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मानवता शर्मसारः कंबल में लपेट 10 दिन की मासूम को फेंका, रोने की आवाज सुनकर लोगों ने दी पुलिस को खबर
Wed, 14 Dec 2022 10:43 PM IST
भूपेंद्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Wed, 14 Dec 2022 10:43 PM IST
सार
दूध की बोतल भी बच्ची के पास ही रखी थी। इतने में आसपास के लोग आ गए। गोलगप्पे की दुकान पर आई एक महिला ने बच्ची को संभाला। उसे दूध पिलाया गया। बच्ची मिलने से दो घंटे पहले दो संदिग्ध युवकों को कंबल के साथ देखा गया था।
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बच्ची को गोद मे लेटाकर दूध पिलाती राहगीर महिला
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
एक बार फिर हरियाणा के पानीपत में ममता शर्मसार हुई। करीब 10 दिन की मासूम बच्ची को दो युवक फेंककर फरार हो गए। बच्ची आठ मरला चौक पर रविंद्रा अस्पताल के पास खड़े एक मोटर रिक्शा में मिली। वह लगातार रो रही थी। उसकी आवाज सुनकर लोगों ने उसे खोजा और पुलिस को खबर की। बच्ची बीमार बताई जा रही है और उसे सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है।
रात करीब आठ बजे गांव लोहारी निवासी एक अध्यापक दवा लेने के लिए रविंद्रा अस्पताल आए। अपनी कार पार्क कर जैसे ही उतरे, उन्हें बच्ची के रोने की आवाज सुनाई दी। उन्हें इधर-उधर देखा, लेकिन उन्हें कुछ नहीं मिला। जिसके बाद पास ही एक फल दुकानदार को बुलाया, उसने भी बताया कि कापी देर से बच्ची की रोने की आवाज आ रही है।
मिलकर खोजने पर कुछ दूरी पर खड़े एक मोटर रिक्शा में कंबल में लिपटी बच्ची मिली। दूध की बोतल भी बच्ची के पास ही रखी थी। इतने में आसपास के लोग आ गए। गोलगप्पे की दुकान पर आई एक महिला ने बच्ची को संभाला। उसे दूध पिलाया गया। इसके साथ ही 112 पर पुलिस को सूचना दी गई।
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पुलिस ने आसपास पूछताछ की तो पता चला कि शाम करीब छह बजे दो युवक यही कंबल लेकर काफी देर से चक्कर काट रहे थे। कंबल में बच्ची होने की तब जानकारी नहीं थी। अब उसकी कंबल में बच्ची मिली। पुलिस ने आसपास के सीसीटीवी कैमरों को खंगालना शुरू कर दिया है। बच्चों को सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
इस संबंध में समाजसेवी सविता आर्या ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग इस तरह के मामलों पर लगाम लगाने में पूरी तरह से नाकाम हैं। डिलीवरी के बारे में आशा वर्कर्स को जानकारी होती है, इसके बावजूद ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं।
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रात करीब आठ बजे गांव लोहारी निवासी एक अध्यापक दवा लेने के लिए रविंद्रा अस्पताल आए। अपनी कार पार्क कर जैसे ही उतरे, उन्हें बच्ची के रोने की आवाज सुनाई दी। उन्हें इधर-उधर देखा, लेकिन उन्हें कुछ नहीं मिला। जिसके बाद पास ही एक फल दुकानदार को बुलाया, उसने भी बताया कि कापी देर से बच्ची की रोने की आवाज आ रही है।
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मिलकर खोजने पर कुछ दूरी पर खड़े एक मोटर रिक्शा में कंबल में लिपटी बच्ची मिली। दूध की बोतल भी बच्ची के पास ही रखी थी। इतने में आसपास के लोग आ गए। गोलगप्पे की दुकान पर आई एक महिला ने बच्ची को संभाला। उसे दूध पिलाया गया। इसके साथ ही 112 पर पुलिस को सूचना दी गई।
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पुलिस ने आसपास पूछताछ की तो पता चला कि शाम करीब छह बजे दो युवक यही कंबल लेकर काफी देर से चक्कर काट रहे थे। कंबल में बच्ची होने की तब जानकारी नहीं थी। अब उसकी कंबल में बच्ची मिली। पुलिस ने आसपास के सीसीटीवी कैमरों को खंगालना शुरू कर दिया है। बच्चों को सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
इस संबंध में समाजसेवी सविता आर्या ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग इस तरह के मामलों पर लगाम लगाने में पूरी तरह से नाकाम हैं। डिलीवरी के बारे में आशा वर्कर्स को जानकारी होती है, इसके बावजूद ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं।
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