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अफसरों पर कार्रवाई की सूचना को सरकार
Updated Tue, 28 Nov 2017 12:22 AM IST
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अफसरों पर कार्रवाई की सूचना को सरकार
ने बताया निजी जानकारी, जन सूचना अधिकारी तलब
अमर उजाला ब्यूरो
समालखा। अंबाला मनरेगा घोटाले की लोकायुक्त जांच में दोषी पाए गए चार आईएएस अधिकारियों के बारे में सूचना न देने पर राज्य सूचना आयोग ने कार्मिक विभाग (हरियाणा सरकार) के जन सूचना अधिकारी को नोटिस भेजकर 12 दिसंबर को चंडीगढ़ तलब किया है। केस की सुनवाई मुख्य सूचना आयुक्त यशपाल सिंघल करेंगे। आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर ने आरटीआई के तहत इसकी जानकारी मांगी थी।
आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर ने बताया कि अंबाला में मनरेगा घोटाले की वर्ष 2012 में विजिलेंस जांच हुई थी। इसमें चार आईएएस अधिकारियों सहित वन विभाग के अधिकारी दोषी पाए गए थे। आरोप है कि, इन नामजद आरोपियों के विरुद्ध न तो तत्कालीन हुड्डा सरकार और न ही खट्टर सरकार ने कोई कार्रवाई की। बताया कि, खट्टर सरकार ने वन विभाग के आरोपी अधिकारियों पर तो एफआईआर दर्ज कर ली, लेकिन चारों आईएएस अफसरों को छोड़ दिया, जबकि लोकायुक्त जस्टिस एनके अग्रवाल ने 26 मई 2017 को इन चारों आईएएस अधिकारियों के विरुद्ध आपराधिक केस दर्ज करने के निर्देश हरियाणा सरकार को दिए थे। इस पर हरियाणा सरकार ने चार सदस्यीय उच्च स्तरीय कमेटी गठित करते हुए लोकायुक्त जांच की रिपोर्ट पर टिप्पणी मांगी थी। पांच महीने बीत गए लेकिन सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। जिसके बाद कपूर ने एक जुलाई को हरियाणा सरकार से आरटीआई के तहत इन चारों आईएएस अधिकारियों पर की गई कार्रवाई के बारे में जानकारी मांगी। इस पर हरियाणा सरकार ने इसे निजी सूचना बताते हुए सूचना देने से इनकार कर दिया। पीपी कपूर की द्वितीय अपील का संज्ञान लेते हुए राज्य सूचना आयोग ने हरियाणा सरकार के कार्मिक विभाग के राज्य जन सूचना अधिकारी को नोटिस जारी कर 27 नवंबर तक नोटिस का जवाब देने व 12 दिसबर को चंडीगढ़ में तलब होने के आदेश दिए हैं।
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ने बताया निजी जानकारी, जन सूचना अधिकारी तलब
अमर उजाला ब्यूरो
समालखा। अंबाला मनरेगा घोटाले की लोकायुक्त जांच में दोषी पाए गए चार आईएएस अधिकारियों के बारे में सूचना न देने पर राज्य सूचना आयोग ने कार्मिक विभाग (हरियाणा सरकार) के जन सूचना अधिकारी को नोटिस भेजकर 12 दिसंबर को चंडीगढ़ तलब किया है। केस की सुनवाई मुख्य सूचना आयुक्त यशपाल सिंघल करेंगे। आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर ने आरटीआई के तहत इसकी जानकारी मांगी थी।
आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर ने बताया कि अंबाला में मनरेगा घोटाले की वर्ष 2012 में विजिलेंस जांच हुई थी। इसमें चार आईएएस अधिकारियों सहित वन विभाग के अधिकारी दोषी पाए गए थे। आरोप है कि, इन नामजद आरोपियों के विरुद्ध न तो तत्कालीन हुड्डा सरकार और न ही खट्टर सरकार ने कोई कार्रवाई की। बताया कि, खट्टर सरकार ने वन विभाग के आरोपी अधिकारियों पर तो एफआईआर दर्ज कर ली, लेकिन चारों आईएएस अफसरों को छोड़ दिया, जबकि लोकायुक्त जस्टिस एनके अग्रवाल ने 26 मई 2017 को इन चारों आईएएस अधिकारियों के विरुद्ध आपराधिक केस दर्ज करने के निर्देश हरियाणा सरकार को दिए थे। इस पर हरियाणा सरकार ने चार सदस्यीय उच्च स्तरीय कमेटी गठित करते हुए लोकायुक्त जांच की रिपोर्ट पर टिप्पणी मांगी थी। पांच महीने बीत गए लेकिन सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। जिसके बाद कपूर ने एक जुलाई को हरियाणा सरकार से आरटीआई के तहत इन चारों आईएएस अधिकारियों पर की गई कार्रवाई के बारे में जानकारी मांगी। इस पर हरियाणा सरकार ने इसे निजी सूचना बताते हुए सूचना देने से इनकार कर दिया। पीपी कपूर की द्वितीय अपील का संज्ञान लेते हुए राज्य सूचना आयोग ने हरियाणा सरकार के कार्मिक विभाग के राज्य जन सूचना अधिकारी को नोटिस जारी कर 27 नवंबर तक नोटिस का जवाब देने व 12 दिसबर को चंडीगढ़ में तलब होने के आदेश दिए हैं।
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