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प्रशासन ने रात को ही हटवाए किसानों के पानीपत, डाहर और समलाखा से भंडारे के पंडाल, अब फिर दे सकते हैं धरना

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 29 Jan 2021 01:26 AM IST
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पानीपत। पानीपत टोल टैक्स पर किसानों के लिए तंबू लगाकर लगाए गए लंगर को पुलिस द्वारा करवाया गया बंद - फोटो : Panipat
दिल्ली हिंसा के बाद जिला प्रशासन ने कृषि कानून रद्द कराने की मांग को लेकर धरना दे रहे किसानों के पंडालों को खाली करवा दिया। यह कार्रवाई बुधवार रात ही कर दी गई। ऐसा इसलिए किया गया ताकि किसी भी टोल प्लाजा या अन्य पंडाल पर किसान न रूक सकें। वहीं, प्रशासन के चेतावनी के बाद धरने पर बैठे किसानों को भी बैकफुट पर आना पड़ा और धरना स्थल को छोड़ना पड़ा, लेकिन शुक्रवार को फिर सेे जिले भर के किसान नेता किसान भवन में एकजुट होकर फिर से आंदोलन को सक्रिय करने की प्लानिंग करेंगे। किसान नेताओं का कहना है कि वे दिल्ली नहीं गए, प्रशासन की हर बात को मान भी लिया, शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे थे, इसके बावजूद भी उन्हें मौके से हटाया गया है, जोकि गलत है। उन्होंने दिल्ली के लाल किला प्रकरण को भी गलत बताते हुए संबंधित षड्यंत्रकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की है।
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जीटी रोड पर किसानों की वापसी का दौरा जारी
दूसरी तरफ जीटी रोड पर भारी जाम होने की वजह से किसानों की वापसी का दौर जारी है। जिले के ज्यादातर किसान वापस आ चुके हैं, जो बचे हैं वे भी वापसी में हैं। वापस आने वाले किसानों ने बताया कि जाम ज्यादा होने के कारण दिल्ली में एंट्री तो दूर वे बार्डर तक भी नहीं पहुंच सके। दूसरी तरफ सरकार ने किसानों की तरफ कड़ा रुख कर लिया है।
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पानीपत टोल, डाहर टोल व समालखा से बुधवार रात को ही पुलिस ने 9 बजे किसानों के पंडालों को खाली करवाने का काम शुरू कर दिया था। रात 10 से 11 बजे तक को सभी धरनास्थल और पंडाल खाली करवाए जा चुके थे। इसके साथ दिल्ली आने जाने वाले किसानों के लिए लगाए गए भंडारे को भी उठवा दिया गया। पहले पुलिस द्वारा चेतावनी दी गई पर किसानों ने पंडाल खाली कर दिया। किसानों ने कहा कि उनका धरना प्रदर्शन शांति पूर्ण है।
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दिल्ली में कूच करने गए किसान दो दिन बाद भी भारी संख्या में अपने ट्रैक्टर ट्राले के साथ पंजाब की ओर लौट रहे है वापसी कर रहे किसानों का कहना है कि उन्होनें दिल्ली में कोई प्रदर्शन नहीं किया था। उनको वैसे ही बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। वहीं आधे से ज्यादा किसानों का कहना है कि उनको दिल्ली में प्रवेश ही करने नहीं दिया था तो वह कैसे प्रदर्शन करते। प्रकरण की जांच एजेंसियां कर रही है। ऐसेे किसान आंदोलन को बदनाम नहीं होने देंगे।
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