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वाटर फोबिया से ग्रस्त अनिरुद्ध ने सीखी तैराकी, जीता रजत
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संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। वाटर फोबिया से ग्रस्त 11 वर्षीय अनिरुद्ध सिंह ने जहां अपने भय पर काबू पाया वहीं तैराकी सीखी। अब पदक जीतकर पानीपत का नाम रोशन कर रहे हैं। बड़ी बहन रिद्धी और तैराक वंश पानू को देखकर उसने अपने फोबिया को दूर करने की ठानी और तैरने के लिए पानी में उतर गए। वह गुजरात से रजत पदक जीतकर पानीपत लौटे हैं।
वर्ष 2019 में महज आठ वर्ष की उम्र में तैराकी सीखने वाले अनिरुद्ध ने कड़ी मेहनत की। उनकी मेहनत दोगुनी थी। पानी से अपने डर को हराने के साथ ही तैराकी को कॅरियर के रूप में चुनना था। स्वीमिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया की ओर से गुजरात के राजकोट में 24 से 26 जून तक आयोजित प्रतियोगिता में अनिरुद्ध ने अपनी श्रेणी में रजत पदक जीता। यह उसकी डर की जीत रही। वर्ष 2019 में तैराकी सीखने के कुछ दिन बाद ही अनिरुद्ध ने स्टेट स्वीमिंग प्रतियोगिता में भाग लिया, जिसमें उन्होंने रजत और कांस्य पदक जीता था। कोरोना महामारी के दौरान तैराकी कम कर दी थी और प्रतियोगिता में भी भाग नहीं ले सके थे। अनिरुद्ध ने कहा कि पहले तैराकी से डर लगता था, लेकिन अब तैराकी में नया रिकॉर्ड बनाना ही उनका लक्ष्य है।
नया नेशनल रिकॉर्ड बनाना है लक्ष्य
अनिरुद्ध का लक्ष्य है कि वह भी वंश पानू एवं अन्य तैराक की तरह नया नेशनल रिकॉर्ड बनाएं। अनिरुद्ध ब्रेस्ट स्ट्रोक तैराक हैं। नेशनल प्रतियोगिता में भी अनिरुद्ध ने 50, 100 और 200 मीटर में भाग लिया था। जिसमें से 50 मीटर में दूसरा स्थान प्राप्त किया, 100 मीटर में वह छठे स्थान पर रहे। कोच राजेश दहिया उन्हें तैराकी सिखा रहे हैं। अनिरुद्ध के पिता संजीव नांदल बाल विकास प्रोग्रेसिव स्कूल में अध्यापक हैं।
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पानीपत। वाटर फोबिया से ग्रस्त 11 वर्षीय अनिरुद्ध सिंह ने जहां अपने भय पर काबू पाया वहीं तैराकी सीखी। अब पदक जीतकर पानीपत का नाम रोशन कर रहे हैं। बड़ी बहन रिद्धी और तैराक वंश पानू को देखकर उसने अपने फोबिया को दूर करने की ठानी और तैरने के लिए पानी में उतर गए। वह गुजरात से रजत पदक जीतकर पानीपत लौटे हैं।
वर्ष 2019 में महज आठ वर्ष की उम्र में तैराकी सीखने वाले अनिरुद्ध ने कड़ी मेहनत की। उनकी मेहनत दोगुनी थी। पानी से अपने डर को हराने के साथ ही तैराकी को कॅरियर के रूप में चुनना था। स्वीमिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया की ओर से गुजरात के राजकोट में 24 से 26 जून तक आयोजित प्रतियोगिता में अनिरुद्ध ने अपनी श्रेणी में रजत पदक जीता। यह उसकी डर की जीत रही। वर्ष 2019 में तैराकी सीखने के कुछ दिन बाद ही अनिरुद्ध ने स्टेट स्वीमिंग प्रतियोगिता में भाग लिया, जिसमें उन्होंने रजत और कांस्य पदक जीता था। कोरोना महामारी के दौरान तैराकी कम कर दी थी और प्रतियोगिता में भी भाग नहीं ले सके थे। अनिरुद्ध ने कहा कि पहले तैराकी से डर लगता था, लेकिन अब तैराकी में नया रिकॉर्ड बनाना ही उनका लक्ष्य है।
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नया नेशनल रिकॉर्ड बनाना है लक्ष्य
अनिरुद्ध का लक्ष्य है कि वह भी वंश पानू एवं अन्य तैराक की तरह नया नेशनल रिकॉर्ड बनाएं। अनिरुद्ध ब्रेस्ट स्ट्रोक तैराक हैं। नेशनल प्रतियोगिता में भी अनिरुद्ध ने 50, 100 और 200 मीटर में भाग लिया था। जिसमें से 50 मीटर में दूसरा स्थान प्राप्त किया, 100 मीटर में वह छठे स्थान पर रहे। कोच राजेश दहिया उन्हें तैराकी सिखा रहे हैं। अनिरुद्ध के पिता संजीव नांदल बाल विकास प्रोग्रेसिव स्कूल में अध्यापक हैं।
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