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गोगा नवमी पर श्रद्धालुओं ने की प्रार्थना, मेले में की खरीदारी
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गोगा मेढ़ी मंदिर में जाते हुए श्रद्धालु।
- फोटो : Panipat
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इसराना। गांव मांडी में गोगा नवमी पर बुधवार को गुगा मेढ़ी पर सुबह चार बजे ही श्रद्धालु पूजा और ज्योत जलाने के लिए पहुंचाना शुरू हो गए। ग्रामीणों ने गोगा मेढ़ी पर पहुंचकर जनमानस एवं पशुओं के लिए सुख शांति की कामना की। पूजा में ग्रामीणों ने गुड़, आटा, दूध और गुलगुले के प्रसाद के अलावा नीला कपड़ा भी चढ़ाया।
मेढ़ी परिसर में बाहर लगे मेले में सजे स्टालों पर श्रद्धालुओं ने खरीदारी भी की। बच्चों के लिए लगाए गए झूले आकर्षण का केंद्र रहे। गोगा मेढ़ी के प्रबंधन के लिए गठित गोगा जाहरवीर सेवा समिति के स्वयंसेवकों के अलावा पुलिस ने भी मोर्चा संभाला। मेढ़ी परिसर और मेले में उमड़ी भीड़ को सभी ने व्यवस्थित रखा।
प्रबंधन के लिए गठित जाहरवीर गोगा मेढी सेवा समिति के प्रधान राजरूप घणघस, उपप्रधान सुरेश कुमार और सचिव महेंद्र सिंह ने बताया कि इस दौरान होने वाली आय को मेढ़ी के रखरखाव पर खर्च किया जाता है। समिति के सदस्य मास्टर रामपाल, दिलावर सिंह, जय सिंह, चांदराम, रमेश, नरेश, बलराज, जोगेंद्र, जगबीर, धनपत, विक्रम एवं राजा समेत सभी सदस्य ने व्यवस्था बनाने में सहयोग दिया।
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780 वर्षों से चल रही है गोगा मेढ़ी पर पूजा-अर्चना
प्रबंधन समिति के सदस्य दिलावर सिंह ने बताया कि करीब 780 वर्ष पहले राजस्थान के गोगा मेढ़ी से चाचा उदयराज और उनका भतीजा काला पांच ईंट लेकर आए थे। उन्ही ईंटों से यहां गोगा मेढ़ी स्थापित की गई थी। तभी से हर साल मेढ़ी पर भाद्रपद की शुक्ल पक्ष की नवमी को पूजा अर्चना की जाती है।
नहीं हुआ इनामी दंगल
गांव मांडी में गुगा मेढ़ी पर वर्षों से चली आ रही इनामी दंगल कराने की परंपरा टूट गई। कोरोना के चलते लगातार दो वर्ष से इनामी दंगल नहीं कराया जा रहा।
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मेढ़ी परिसर में बाहर लगे मेले में सजे स्टालों पर श्रद्धालुओं ने खरीदारी भी की। बच्चों के लिए लगाए गए झूले आकर्षण का केंद्र रहे। गोगा मेढ़ी के प्रबंधन के लिए गठित गोगा जाहरवीर सेवा समिति के स्वयंसेवकों के अलावा पुलिस ने भी मोर्चा संभाला। मेढ़ी परिसर और मेले में उमड़ी भीड़ को सभी ने व्यवस्थित रखा।
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प्रबंधन के लिए गठित जाहरवीर गोगा मेढी सेवा समिति के प्रधान राजरूप घणघस, उपप्रधान सुरेश कुमार और सचिव महेंद्र सिंह ने बताया कि इस दौरान होने वाली आय को मेढ़ी के रखरखाव पर खर्च किया जाता है। समिति के सदस्य मास्टर रामपाल, दिलावर सिंह, जय सिंह, चांदराम, रमेश, नरेश, बलराज, जोगेंद्र, जगबीर, धनपत, विक्रम एवं राजा समेत सभी सदस्य ने व्यवस्था बनाने में सहयोग दिया।
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780 वर्षों से चल रही है गोगा मेढ़ी पर पूजा-अर्चना
प्रबंधन समिति के सदस्य दिलावर सिंह ने बताया कि करीब 780 वर्ष पहले राजस्थान के गोगा मेढ़ी से चाचा उदयराज और उनका भतीजा काला पांच ईंट लेकर आए थे। उन्ही ईंटों से यहां गोगा मेढ़ी स्थापित की गई थी। तभी से हर साल मेढ़ी पर भाद्रपद की शुक्ल पक्ष की नवमी को पूजा अर्चना की जाती है।
नहीं हुआ इनामी दंगल
गांव मांडी में गुगा मेढ़ी पर वर्षों से चली आ रही इनामी दंगल कराने की परंपरा टूट गई। कोरोना के चलते लगातार दो वर्ष से इनामी दंगल नहीं कराया जा रहा।