महात्मा गांधी पुण्यतिथि: मुसलमानों को पाकिस्तान जाने से रोकने के लिए दो बार पानीपत आए थे गांधी जी
मुस्लिम समुदाय के सभी लोग पाकिस्तान नहीं जाता चाहते थे। महात्मा गांधी उनके नेताओं को समझाने आए थे। वर्ष 1947 की 11 नवंबर और चार दिसंबर को पानीपत के किला मैदान में महात्मा गांधी पहुंचे थे।
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भारत के बंटवाने के वक्त मुसलमानों को पाकिस्तान जाने से रोकने के लिए महात्मा गांधी दो बाद हरियाणा के पानीपत आए थे। यहां के मुसलमानों को जबरन पाकिस्तान भेजा रहा था और वे यहीं रहना चाहते थे। किला क्षेत्र स्थित मैदान में महात्मा गांधी ने मुसलमानों से मुलाकात की। गांधी जी के समक्ष सभी ने अपनी समस्या रखी और कहा कि वे पानीपत छोड़कर नहीं जाना चाहते हैं, वह हिंदुओं के साथ ही यहीं खुश हैं।
इतिहासकार एवं लेखक रमेश चंद्र पुहाल ने बताया कि पानीपत में एक नवंबर 1947 की आधी रात को सेना आ चुकी थी। सनौली रोड स्थित खैल मोहल्ला (अब खैल बाजार) से वीर भवन चुंगी तक कर्फ्यू लगा था। पाकिस्तान जा रहे मुसलमानों के लिए प्रशासन ने कैंप लगाए थे। इन परिस्थितियों स्वतंत्रता सेनानी मौलवी लिकाउल्ला उस्मानी, पंडित माधोराम, लाला खेम चंद, रईस मास्टर और सीता राम सैनी दिल्ली पहुंच गए।
महात्मा गांधी से भेंट कर स्थिति संभालने के लिए उन्हें पानीपत बुलाया। इसके बाद पहली बार 11 नवंबर को महात्मा गांधी पानीपत आए। इस किस्से का वर्णन रमेश चंद्र पुहाल ने अपनी किताब ‘सरहद पार से आई खुशबू’ में भी किया है।
उन्होंने बताया कि फिर से अनुरोध पर चार दिसंबर 1947 को फिर से महात्मा गांधी पानीपत आए। लोगों ने गुहार लगाई थी कि पानीपत से उजड़ते हथकरघा उद्योग को उजड़ने से बचाएं। दोबारा उनके आने की खबर सुनते ही पानीपत का कत्लोगारत रुक गया था। पानीपत आने के बाद गांधी जी ने मुस्लिम समुदाय के लोगों से कहा- ‘‘ऐ मेरे भाइयों! आप लोग पानीपत से अपने कुटुंब कबीले को लेकर घर, कारोबार, जायदाद छोड़कर मत जाओ।
जहां जाना चाहते हो, वहां कोई हलवे मांडे नहीं मिलेंगे, वहां कुछ नहीं पड़ा है। आप लोगों का काम धंधा खराब हो जाएगा।’’ गांधी जी ने पानीपत छोड़कर जाने वाले मुस्लिमों से अपील की कि वे न जाएं हालांकि मुसलमानों को पाकिस्तान भेज रहे नेताओं ने बात नहीं मानी।
खड्डियां खाली होने पर पाकिस्तान से आए परिवारों को मिला रोजगार
इसके बाद महात्मा गांधी ने पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री गोपी चंद भार्गव से कहा कि पानीपत के मुस्लिम समुदाय के लोगों के शहर के खड्डियां खाली हो जाएंगी। ऐसे लोग पाकिस्तान से भी आएंगे। उनको तलाश कर पानीपत में काम दिलवाओ ताकि उनकी रोजी रोटी भी चलती रहे। इसके बाद ऐसे लोगों की तलाश कर पानीपत में काम दिया गया और बसाया गया। सरकार ने पानीपत के गुडमंडी स्थित अग्रवाल धर्मशाला में खड्डियां एकत्रित करवाकर अनुदान के रूप में 500 रुपये दिए। जिसमें से 200 रुपये की खड्डी और 300 रुपये नकद हर परिवार को दिए। इसी को ध्यान में रखते हुए पुनर्वास विभाग की ओर से तीस-तीस दुकानों की दो मार्केट, एक राम मंदिर के पास और दूसरी पचरंगा बाजार के पास बनाकर विस्थापित लोगों को दी। इसके बाद पाकिस्तान से आए इन लोगों ने अपना रोजगार शुरू किया।