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Panipat News: बिना नोटिस के गिरफ्तारी को माना अवैध
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पानीपत। साइबर ठगी के एक मामले में बिना नोटिस दिए आरोपी तीन बैंककर्मियों को गिरफ्तार करना पुलिस को भारी पड़ा। अदालत ने गिरफ्तारी की प्रक्रिया को अवैध मानते हुए तीनों को रिहा करने के आदेश दिए। अदालत ने कहा कि सात साल से कम की सजा के मामले में बिना नोटिस दिए किसी भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। एसपी को आदेश भेजकर जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए।
साइबर क्राइम थाने में 18 जनवरी को उर्वरक की फ्रेंचाइजी देने के नाम पर 37 लाख रुपये की ठगी के मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इस मामले में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। तफ्तीश में तीन बैंककर्मियों के नाम भी सामने आए थे। इसी आधार पर पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश करते हुए चार दिन की पुलिस रिमांड मांगी थी। मामले की सुनवाई न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत में हुई। अदालत ने रिकॉर्ड का अवलोकन किया तो पाया कि आरोपियों को गिरफ्तार करने से पहले बीएनएसएस की धारा 35 के तहत नोटिस जारी नहीं किया गया था। अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के सतींदर कुमार अंतिल बनाम सीबीआई मामले में स्पष्ट किया गया है कि सात साल तक की सजा वाले मामलों में गिरफ्तारी से पहले नोटिस देना जरूरी है।
जांच अधिकारी से पूछा कि क्या आरोपियों को नोटिस दिया गया था, लेकिन अधिकारी संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। अदालत ने यह भी माना कि आरोपी बैंक कर्मचारी हैं, उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और बैंक से संबंधित दस्तावेज पहले ही जांच अधिकारी को दिए जा चुके थे। इन परिस्थितियों में अदालत ने कहा कि गिरफ्तारी की आवश्यकता नहीं थी। जांच अधिकारी ने कानूनी प्रावधानों का पालन नहीं किया। अदालत ने गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए तीनों को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया।
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साइबर क्राइम थाने में 18 जनवरी को उर्वरक की फ्रेंचाइजी देने के नाम पर 37 लाख रुपये की ठगी के मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इस मामले में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। तफ्तीश में तीन बैंककर्मियों के नाम भी सामने आए थे। इसी आधार पर पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश करते हुए चार दिन की पुलिस रिमांड मांगी थी। मामले की सुनवाई न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत में हुई। अदालत ने रिकॉर्ड का अवलोकन किया तो पाया कि आरोपियों को गिरफ्तार करने से पहले बीएनएसएस की धारा 35 के तहत नोटिस जारी नहीं किया गया था। अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के सतींदर कुमार अंतिल बनाम सीबीआई मामले में स्पष्ट किया गया है कि सात साल तक की सजा वाले मामलों में गिरफ्तारी से पहले नोटिस देना जरूरी है।
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जांच अधिकारी से पूछा कि क्या आरोपियों को नोटिस दिया गया था, लेकिन अधिकारी संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। अदालत ने यह भी माना कि आरोपी बैंक कर्मचारी हैं, उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और बैंक से संबंधित दस्तावेज पहले ही जांच अधिकारी को दिए जा चुके थे। इन परिस्थितियों में अदालत ने कहा कि गिरफ्तारी की आवश्यकता नहीं थी। जांच अधिकारी ने कानूनी प्रावधानों का पालन नहीं किया। अदालत ने गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए तीनों को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया।
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