे। वहीं, सीएम मनोहर लाल ने भी नीरज चोपड़ा के परिजनों से बातचीत की।
फख्र से उठा सिर, सीना हो गया चौड़ा
आज मेरा सिर फख्र से ऊपर है। मेरा सीना पहले से चौड़ा हो गया है। मेरे बेटे ने देश को पहला गोल्ड जीत कर दिया है। -सतीश चोपड़ा, नीरज के पिता
मेरा पोता, मेरा हीरो
मेरा पोता, मेरा हीरो है। आज वो पूरे देश का हीरो बन चुका है। मेरे पोते ने विश्व भर में अपने देश का नाम रोशन किया है। -धर्म सिंह, नीरज के दादा
भतीजे पर है गर्व
मुझे अपने भतीजे पर गर्व है कि आज उसने ओलंपिक में गोल्ड हासिल कर अपना, अपने देश का नाम सुनहरे अक्षरों में लिख दिया है। -भीम सिंह, नीरज के चाचा
देश के लिए फख्र की बात
यह पूरे देश के लिए फख्र की बात है कि जिले के एक नौजवान ने देश की गरिमा को बढ़ाया है। इसके लिए नीरज, उनके परिजनों, उनके कोच व शहरवासियों को बधाई। -सुशील सारवान, डीसी, पानीपत

नीरज की जीत के बाद उपायुक्त सुशील सारवान और चाचा भीम चोपड़ा- फोटो : Panipat