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कांग्रेस समर्थितों को नहीं मिला बड़े नेताओं का साथ, परिवार की फूट से इनेलो दौड़ से रही बाहर
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कांग्रेस समर्थितों को नहीं मिला बड़े नेताओं का साथ, परिवार की फूट से इनेलो दौड़ से रही बाहर
संदीप भौरिया
पानीपत। नगर निगम चुनाव में भाजपा की जीत का बड़ा कारण भाजपा का एकता से चुनाव लड़ना रहा है। भाजपा के बड़े नेताओं ने इसमें ग्राउंड पर जाकर काम किया। कार्यकर्ताओं की बूथ स्तर पर ड्यूटी लगाई गई। हर 100 मीटर के दायरे में एक गुप्त कार्यकर्ता की ड्यूटी लगाई गई जिसका काम अंदर के घात को रोकना था। जो भाजपा से नाराज चल रहे थे नेताओं ने उन्हें घर जाकर मनाया। भाजपा की मेयर प्रत्याशी अवनीत कौर ने कांग्रेसियों से भी वोट मांगे। दूसरी ओर कांग्रेस के बड़े नेताओं ने सिंबल पर लड़ने से इंकार कर दिया। शहर में कांग्रेस के नेताओं ने अपनी जमीन बचाने के लिए अपने उम्मीदवार उतार दिए। दूसरे नेताओं ने अपना हाथ खींच लिया। कांग्रेस के दूसरे नेताओं ने अपने ही समर्थित उम्मीदवारों के खिलाफ प्रत्याशी उतार दिए। इसका सीधा लाभ भाजपा को मिला। कांग्रेस के बड़े नेताओं ने ग्राउंड पर आकर अपने समर्थित उम्मीदवारों के लिए वोट नहीं मांगे। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर ये कहते रहे कि कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों से पार्टी का कोई लेना देना नहीं है। इससे कांग्रेस के कार्यकर्ता कट गए। उन्होंने आजाद व दूसरी पार्टियों के उम्मीदवारों को वोट किया। घर की लड़ाई के कारण इनेलो के मेयर प्रत्याशी की पानीपत में जमानत जब्त हो गई। उसे महज 7309 वोट मिले। इनेलो ने महज अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए अपना उम्मीदवार उतारा था। उसके लिए इनेलो के नेताओं ने प्रचार प्रसार नहीं किया। बसपा व इनेलो के कार्यकर्ताओं में साफ तौर पर फूट देखी गई। इनेलो की प्रत्याशी ने इक्का दुक्का जगह पर ही जनसभा की। ऐसे में इनेेलो की प्रत्याशी शुरू से ही दौड़ से बाहर नजर आ रही थी। दुष्यंत समर्थकों ने इनको हराने में अपना रोल अदा किया। इन तमाम तथ्यों के कारण भाजपा की मेयर प्रत्याशी अवनीत कौर की 74940 वोट से जीत दर्ज की।
संदीप भौरिया
पानीपत। नगर निगम चुनाव में भाजपा की जीत का बड़ा कारण भाजपा का एकता से चुनाव लड़ना रहा है। भाजपा के बड़े नेताओं ने इसमें ग्राउंड पर जाकर काम किया। कार्यकर्ताओं की बूथ स्तर पर ड्यूटी लगाई गई। हर 100 मीटर के दायरे में एक गुप्त कार्यकर्ता की ड्यूटी लगाई गई जिसका काम अंदर के घात को रोकना था। जो भाजपा से नाराज चल रहे थे नेताओं ने उन्हें घर जाकर मनाया। भाजपा की मेयर प्रत्याशी अवनीत कौर ने कांग्रेसियों से भी वोट मांगे। दूसरी ओर कांग्रेस के बड़े नेताओं ने सिंबल पर लड़ने से इंकार कर दिया। शहर में कांग्रेस के नेताओं ने अपनी जमीन बचाने के लिए अपने उम्मीदवार उतार दिए। दूसरे नेताओं ने अपना हाथ खींच लिया। कांग्रेस के दूसरे नेताओं ने अपने ही समर्थित उम्मीदवारों के खिलाफ प्रत्याशी उतार दिए। इसका सीधा लाभ भाजपा को मिला। कांग्रेस के बड़े नेताओं ने ग्राउंड पर आकर अपने समर्थित उम्मीदवारों के लिए वोट नहीं मांगे। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर ये कहते रहे कि कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों से पार्टी का कोई लेना देना नहीं है। इससे कांग्रेस के कार्यकर्ता कट गए। उन्होंने आजाद व दूसरी पार्टियों के उम्मीदवारों को वोट किया। घर की लड़ाई के कारण इनेलो के मेयर प्रत्याशी की पानीपत में जमानत जब्त हो गई। उसे महज 7309 वोट मिले। इनेलो ने महज अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए अपना उम्मीदवार उतारा था। उसके लिए इनेलो के नेताओं ने प्रचार प्रसार नहीं किया। बसपा व इनेलो के कार्यकर्ताओं में साफ तौर पर फूट देखी गई। इनेलो की प्रत्याशी ने इक्का दुक्का जगह पर ही जनसभा की। ऐसे में इनेेलो की प्रत्याशी शुरू से ही दौड़ से बाहर नजर आ रही थी। दुष्यंत समर्थकों ने इनको हराने में अपना रोल अदा किया। इन तमाम तथ्यों के कारण भाजपा की मेयर प्रत्याशी अवनीत कौर की 74940 वोट से जीत दर्ज की।