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18 दिन बीते पर हल नहीं: प्रॉपर्टी टैक्स समस्याओं का समाधान करने में फेल साबित हुआ निगम
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पानीपत। शहर की संपत्तियों पर याशी के सर्वे को लागू हुए 18 दिन बीत चुके हैं लेकिन अभी तक प्रॉपर्टी आईडी और एनडीसी से जुड़ी समस्याओं के समाधान निगम नहीं निकाल सका। शहर की प्रॉपर्टी टैक्स से संबंधित समस्याओं को लेकर शहरवासी निगम के दोनों कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। अधिकारी ऑनलाइन ऑब्जेक्शन लगाने की सलाह देते हैं और लोग आश्वासन लेकर लौट जाते हैं।
नगर निगम क्षेत्र की संपत्तियों पर याशी का सर्वे 17 अक्तूबर की शाम को अचानक ही लागू कर दिया गया था। इसमें शहर की 1.83 लाख संपत्तियों में से करीब 70 हजार प्रॉपर्टियों का डाटा ही गलत अपलोड किया गया। जो संपत्तियां वैध क्षेत्र में थी उनको भी अवैध दिखा दिया गया। जिन्होंने टैक्स भरा, वह शून्य हो गया। जिन्होंने रजिस्ट्री के लिए एनडीसी लेकर तहसील में टोकन लिया था, पोर्टल अपडेट होने से बैरंग लौटना पड़ा। हजारों प्रॉपर्टियों के नाम, पते, क्षेत्र, कैटेगरी और फोटो गलत अपडेट की गई है।
उल्लेखनीय है कि 18 अक्तूबर को निगम अधिकारियों ने इस समस्या को शहरी स्थानीय निकाय मंत्री के सामने भी रखा, तो मंत्री ने समाधान की बजाय सर्वे की तारीफों के पुल बांध दिए। अधिकारियों को निर्देश दिए कि इसका समाधान करवाएं। लोग जो ऑब्जेक्शन लगाएंगे उसे ठीक किया जाएगा।
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ठीक दस दिन बाद मंत्री 27 अक्तूबर को पानीपत में अधिकारियों से भी मिले और पार्षदों से भी उनकी समस्या जानीं। सबने एक बार फिर से मंत्री को शहर की सबसे बड़ी मुसीबत याशी के सर्वे से अवगत कराया, लेकिन इस बार भी मंत्री केवल भाषणबाजी कर लौट गए। निगम अधिकारियों को निर्देश दिए कि जो डाटा इंटीग्रेटेड नहीं है उसका मिलान किया जाए। जिसमें अफसर अब तक कामयाब नहीं हो पाए हैं।
न कर्मचारी दिए, न बना हेल्पडेस्क
गलत डाटा को ठीक करने के लिए अभी तक निगम को याशी एजेंसी की ओर से कोई मदद नहीं मिल पाई है और न ही निगम कार्यालय में हेल्पडेस्क बन पाया है। जिसकी वजह से लोगों को दलालों का सहारा लेना पड़ रहा है। मंत्री और अधिकारियों के दावे झूठे साबित हो रहे हैं। परेशान शहरवासी कभी ऑनलाइन पोर्टल तक कभी निगम के रिकॉर्ड में अपनी संपत्तियों का डाटा खोजते रहते हैं।
ऑनलाइन ऑब्जेक्शन का किया जाएगा समाधान
अगर किसी की संपत्ति का पोर्टल पर गलत डाटा दिखाई दे रहा है तो वह उस पर ऑनलाइन ऑब्जेक्शन लगा सकता है। जिसे निगम की ओर से ठीक किया जाएगा। निगम अफसर और कर्मचारी इसी प्रक्रिया में जुटे हुए हैं। कोशिश है कि जल्द से जल्द डाटा को सही किया जा सके।
- समयपाल सिंह, क्षेत्रीय कराधान अधिकारी
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नगर निगम क्षेत्र की संपत्तियों पर याशी का सर्वे 17 अक्तूबर की शाम को अचानक ही लागू कर दिया गया था। इसमें शहर की 1.83 लाख संपत्तियों में से करीब 70 हजार प्रॉपर्टियों का डाटा ही गलत अपलोड किया गया। जो संपत्तियां वैध क्षेत्र में थी उनको भी अवैध दिखा दिया गया। जिन्होंने टैक्स भरा, वह शून्य हो गया। जिन्होंने रजिस्ट्री के लिए एनडीसी लेकर तहसील में टोकन लिया था, पोर्टल अपडेट होने से बैरंग लौटना पड़ा। हजारों प्रॉपर्टियों के नाम, पते, क्षेत्र, कैटेगरी और फोटो गलत अपडेट की गई है।
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उल्लेखनीय है कि 18 अक्तूबर को निगम अधिकारियों ने इस समस्या को शहरी स्थानीय निकाय मंत्री के सामने भी रखा, तो मंत्री ने समाधान की बजाय सर्वे की तारीफों के पुल बांध दिए। अधिकारियों को निर्देश दिए कि इसका समाधान करवाएं। लोग जो ऑब्जेक्शन लगाएंगे उसे ठीक किया जाएगा।
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ठीक दस दिन बाद मंत्री 27 अक्तूबर को पानीपत में अधिकारियों से भी मिले और पार्षदों से भी उनकी समस्या जानीं। सबने एक बार फिर से मंत्री को शहर की सबसे बड़ी मुसीबत याशी के सर्वे से अवगत कराया, लेकिन इस बार भी मंत्री केवल भाषणबाजी कर लौट गए। निगम अधिकारियों को निर्देश दिए कि जो डाटा इंटीग्रेटेड नहीं है उसका मिलान किया जाए। जिसमें अफसर अब तक कामयाब नहीं हो पाए हैं।
न कर्मचारी दिए, न बना हेल्पडेस्क
गलत डाटा को ठीक करने के लिए अभी तक निगम को याशी एजेंसी की ओर से कोई मदद नहीं मिल पाई है और न ही निगम कार्यालय में हेल्पडेस्क बन पाया है। जिसकी वजह से लोगों को दलालों का सहारा लेना पड़ रहा है। मंत्री और अधिकारियों के दावे झूठे साबित हो रहे हैं। परेशान शहरवासी कभी ऑनलाइन पोर्टल तक कभी निगम के रिकॉर्ड में अपनी संपत्तियों का डाटा खोजते रहते हैं।
ऑनलाइन ऑब्जेक्शन का किया जाएगा समाधान
अगर किसी की संपत्ति का पोर्टल पर गलत डाटा दिखाई दे रहा है तो वह उस पर ऑनलाइन ऑब्जेक्शन लगा सकता है। जिसे निगम की ओर से ठीक किया जाएगा। निगम अफसर और कर्मचारी इसी प्रक्रिया में जुटे हुए हैं। कोशिश है कि जल्द से जल्द डाटा को सही किया जा सके।
- समयपाल सिंह, क्षेत्रीय कराधान अधिकारी