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Panipat News: भरत विलाप प्रसंग सुन भावुक हुए श्रद्धालु
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श्रीराम कथा का विमोचन करती साध्वी प्रवीण भारती। संवाद
15वें श्रीराम कथा महोत्सव में साध्वी प्रवीणा भारती ने किया भरत के आदर्श चरित्र का मार्मिक वर्णन
संवाद न्यूज एजेंसी
समालखा। श्री आदर्श रामा ड्रामाटिक क्लब की ओर से पंजाबी रामलीला ग्राउंड में आयोजित 15वें श्रीराम कथा महोत्सव में शुक्रवार को साध्वी प्रवीणा भारती ने भरत विलाप प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। भगवान श्रीराम के प्रति भरत के अटूट प्रेम, त्याग और समर्पण की कथा सुनकर श्रद्धालु भावुक हो गए।
साध्वी प्रवीणा भारती ने बताया कि राजगद्दी मिलने के बावजूद भरत ने उसे स्वीकार नहीं किया। उनके लिए राजपाट से बढ़कर भगवान श्रीराम का प्रेम और सम्मान था। श्रीराम के वनवास की जानकारी मिलने पर भरत दुखी हुए और उन्हें वापस अयोध्या लाने के लिए वन की ओर चल पड़े।
उन्होंने बताया कि भरत ने भगवान श्रीराम की चरण पादुकाओं को सिंहासन पर स्थापित कर स्वयं सेवक के रूप में राजकाज संभाला। उनका जीवन त्याग, मर्यादा और भाईचारे की अनूठी मिसाल है। भरत ने अपने आचरण से सिद्ध किया कि सच्चा प्रेम अधिकार में नहीं, बल्कि त्याग और समर्पण में निहित होता है।
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साध्वी ने श्रद्धालुओं से भगवान श्रीराम और भरत के आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि परिवार में प्रेम, आपसी विश्वास, बड़ों का सम्मान और त्याग की भावना समाज को मजबूत बनाती है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
समालखा। श्री आदर्श रामा ड्रामाटिक क्लब की ओर से पंजाबी रामलीला ग्राउंड में आयोजित 15वें श्रीराम कथा महोत्सव में शुक्रवार को साध्वी प्रवीणा भारती ने भरत विलाप प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। भगवान श्रीराम के प्रति भरत के अटूट प्रेम, त्याग और समर्पण की कथा सुनकर श्रद्धालु भावुक हो गए।
साध्वी प्रवीणा भारती ने बताया कि राजगद्दी मिलने के बावजूद भरत ने उसे स्वीकार नहीं किया। उनके लिए राजपाट से बढ़कर भगवान श्रीराम का प्रेम और सम्मान था। श्रीराम के वनवास की जानकारी मिलने पर भरत दुखी हुए और उन्हें वापस अयोध्या लाने के लिए वन की ओर चल पड़े।
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उन्होंने बताया कि भरत ने भगवान श्रीराम की चरण पादुकाओं को सिंहासन पर स्थापित कर स्वयं सेवक के रूप में राजकाज संभाला। उनका जीवन त्याग, मर्यादा और भाईचारे की अनूठी मिसाल है। भरत ने अपने आचरण से सिद्ध किया कि सच्चा प्रेम अधिकार में नहीं, बल्कि त्याग और समर्पण में निहित होता है।
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साध्वी ने श्रद्धालुओं से भगवान श्रीराम और भरत के आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि परिवार में प्रेम, आपसी विश्वास, बड़ों का सम्मान और त्याग की भावना समाज को मजबूत बनाती है।
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