{"_id":"6a91f4bcf3e6383ba40a9fbc","slug":"badminton-coach-amit-malik-acquitted-after-spending-three-years-and-eight-months-in-jail-panipat-news-c-244-1-pnp1001-163141-2026-08-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Panipat News: तीन साल आठ महीने जेल में काटने के बाद बैडमिंटन कोच अमित मलिक बरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Panipat News: तीन साल आठ महीने जेल में काटने के बाद बैडमिंटन कोच अमित मलिक बरी
विज्ञापन
माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। पानीपत की विशेष फास्ट ट्रैक (पॉक्सो) की पीयूषा शर्मा की अदालत ने नाबालिग बैडमिंटन खिलाड़ी को आत्महत्या के लिए उकसाने और यौन शोषण के गंभीर आरोपों से घिरे कोच अमित मलिक को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत ने पुलिस जांच में मिली गंभीर लापरवाही, साक्ष्यों के अभाव और मुख्य गवाहों के बयानों में पाए गए विरोधाभास के आधार पर यह अहम फैसला सुनाया।
अमित मलिक इस मामले के चलते पिछले तीन साल आठ महीने से अधिक समय न्यायिक हिरासत के तहत जेल में काट चुके हैं। उन्होंने अदालत के फैसले को न्यायसंगत बताया है।
मामला 21 मई 2023 का है। पानीपत स्थित अपने घर में 11वीं कक्षा की एक छात्रा ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। शुरुआती कार्रवाई में परिजनों ने किसी पर संदेह नहीं जताया था।
विज्ञापन
मृतका के पिता और बड़ी बहन के बयानों के आधार पर पुलिस ने बैडमिंटन कोच अमित मलिक के खिलाफ पॉक्सो एक्ट, दुष्कर्म और आत्महत्या
के लिए उकसाने की गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली थी। पुलिस ने इसी के आधार पर अमित मलिक को गिरफ्तार कर लिया था।
अदालत की मुख्य टिप्पणियां और बरी होने के आधार : सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस जांच की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। इस मामले में वीर नाम के एक अन्य युवक का नाम सामने आने के बावजूद पुलिस ने उसे जांच में शामिल नहीं किया। घर, बैडमिंटन अकादमी और होटलों के सीसीटीवी फुटेज में कोच का कोई गलत आचरण नहीं पाया गया। इसके अलावा पोस्टमार्टम व वैज्ञानिक जांच में भी जबरन यौन शोषण की पुष्टि नहीं हो सकी।
मुख्य गवाह मृतका की बहन ने स्वीकार किया कि उसने कभी आरोपी को गलत काम करते नहीं देखा। टूर्नामेंट के दौरान कोच का परिवार भी साथ रहता था और किसी ने भी कोई संदिग्ध गतिविधि नहीं देखी। अदालत ने माना कि भले ही मृतका नाबालिग थी, लेकिन आरोपी के खिलाफ यौन शोषण या उकसाने का कोई ठोस कानूनी साक्ष्य सिद्ध नहीं हुआ। इसके चलते उनको बरी कर दिया गया।
विज्ञापन
पानीपत। पानीपत की विशेष फास्ट ट्रैक (पॉक्सो) की पीयूषा शर्मा की अदालत ने नाबालिग बैडमिंटन खिलाड़ी को आत्महत्या के लिए उकसाने और यौन शोषण के गंभीर आरोपों से घिरे कोच अमित मलिक को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत ने पुलिस जांच में मिली गंभीर लापरवाही, साक्ष्यों के अभाव और मुख्य गवाहों के बयानों में पाए गए विरोधाभास के आधार पर यह अहम फैसला सुनाया।
अमित मलिक इस मामले के चलते पिछले तीन साल आठ महीने से अधिक समय न्यायिक हिरासत के तहत जेल में काट चुके हैं। उन्होंने अदालत के फैसले को न्यायसंगत बताया है।
विज्ञापन
मामला 21 मई 2023 का है। पानीपत स्थित अपने घर में 11वीं कक्षा की एक छात्रा ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। शुरुआती कार्रवाई में परिजनों ने किसी पर संदेह नहीं जताया था।
विज्ञापन
मृतका के पिता और बड़ी बहन के बयानों के आधार पर पुलिस ने बैडमिंटन कोच अमित मलिक के खिलाफ पॉक्सो एक्ट, दुष्कर्म और आत्महत्या
के लिए उकसाने की गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली थी। पुलिस ने इसी के आधार पर अमित मलिक को गिरफ्तार कर लिया था।
अदालत की मुख्य टिप्पणियां और बरी होने के आधार : सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस जांच की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। इस मामले में वीर नाम के एक अन्य युवक का नाम सामने आने के बावजूद पुलिस ने उसे जांच में शामिल नहीं किया। घर, बैडमिंटन अकादमी और होटलों के सीसीटीवी फुटेज में कोच का कोई गलत आचरण नहीं पाया गया। इसके अलावा पोस्टमार्टम व वैज्ञानिक जांच में भी जबरन यौन शोषण की पुष्टि नहीं हो सकी।
मुख्य गवाह मृतका की बहन ने स्वीकार किया कि उसने कभी आरोपी को गलत काम करते नहीं देखा। टूर्नामेंट के दौरान कोच का परिवार भी साथ रहता था और किसी ने भी कोई संदिग्ध गतिविधि नहीं देखी। अदालत ने माना कि भले ही मृतका नाबालिग थी, लेकिन आरोपी के खिलाफ यौन शोषण या उकसाने का कोई ठोस कानूनी साक्ष्य सिद्ध नहीं हुआ। इसके चलते उनको बरी कर दिया गया।