फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Panipat News ›   drug de-addiction centre in Panipat, but patients suffering from dengue and other diseases are admitted here

ग्राउंड रिपोर्ट: पानीपत में नाम का नशा मुक्ति केंद्र, यहां दाखिल रहते हैं डेंगू व दूसरी बीमारियों के मरीज

Sat, 30 Nov 2024 01:02 PM IST
नवीन दलाल संदीप सिंह, पानीपत (हरियाणा)
संदीप सिंह, पानीपत (हरियाणा) Published by: नवीन दलाल Updated Sat, 30 Nov 2024 01:02 PM IST
सार

पानीपत के नागरिक अस्पताल में एक मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. मोना नागपाल के रूप में उपलब्ध है। यहां वह स्टाफ व वार्ड में सुविधाओं की कमी के कारण नशा रोगियों को दाखिल नहीं करते। इस साल अब तक नशा रोगियों की 1172 ओपीडी हुई है।

विज्ञापन
drug de-addiction centre in Panipat, but patients suffering from dengue and other diseases are admitted here
पानीपत सिविल अस्पताल - फोटो : संवाद

विस्तार

पानीपत में नशा बहुत अधिक प्रचलन में है। युवा शौकियां तौर पर नशे का सेवन करते हैं फिर वह धीरे धीरे इस दलदल में फंस रहे हैं। जो युवा नशा छोड़ नया जीवन जीना चाहते हैं उनकी इस चाहत पर सरकार का कोई खास ध्यान नहीं है। जिले में सरकारी नशा मुक्ति केंद्र नाम मात्र का ही है। यहां एक मनोरोग विशेषज्ञ को छोड़ दें तो नशा मुक्ति केंद्र के लिए न तो कोई काउंसलर है और न ही नर्सिंग ऑफिसर। जिला नागरिक अस्पताल के चौथे तल पर एक कमरे में छह बेड लगाकर उसे नशा मुक्ति केंद्र का नाम दिया है। इसमें आमतौर पर डेंगू या अन्य बीमारियों से ग्रस्त मरीज दाखिल होते हैं। पिछले दो माह से तो यहां एक भी नशे का आदी युवा यहां भर्ती नहीं हुआ है। एक साल में यहां महज 44 रोगी ही भर्ती हुए हैं।

विज्ञापन


42 करोड़ की लागत से बनी जिला नागरिक अस्पताल की बिल्डिंग में नशा मुक्ति केंद्र के लिए जगह ही नहीं है। चौथे तल पर औपचारिकता पूरी करने के लिए बने वार्ड में फिलहाल तीन बुखार से ग्रस्त मरीज दाखिल हैं। यहां न तो कोई काउंसलर है और न ही नर्सिंग ऑफिसर। अगर किसी नशे के आदी युवा को यहां दाखिल किया जाता है तो वह अपनी मर्जी से उठकर बाहर जा सकता है। उनको रोकने के लिए यहां सुरक्षाकर्मी तक नहीं है। नशा मुक्ति केंद्र में मरीजों के लिए खाने व मनोरंजन की व्यवस्था होती है। मरीजों के लिए टीवी, वीडियो गेम ,केरमबोर्ड जैसे व्यवस्था होनी चाहिए लेकिन यहां सिवाय बेड के कुछ भी उपलब्ध नहीं है। 
विज्ञापन




यह तीन निजी नशा मुक्ति केंद्र हैं
असंध रोड स्थित डॉ. गौरव, गोहाना रोड स्थित डॉ. डीके व डॉ.  वरुण अरोड़ा नशा मुक्ति केंद्र हैं। आरटीओस अस्पताल में नशा मुक्ति केंद्र खुलने की प्रक्रिया चल रही है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


सिर्फ ओपीडी होती है
जिला नागरिक अस्पताल में एक मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. मोना नागपाल के रूप में उपलब्ध है। यहां वह स्टाफ व वार्ड में सुविधाओं की कमी के कारण नशा रोगियों को दाखिल नहीं करते। इस साल अब तक नशा रोगियों की 1172 ओपीडी हुई है। इनमें सबसे ज्यादा  598 एल्कोहलिक थे। 62 अफीम, 60 हेरोइन, तीन कोकिन, 135 तंबाकू, तीन इंजेक्शन व 355 अन्य प्रकार के नशे के आदी थे। 

अब एम्स की मदद से खुलेगा नशा मुक्ति
अब जिला नागरिक अस्पताल एम्स की मदद से नशा मुक्ति केंद्र खोलने की प्रक्रिया चल रही है। एम्स के अधिकारियों से बैठक हो चुकी है। एम्स यहां पर डॉक्टरों व काउंसलर की भर्ती भी कर रहा है। दिसंबर में यहां नशा मुक्ति केंद्र शुरू हो सकता है। इसके लिए लाइसेंस भी अप्लाई किया गया है। 


अधिकारी के अनुसार
जिला सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने बताया कि जिला नागरिक अस्पताल में जल्द नया नशा मुक्ति केंद्र शुरू हो रहा है। इसके  लिए प्रक्रिया चल रही है। एम्स के डॉक्टरों की इसमें मदद ली जा रही है। काउंसलर की भर्ती की जा रही है। यहां मरीजों के लिए तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed