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तीन दिन अस्पताल में रखा, बिल थमाया 82 हजार
ब्यूरो/अमर उजाला,पानीपत
Updated Sun, 17 Jul 2016 11:55 PM IST
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पानीपत। गांव सिवाह के पास जीटी रोड स्थित पार्क अस्पताल में मरीज को तीन दिन तक रखने पर भी उसका ऑपरेशन नहीं किया गया। इसके बाद परिजनों को 82 हजार रुपये का बिल थमा दिया गया। इससे परिजन भड़क गए। पुलिस में शिकायत करने पर अस्पताल प्रबंधन को गलती का अहसास हुआ।
गांव जौरासी निवासी नरेश ने बताया कि कई दिन पहले उसके छोटे भाई नरेंद्र और मौसी का लड़का अजय सड़क हादसे में घायल हो गया था। सिविल अस्पताल के डॉक्टरों ने दोनों को खानपुर पीजीआई रेफर कर दिया था। लेकिन, एंबुलेंस चालक ने दोनों को पार्क अस्पताल में भर्ती करवा दिया। पार्क अस्पताल के डॉक्टरों ने नरेंद्र और अजय के पैरों का ऑपरेशन जल्द करने की बात कही।
डॉक्टरों ने कहा कि एक टांग का ऑपरेशन अभी होगा, जबकि दूसरी का तीन माह बादि किया जाएगा। इसके बाद भी पैर पूरी तरह ठीक नहीं होगा। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों ने दोनों को तीन दिन तक अस्पताल में रखा, लेकिन ऑपरेशन नहीं किया। इसके बाद तीन दिन का बिल 82 हजार रुपये उन्हेें थमा दिया गया।
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पार्क अस्पताल प्रबंधन की कार्य प्रणाली से नाराज परिजनों ने डॉक्टरों को धरने पर बैठने की धमकी दी। यह देख अस्पताल के सीईओ डॉ. संजय शर्मा नरेंद्र के घर समालखा पहुंच गए। बताया जाता है कि वहां सीईओ ने अस्पताल की गलती मान ली। इसके बाद नरेंद्र ने धरने पर बैठना रद्द कर दिया। इसके बाद परिजन अस्पताल में 22 हजार रुपये जमा करवाकर घायल नरेश को दूसरे अस्पताल में ले गए। थाना चांदनी बाग प्रभारी ने भी अस्पताल प्रबंधन को फटकार लगाई।
मरीज के परिजनों द्वारा लगाए गए सभी आरोप निराधार है। अस्पताल के डॉक्टरों ने नहीं कहा कि पैर ठीक नहीं हो सकता। न ही अस्पताल के डॉक्टरों ने ऑपरेशन की फीस लाखों रुपये बताई थी। मरीजों के परिजनों को समझा दिया है।
डॉ.संजय शर्मा,सीईओ पार्क अस्पताल
मरीजों के परिजनों और अस्पताल के प्रबंधन के बीच विवाद था। वह सुलझ गया है। मरीज के परिजन मरीज को दूसरे अस्पताल में ले गए है। पुलिस ने भी पार्क अस्पताल के प्रबंधन को हिदायत दी है।
जसपाल सिंह, प्रभारी थाना चांदनी बाग
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गांव जौरासी निवासी नरेश ने बताया कि कई दिन पहले उसके छोटे भाई नरेंद्र और मौसी का लड़का अजय सड़क हादसे में घायल हो गया था। सिविल अस्पताल के डॉक्टरों ने दोनों को खानपुर पीजीआई रेफर कर दिया था। लेकिन, एंबुलेंस चालक ने दोनों को पार्क अस्पताल में भर्ती करवा दिया। पार्क अस्पताल के डॉक्टरों ने नरेंद्र और अजय के पैरों का ऑपरेशन जल्द करने की बात कही।
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डॉक्टरों ने कहा कि एक टांग का ऑपरेशन अभी होगा, जबकि दूसरी का तीन माह बादि किया जाएगा। इसके बाद भी पैर पूरी तरह ठीक नहीं होगा। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों ने दोनों को तीन दिन तक अस्पताल में रखा, लेकिन ऑपरेशन नहीं किया। इसके बाद तीन दिन का बिल 82 हजार रुपये उन्हेें थमा दिया गया।
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पार्क अस्पताल प्रबंधन की कार्य प्रणाली से नाराज परिजनों ने डॉक्टरों को धरने पर बैठने की धमकी दी। यह देख अस्पताल के सीईओ डॉ. संजय शर्मा नरेंद्र के घर समालखा पहुंच गए। बताया जाता है कि वहां सीईओ ने अस्पताल की गलती मान ली। इसके बाद नरेंद्र ने धरने पर बैठना रद्द कर दिया। इसके बाद परिजन अस्पताल में 22 हजार रुपये जमा करवाकर घायल नरेश को दूसरे अस्पताल में ले गए। थाना चांदनी बाग प्रभारी ने भी अस्पताल प्रबंधन को फटकार लगाई।
मरीज के परिजनों द्वारा लगाए गए सभी आरोप निराधार है। अस्पताल के डॉक्टरों ने नहीं कहा कि पैर ठीक नहीं हो सकता। न ही अस्पताल के डॉक्टरों ने ऑपरेशन की फीस लाखों रुपये बताई थी। मरीजों के परिजनों को समझा दिया है।
डॉ.संजय शर्मा,सीईओ पार्क अस्पताल
मरीजों के परिजनों और अस्पताल के प्रबंधन के बीच विवाद था। वह सुलझ गया है। मरीज के परिजन मरीज को दूसरे अस्पताल में ले गए है। पुलिस ने भी पार्क अस्पताल के प्रबंधन को हिदायत दी है।
जसपाल सिंह, प्रभारी थाना चांदनी बाग