पर्ची आवंटन को लेकर शुगर मिल प्रबंधन पर लगाया पक्षपात का आरोप, रसूकदार व मिलीभगत वालों को ही मिलती है पर्चियां

Rohtak Bureau Updated Wed, 16 May 2018 12:06 AM IST
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पर्ची आवंटन को लेकर शुगर मिल प्रबंधन पर लगाया पक्षपात का आरोप, रसूखदार व मिलीभगत वालों को ही मिलती है पर्चियां
- गन्ना उत्पादकों ने शुगर मिल में रूकवाया गन्ने का तौल, समझाने-बुझाने के बाद शांत हुए किसान
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत।
गन्ने के उठान में पर्ची आवंटन में पक्षपात का आरोप लगाते हुए सैकड़ों गन्ना उत्पादक किसानों ने शुगर मिल प्रबंधन के खिलाफ रोष स्वरूप नारेबाजी की। आक्रोशित किसानों जिनमें दर्जनों महिलाएं भी शामिल थी, ने शुगर मिल में कांटे पर गन्ने का तौल रूकवा दिया। इससे कुछ देर के लिए मिल में पिराई का काम भी बंद हो गया। विरोध के चलते दो घंटे तक काम प्रभावित रहा। प्रबंधन की की ओर से किसानों को समझा बुझा कर शांत किया गया।
आक्रोशित किसानों ब्रह्मपाल नागर, कपिल कुराड़, सुखपाल आटा, सतीश आटा, विकास छाजपुर, ताहिर नवादा, रकम सिंह पसीना, ईश्वर कुराड़, भोेल सिंह पसीना आदि सहित महिलाओं बाली, कृष्णा, प्रेमी, बबीता, पूनम, संतोष आदि का आरोप है कि शुगर मिल प्रबंधन किसानों को पर्चियां देने में पक्षपात करते हैं। किसानों का आरोप है शुगर मिल के सीडीओ एवं एमडी द्वारा मिलीभगत कर पर्ची आवंटन में जमकर लूट व मनमानी की जा रही है। वे उन किसानों को तो पर्चियां दे रहे हैं जिनके खेतों से गन्ने की छुलाई व उठान हो चुका है जबकि जिन किसानों का गन्ना इतनी तेज गर्मी में भी सूख रहा है, उन्हें पर्चियां नहीं दी जा रही। इस दौरान आक्रोशित किसानों की सीडीओ कर्मवीर से तीखी बहस भी हुई। आक्रोशित किसानों व महिलाओं का आरोप है कि सीडीओ ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। इससे कुछ देर के माहौल तनावपूर्ण भी हो गया। किसानों के आक्रोश को देखते हुए सीडीओ समेत मौके पर मौजूद अन्य कर्मचारी मौके से चले गए। इसके बाद आक्रोशित किसानों ने पेराई स्थल के पास ट्रैक्टर-ट्राली अड़ाकर रास्ता रोक दिया जिससे मिल प्रबंधन को कुछ देर के लिए पेराई का काम रोकना पड़ा। बीती रात से ही गन्ना लेकर पहुंचे किसानों का दोपहर बाद तक भूख प्यास से हाल बेहाल हो गया था लेकिन किसानों की समस्याएं नहीं सुनी गई। हालांकि इसके बाद लगभग डेढ़ बजे शुगर मिल के एमडी मौके पर पहुंचे और किसानों को गन्ने का पूरा उठान करने के प्रति आश्वस्त किया। किसानों ने एमडी के समक्ष गन्ने का स्टैंडिंग सर्वे करवाने और गन्ने का उठान करवाने की मांग की। एमडी ने किसानों को आश्वासन दिया कि खेतों में गन्ने का स्टैंडिंग सर्वे करवाकर किसानों का पूरा गन्ना लेने की व्यवस्था कर दी जाएगी। इसके बाद ही मिल में पिराई व तुलाई का काम शुरू हो पाया।
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क्या है स्टैंडिंग सर्वे?
शुगर मिल द्वारा पेराई सत्र शुरू होने के एक निश्चित अवधि बाद स्टैंडिंग सर्वे करवाया जाता है। इसके तहत मिल प्रबंधन खेतों का निरीक्षण कर खेतों में खड़े गन्ने का ब्यौरा तैयार करता है और उसी के अनुसार संबंधित गन्ना उत्पादक किसानों को पर्चियां आवंटित की जाती हैं ताकि जिन किसानों का गन्ना खेतों में शेष रह गया है, उसे शुगर मिल तक लाया जा सके। अमूमन स्टैंडिंग सर्वे का काम एक मार्च को शुरू होता है। किसानों का आरोप है कि लगभग ढाई महीने ज्यादा बीत जाने के बावजूद अभी तक शुगर मिल प्रबंधन द्वारा स्टैंडिग सर्वे शुरू नहीं किया गया है जिससे किसानों की हजारों एकड़ फसल अभी तक खेतों में ही अटकी हुई है जबकि कहा जा रहा है कि 25 मई को शुगर मिल में पेराई सत्र का काम बंद हो जाएगा।
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मिलीभगत कर उधारी में बेची जा रही पर्चियां
शुगर मिल में गन्ना लेकर पहुंचे किसानों कपिल कुराड़, सुखपाल आटा, सतीश आटा, विकास छाजपुर, ईश्वर कुराड़ आदि ने मिल प्रबंधन पर पचयों के आबंटन में पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि अधिकारियों से मिलीभगत कर रसूखदार किसानों द्वारा उधारी में पचयां बेची जा रही हैं। उन्होंने कहा कि कुछ किसानों जिनके गन्ने का उठान हो चुका है, उन्हें तो अपने रसूख के कारण अग्रिम पर्चियां भी मिल रही है जबकि जिन किसानों का गन्ना अभी तक खेतों में खड़ा है, उन्हें समय पर पचयां नहीं मिल पा रही जिससे उनका गन्ना ट्रालियों में ही सूख रहा है। उन्होंने बताया कि मिल के अधिकारियों ने बीते सोमवार तक नया कैलेंडर तैयार करने की बात कही थी लेकिन अभी तक नया कैलेंडर तैयार नहीं किया गया, उल्टे अब नया कैलेंडर बनाने से ही मना किया जा रहा है। उन्होंने नए कलैंडर के अनुसार किसानों को पचयां देने की मांग की।
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7-8 दिनों से छिला हुआ है गन्ना
किसानों ब्रह्मपाल, सतीश, ईश्वर आदि ने बताया कि किसानों ने दर्जनों मजदूर लगाकर सप्ताह दस दिन पहले ही गन्ने की कटाई-छिलाई करवाकर ट्राली में लोड करवा दिया था लेकिन समय पर पर्ची नहीं मिल पा रही। उन्होंने बताया कि एक तो भीषण गर्मी में गन्ने के वजन में कमी आ जाती है, दूसरे ट्राली में लोड गन्ना सूखने लगता है जिससे किसानों को काफी नुक्सान व परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं।
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अभी भी सैकड़ों एकड़ गन्ना शेष
किसानों ने बताया कि खेतों में किसानों का अभी भी सैकड़ों एकड़ गन्ना शेष है। इनमें ब्रह्मपाल के 40 एकड़, ताहिर नवादा के 15 एकड़, रकम ङ्क्षसह पसीना के 22 एकड़, भोपाल पसीना के 24 एकड़, ईश्वर कुराड़ के 40 एकड़ गन्ना शेष है। इनके अलावा सैंकड़ों किसान ऐसे हैं जिनका हजारों एकड़ गन्ना खेतों में खड़ा सूख रहा है। इसके बावजूद उन्हें समय पर पचयां नहीं दी जा रही और अब तो यह कहकर पचयां देने से ही मना किया जा रहा है कि जिन्हें पचयां देनी थी, वे दी जा चुकी हैं, अब ओर पचयां नहीं मिलेगी। इसी के चलते किसानों में रोष पैदा हुआ। ऐसी हालत में अब किसान जाए तो जाए कहां?
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