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‘सारथी’ के बिना एंबुलेंस हैं खड़ीं
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पानीपत। सिविल अस्पताल में खड़ी एंबुलेंस।
- फोटो : Panipat
पानीपत। शहर में कोरोना का नया वैरिएंट ओमिक्रॉन दस्तक दे चुका है। स्वास्थ्य विभाग को सीमित साधनों में इस चुनौती से पार पाना है। जिले की 14 लाख आबादी पर महज 28 सरकारी एंबुलेंस हैं। इनमें से 15 अत्याधुनिक एंबुलेंस शोपीस बनकर रह गई हैं, क्योंकि इनके संचालन के लिए चालक ही नहीं हैं।
अस्पताल में सिर्फ 13 एंबुलेंस ही काम में ली जा सकती है, इनमें से भी चार एंबुलेंस गर्भवतियों को अस्पताल लाने एवं घर ले जाने के लिए निर्धारित हैं। बाकी एंबुलेंस की ऑनकॉल व्यवस्था है। इन 13 एंबुलेंस पर 31 चालक हैं। एक चालक को 12 घंटे तक लगातार काम करता होता है, कई बार ये बढ़कर 18 घंटे तक हो जाते हैं। सभी एंबुलेंस के संचालन के लिए 25 चालकों की जरूरत है। अब कोरोना की संभावित तीसरी लहर में ‘सारथी’ की कमी बड़ी परेशानी बन सकती है।
एक एंबुलेंस पर तीन चालक और तीन ईएमटी होने चाहिए
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की गाइनलाइन के मुताबिक, एक एंबुलेंस पर तीन ड्राइवर और तीन इमरजेंसी मेडिकल टेक्निशियन और 15 एंबुलेंस पर दो सुपरवाइजर होने चाहिए। जिले में मात्र 31 एंबुलेंस चालक हैं, जबकि नियमानुसार 84 चालक होने चाहिए। ईएमटी 25 हैं जबकि इनकी संख्या भी 84 होनी चाहिए।
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एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस एक भी नहीं
सिविल अस्पताल परिसर में लगभग 15 एंबुलेंस सिर्फ खड़ी हैं। विभाग के पास 15 पीटीएस (पेशेंट ट्रांसफर सपोर्ट), 13 बीएलएस (बेसिक लाइफ सपोर्ट) एंबुलेंस हैं। एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) एक भी नहीं है।
भर्तियां रद्द होना बनी समस्या
डेढ़ माह पहले आउटसोर्सिंग पर चालकों और ईएमटी की भर्ती होनी थी। प्रदेश सरकार ने आउटसोर्सिंग नीति पार्ट-वन और टू के तहत ठेकेदारी प्रथा को खत्म करने के उद्देश्य से भर्ती पर रोक लगा दी है। इस बाबत प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, बोर्ड-निगमों के मुख्य प्रशासकों, प्रबंध निदेशकों, पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार, सभी जिलों डीसी, एसडीएम को पत्र भी भेजा गया था।
नवजातों के लिए नहीं स्पेशल एंबुलेंस
न्यू बोर्न एक्शन प्लान के तहत गंभीर बीमार बच्चों के लिए एक भी एंबुलेंस उपलब्ध नहीं है। बीमार बच्चों को भी सामान्य एंबुलेंस में रेफर करना पड़ता है। ऐसे में उनकी जान को खतरा बना रहता है। कोरोना की संभावित तीसरी लहर में ये संकट सिरदर्द बन सकता है।
हमारे पास एंबुलेंस हैं चालक नहीं
हमारे पास एंबुलेंस तो पर्याप्त हैं लेकिन चालकों की कमी है। सरकार ने डेढ़ माह पहले एंबुलेंस चालकों की भर्ती रद्द कर दी थी। चालकों की भर्ती के आवेदन भी प्राप्त हो गए थे। अब उनके पास जितने एंबुलेंस चालक हैं, उनसे ही काम लिया जा रहा है। अब चालकों की भर्ती सरकार को ही करनी है।
- डॉ. नवीन सुनेजा, नोडल अधिकारी, एनएचएम
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अस्पताल में सिर्फ 13 एंबुलेंस ही काम में ली जा सकती है, इनमें से भी चार एंबुलेंस गर्भवतियों को अस्पताल लाने एवं घर ले जाने के लिए निर्धारित हैं। बाकी एंबुलेंस की ऑनकॉल व्यवस्था है। इन 13 एंबुलेंस पर 31 चालक हैं। एक चालक को 12 घंटे तक लगातार काम करता होता है, कई बार ये बढ़कर 18 घंटे तक हो जाते हैं। सभी एंबुलेंस के संचालन के लिए 25 चालकों की जरूरत है। अब कोरोना की संभावित तीसरी लहर में ‘सारथी’ की कमी बड़ी परेशानी बन सकती है।
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एक एंबुलेंस पर तीन चालक और तीन ईएमटी होने चाहिए
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की गाइनलाइन के मुताबिक, एक एंबुलेंस पर तीन ड्राइवर और तीन इमरजेंसी मेडिकल टेक्निशियन और 15 एंबुलेंस पर दो सुपरवाइजर होने चाहिए। जिले में मात्र 31 एंबुलेंस चालक हैं, जबकि नियमानुसार 84 चालक होने चाहिए। ईएमटी 25 हैं जबकि इनकी संख्या भी 84 होनी चाहिए।
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एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस एक भी नहीं
सिविल अस्पताल परिसर में लगभग 15 एंबुलेंस सिर्फ खड़ी हैं। विभाग के पास 15 पीटीएस (पेशेंट ट्रांसफर सपोर्ट), 13 बीएलएस (बेसिक लाइफ सपोर्ट) एंबुलेंस हैं। एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) एक भी नहीं है।
भर्तियां रद्द होना बनी समस्या
डेढ़ माह पहले आउटसोर्सिंग पर चालकों और ईएमटी की भर्ती होनी थी। प्रदेश सरकार ने आउटसोर्सिंग नीति पार्ट-वन और टू के तहत ठेकेदारी प्रथा को खत्म करने के उद्देश्य से भर्ती पर रोक लगा दी है। इस बाबत प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, बोर्ड-निगमों के मुख्य प्रशासकों, प्रबंध निदेशकों, पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार, सभी जिलों डीसी, एसडीएम को पत्र भी भेजा गया था।
नवजातों के लिए नहीं स्पेशल एंबुलेंस
न्यू बोर्न एक्शन प्लान के तहत गंभीर बीमार बच्चों के लिए एक भी एंबुलेंस उपलब्ध नहीं है। बीमार बच्चों को भी सामान्य एंबुलेंस में रेफर करना पड़ता है। ऐसे में उनकी जान को खतरा बना रहता है। कोरोना की संभावित तीसरी लहर में ये संकट सिरदर्द बन सकता है।
हमारे पास एंबुलेंस हैं चालक नहीं
हमारे पास एंबुलेंस तो पर्याप्त हैं लेकिन चालकों की कमी है। सरकार ने डेढ़ माह पहले एंबुलेंस चालकों की भर्ती रद्द कर दी थी। चालकों की भर्ती के आवेदन भी प्राप्त हो गए थे। अब उनके पास जितने एंबुलेंस चालक हैं, उनसे ही काम लिया जा रहा है। अब चालकों की भर्ती सरकार को ही करनी है।
- डॉ. नवीन सुनेजा, नोडल अधिकारी, एनएचएम