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Panipat News: कमजोर खंभों पर टिके बिजली के तार बने परेशानी
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पानीपत। बिजली की तार कमजोर खंभों पर टिके हुए हैं। तेज हवा के झोंके में खंभे ही नहीं ट्रांसफार्मर टूट कर गिर रहे हैं। पिछले 15 दिन में दो बार आई तेज आंधी में करीब एक हजार खंभे टूट चुके हैं। हाल यह है कि बिजली निगम छह दिन बाद भी इन खंभों को बदल सभी लाइनों को चालू नहीं कर पाया है।
खेतों में आज भी बिजली की करीब 15 लाइनें बंद पड़ी हैं। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
समालखा खंड के मनाना गांव में बुधवार शाम को ही खेत में गए किसान ओमप्रकाश की टूट तार की चपेट में आने से मौत हो गई थी। जिले में खेतों की करीब 15 लाइन आज भी बंद हैं।
जिले में 24 मई को तेज आंधी और बारिश के चलते जिले में करीब 282 खंभे टूट गए थे। इससे पहले तूफान में करीब 781 खंभे टूट गए थे। बिजली निगम की के अनुसार दो बार में करीब एक हजार खंभे टूट गए हैं। निगम ने नुकसान की रिपोर्ट बनाकर उच्चाधिकारियों को भेज दी है।
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इन सबके बीच निगम खेतों की बिजली सप्लाई अब तक सुचारु नहीं कर पाया है। ऐसे में किसानों को धार की पौध तैयार करने में परेशानी हो रही है। कई किसान पानी न होने पर पौध की जुताई करने को मजबूर हो गए हैं। जबकि कुछ किसान जेनरेटर का सहारा ले रहे हैं। ढिंडार गांव के खेतों में पहली बार आई आंधी के बाद बिजली सुचारु नहीं हो सकी।
किसान देवेंद्र, अनिल कुमार व रविंद्र ने बताया कि उन्होंने धान की पौध के लिए खेत तैयार कर दिया था। वे बिजली की लाइन ठीक कराने के लिए पावर हाउस में संपर्क कर रहे थे। इस बीच 24 मई को तेज बारिश आ गई। ऐसे में पौध की बिजाई करना मजबूरी बन गया। इसके बाद बिजली नहीं आई। ऐसे में उनको जेनरेटर का सहारा लेकर ट्यूबवेल चलाना पड़ता है। इससे उन पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
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खेतों में आज भी बिजली की करीब 15 लाइनें बंद पड़ी हैं। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
समालखा खंड के मनाना गांव में बुधवार शाम को ही खेत में गए किसान ओमप्रकाश की टूट तार की चपेट में आने से मौत हो गई थी। जिले में खेतों की करीब 15 लाइन आज भी बंद हैं।
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जिले में 24 मई को तेज आंधी और बारिश के चलते जिले में करीब 282 खंभे टूट गए थे। इससे पहले तूफान में करीब 781 खंभे टूट गए थे। बिजली निगम की के अनुसार दो बार में करीब एक हजार खंभे टूट गए हैं। निगम ने नुकसान की रिपोर्ट बनाकर उच्चाधिकारियों को भेज दी है।
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इन सबके बीच निगम खेतों की बिजली सप्लाई अब तक सुचारु नहीं कर पाया है। ऐसे में किसानों को धार की पौध तैयार करने में परेशानी हो रही है। कई किसान पानी न होने पर पौध की जुताई करने को मजबूर हो गए हैं। जबकि कुछ किसान जेनरेटर का सहारा ले रहे हैं। ढिंडार गांव के खेतों में पहली बार आई आंधी के बाद बिजली सुचारु नहीं हो सकी।
किसान देवेंद्र, अनिल कुमार व रविंद्र ने बताया कि उन्होंने धान की पौध के लिए खेत तैयार कर दिया था। वे बिजली की लाइन ठीक कराने के लिए पावर हाउस में संपर्क कर रहे थे। इस बीच 24 मई को तेज बारिश आ गई। ऐसे में पौध की बिजाई करना मजबूरी बन गया। इसके बाद बिजली नहीं आई। ऐसे में उनको जेनरेटर का सहारा लेकर ट्यूबवेल चलाना पड़ता है। इससे उन पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।