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Panipat News: दरकते किले के पास निगम लगा रहा 650 फुट गहरा ट्यूबवेल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 13 Apr 2024 03:52 AM IST
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Corporation is installing 650 feet deep tube well near the cracked fort.
पानीपत। दरकते किले के बिल्कुल पास शिवाजी चौक पर नगर निगम करीब 650 फुट गहरा ट्यूबवेल लगा रहा है। यहां बोरवेल के लिए बड़ी मशीन लगाकर मिट्टी की खोदाई कराई जा रही है। जिससे आसपास के लोगों में किले के दरकने का डर बना हुआ है। ट्यूबवेल लगाने के लिए किले के नीचे से मिट्टी को हटाया गया है। यहां एक बड़ा गड्ढ़ा तैयार कर इसमें पानी भरा जा रहा है। लोगों में डर है कि मशीन की कंपन और बड़े बोरवेल से किले की कच्ची मिट्टी न ढह जाए।
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निगम अधिकारियों का कहना है कि जिस तकनीक से वे ट्यूबवेल लगा रहे हैं वे आधुनिक तकनीक है। इससे कोई खतरा नहीं है। इससे पहले भी कई बार किले के मकानों में दरारें आ चुकी हैं। चारों ओर अवैध कब्जे किए जा चुके हैं। किले की खुदाई कर इसकी मिट्टी से आसपास के लोगों ने अपनी जमीनों के भरत तक कर लिए हैं। करीब चार साल पहले जब किले के मकानों में दरारें आई थी तो आईआईटी रूड़की से विशेषज्ञों की टीम को बुलाया गया था। इस टीम ने किले की मिट्टी की जांच कर परीक्षण किया था। जिसमें किले की मिट्टी लूज साॅइल यानी कमजोर पाई गई थी। अधिकारियों के मुताबिक मिट्टी के परीक्षण के दौरान एक वर्ग सेंटीमीटर मिट्टी में करीब आठ टन वजन सहने की क्षमता होनी चाहिए। जो उस समय इस मिट्टी में काफी कम मिली थी। विशेषज्ञों का ये भी मानना रहा है कि यह किला कुदरती नहीं था। इसे मिट्टी के टीलों से बनाया गया था। इसी वजह से यहां की कमजोर मिट्टी होने की वजह से परेशानी आती है।
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किले की नालियों के गंदे पानी, पीने के पानी की पाइपलाइन, जमीन के अंदर पानी भरने की टंकियों को किले के दरकने का जिम्मेदार माना गया था। यहां तक किले पर बनाई डेयरियाें तक को सील करने के आदेश दिए गए थे। हालांकि कुछ लोगों का ये भी मानना है कि पानी की किल्लत को पूरा करने के लिए यहां ट्यूबवेल लगाया जा रहा है। जिससे कोई परेशानी नहीं होगी। तो कुछ का मानना ये है कि ट्यूबवेल को आसपास दूसरी जगह पर लगाया जाना चाहिए था। इसके अलावा करीब दो साल पहले ऐसे ही मिट्टी की ढांग गिरने से यहां एक युवक की मौत तक हो चुकी है।
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मिट्टी काफी कमजोर
किले की मिट्टी पहले से काफी कमजोर है। ट्यूबवेल लगाने से मशीनों की कंपन से भी मिट्टी ढह सकती है। पानी निकलने से भी सतह कमजोर हो सकती है। लोगों को पानी देने के लिए दाएं बाएं ट्यूबवेल लगाया जाता तो ज्यादा उचित होता।
विशाल वर्मा, प्रधान हलवाई हट्टा।

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50 फुट तक मिट्टी सही
किले की मिट्टी की जांच करवाई गई थी। 50 फुट गहराई तक मिट्टी की लोड लेने की क्षमता सही मिली। ट्यूबवेल किले के साथ सड़क के पास बनाया जा रहा है। हमारे हिसाब से यहां कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। लोगों की पानी की डिमांड को देखते हुए ट्यूबवेल लगाया जा रहा है।
प्रदीप भराड़ा, हाफिजाबादी राम नाटक क्लब।

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पानी की किल्लत के चलते लगाया जा रहा ट्यूबवेल
लोगों की पानी की किल्लत को देखते हुए ट्यूबवेल लगाया जा रहा है। वैसे तो इसकी जानकारी निगम की तकनीकी टीम को ज्यादा है। हमारे अनुसार तो यहां ट्यूबवेल लगाने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।

अशोक नांरग, निवर्तमान पार्षद प्रतिनिधि।


वर्जन-
आधुनिक तकनीक से लगा रहे ट्यूबवेल: निगम
किले के पास वाले ट्यूबवेल को आधुनिक तकनीक से लगाया जा रहा है। इस तकनीक का नाम रिवर्स रोटेटरी होता है। जिसमें दलक या कंपन नहीं होती। इसकी ड्रील एक जगह ही घूमती है। इसे आरामदायक और सुविधाजनक बनाने के लिए इसमें पानी का इस्तेमाल किया जाता है। इस ट्यूबवेल की वजह से इसका किले पर कोई भी प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
शिवराज, जेई, नगर निगम एवं जनस्वास्थ्य विभाग।
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