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9 से 13 अक्तूबर तक ट्रैकोमा के खिलाफ चलेगा अभियान
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पानीपत। महिला के आंखो की जांच करते हुए डॉ।
- फोटो : Panipat
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आंख की खतरनाक बीमारी ट्रैकोमा को चिह्नित करने के लिए एम्स की टीम शनिवार को पानीपत पहुंच गई। टीम डॉ. अमित भारद्वाज के नेतृत्व फील्ड में उतरी। अभियान के तहत 9 से 13 अक्तूबर तक जिले में लोगों की जांच की जाएगी। इसमें आशा वर्कर का सहयोग लिया जाएगा। आशा वर्कर को एक दिन के 250 रुपये नकद दिए जाएंगे। टीम 30 स्थानों पर करीब ढाई से तीन हजार लोगों की जांच करेगी।
इसके तहत 15 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में नेत्र संक्रमण की जांच होनी है। अब तक प्रदेश के 8 जिले कवर किए जा चुके हैं। इन 8 जिलों में ट्रैकोमा ट्राइकियासिस के 12 केस मिले हैं। डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. शशि गर्ग ने बताया कि जिले में 30 कलस्टर में अदियाना, बराना, फरीदपुर, गांजबड़, खेड़ी नांगल (2), वार्ड-8, वार्ड-9, वार्ड-13 में दो, वार्ड-19, वार्ड-22, वार्ड-23 में दो, वार्ड-25, वार्ड-27, वार्ड-1 तरफ मखदूम में पांच, वार्ड-1 तरफ राजपूतान में तीन, वार्ड-1 सिकंदरपुर में दो, कवि, शेरा, शोधापुर और वैसर शामिल हैं।। सर्वे रिपोर्ट केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को सौंपी जानी है।
ट्रैकोमा आंखों की गंभीर बीमारी : डॉ. शशि
डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. शशि गर्ग ने बताया कि ट्रैकोमा आंखों की गंभीर बीमारी है। जो बैक्ट्ररिया से होती है। इसमें आंखों में खारिज होती है। समय पर इस बीमारी का पता चलने पर दवा से इलाज हो सकता है। देरी से पता चलने पर सर्जरी ही इसका इलाज है। अंधेपन का बड़ा कारण ट्रैकोमा है। ट्रैकोमा बीमारी की पहचान करने की जिम्मेदारी एम्स के आरपी सेंटर को दी गई है। हम उनका सहयोग करेंगे।
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इसके तहत 15 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में नेत्र संक्रमण की जांच होनी है। अब तक प्रदेश के 8 जिले कवर किए जा चुके हैं। इन 8 जिलों में ट्रैकोमा ट्राइकियासिस के 12 केस मिले हैं। डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. शशि गर्ग ने बताया कि जिले में 30 कलस्टर में अदियाना, बराना, फरीदपुर, गांजबड़, खेड़ी नांगल (2), वार्ड-8, वार्ड-9, वार्ड-13 में दो, वार्ड-19, वार्ड-22, वार्ड-23 में दो, वार्ड-25, वार्ड-27, वार्ड-1 तरफ मखदूम में पांच, वार्ड-1 तरफ राजपूतान में तीन, वार्ड-1 सिकंदरपुर में दो, कवि, शेरा, शोधापुर और वैसर शामिल हैं।। सर्वे रिपोर्ट केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को सौंपी जानी है।
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ट्रैकोमा आंखों की गंभीर बीमारी : डॉ. शशि
डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. शशि गर्ग ने बताया कि ट्रैकोमा आंखों की गंभीर बीमारी है। जो बैक्ट्ररिया से होती है। इसमें आंखों में खारिज होती है। समय पर इस बीमारी का पता चलने पर दवा से इलाज हो सकता है। देरी से पता चलने पर सर्जरी ही इसका इलाज है। अंधेपन का बड़ा कारण ट्रैकोमा है। ट्रैकोमा बीमारी की पहचान करने की जिम्मेदारी एम्स के आरपी सेंटर को दी गई है। हम उनका सहयोग करेंगे।
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