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Panipat News: टेक्सटाइल नगरी को दिलाई पहचान, अपनी मेहनत से पाया मुकाम
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पानीपत। औद्योगिक नगरी पानीपत की विश्व में पहचान दिलाने में बिहार के लोगों का विशेष योगदान रहा है। अपनी मेहनत के बदौलत उन्होंने अपना अलग मुकाम बनाया है।
पानीपत में बिहार से आकर नौकरी करने वाले करीब दो दर्जन लोग अपना एक्सपोर्ट हाउस स्थापित कर दूसरों को रोजगार दे रहे हैं। यही नहीं नई पीढ़ी को भी आगे लाने में लगे हुए हैं।
उल्लेखनीय है कि 22 मार्च शनिवार को बिहार दिवस है। पानीपत समेत प्रदेश के सात जिलों में बिहार दिवस पर जिला स्तरीय कार्यक्रम किए जाएंगे। सरकार द्वारा 23 मार्च को इसके उपलक्ष्य में कार्यक्रम किए जाएंगे। इस तरह के आयोजन प्रदेश में पहली बार किए जा रहे हैं। औद्योगिक नगरी की बात करें तो यहां बिहार के करीब पांच लाख लोग रहते हैं। इनमें 80 प्रतिशत उद्योगों में काम करते हैं। कुछ अलग-अलग स्थानों पर नौकरी करते हैं। छठ महापर्व पर बिहार और पूर्वांचल के लोगों की आस्था शहर ही नहीं जिले में देखी जा सकती है।
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सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी से एक्सपोर्टर बने
निलांबर सिंह ने बताया कि वे मुंगेर जिला के पचरुखी गांव से हैं। वे 1998 में अपने जीजा प्रभात सिंह के पास आए थे। तब वे 12वीं पास थे। उन्होंने यहां सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी की। इसके साथ स्नातक की पढ़ाई पूरी की। कंप्यूटर सॉफ्टवेयर का कोर्स किया। उनको एक एक्सपोर्ट हाउस में डाटा इंट्री ऑपरेटर की नौकरी मिली। उन्होंने इसके बाद अकाउंट, फिर डिजाइनिंग और सैंपल शाखा में काम किया। उन्हाेंने 2010 में रमेश जैन के साथ एक्सपोर्ट का काम शुरू किया। उनका आज अपना एक्सपोर्ट हाउस है। अमेरिका और यूरोप में उनके उत्पाद जाते हैं। वे लगभग 200 बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठा रहे हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से टेक्सटाइल पर जागरूकता फैला रहे हैं। उनको बिहार दिवस पर पंचकूला में आयोजित कार्यक्रम में सम्मानित किया जाएगा।
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पानीपत में बिहार से आकर नौकरी करने वाले करीब दो दर्जन लोग अपना एक्सपोर्ट हाउस स्थापित कर दूसरों को रोजगार दे रहे हैं। यही नहीं नई पीढ़ी को भी आगे लाने में लगे हुए हैं।
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उल्लेखनीय है कि 22 मार्च शनिवार को बिहार दिवस है। पानीपत समेत प्रदेश के सात जिलों में बिहार दिवस पर जिला स्तरीय कार्यक्रम किए जाएंगे। सरकार द्वारा 23 मार्च को इसके उपलक्ष्य में कार्यक्रम किए जाएंगे। इस तरह के आयोजन प्रदेश में पहली बार किए जा रहे हैं। औद्योगिक नगरी की बात करें तो यहां बिहार के करीब पांच लाख लोग रहते हैं। इनमें 80 प्रतिशत उद्योगों में काम करते हैं। कुछ अलग-अलग स्थानों पर नौकरी करते हैं। छठ महापर्व पर बिहार और पूर्वांचल के लोगों की आस्था शहर ही नहीं जिले में देखी जा सकती है।
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सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी से एक्सपोर्टर बने
निलांबर सिंह ने बताया कि वे मुंगेर जिला के पचरुखी गांव से हैं। वे 1998 में अपने जीजा प्रभात सिंह के पास आए थे। तब वे 12वीं पास थे। उन्होंने यहां सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी की। इसके साथ स्नातक की पढ़ाई पूरी की। कंप्यूटर सॉफ्टवेयर का कोर्स किया। उनको एक एक्सपोर्ट हाउस में डाटा इंट्री ऑपरेटर की नौकरी मिली। उन्होंने इसके बाद अकाउंट, फिर डिजाइनिंग और सैंपल शाखा में काम किया। उन्हाेंने 2010 में रमेश जैन के साथ एक्सपोर्ट का काम शुरू किया। उनका आज अपना एक्सपोर्ट हाउस है। अमेरिका और यूरोप में उनके उत्पाद जाते हैं। वे लगभग 200 बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठा रहे हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से टेक्सटाइल पर जागरूकता फैला रहे हैं। उनको बिहार दिवस पर पंचकूला में आयोजित कार्यक्रम में सम्मानित किया जाएगा।