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जीएसटी : बड़े मार्केट में लागू हुआ, खुले बाजार में चली मनमर्जी
Updated Sun, 02 Jul 2017 12:49 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। एक देश, एक टैक्स और एक बाजार यानी गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) शनिवार को लागू हो गया, लेकिन बाजार में सब अलग-अलग मिला। बड़े बाजारों में गिनेचुने उत्पादों पर जीएसटी लागू हो गया, जबकि बाहर बाजार में जीएसटी का कोई असर नहीं देखा गया। किरयाना दुकानदार मनमर्जी से सामान बेचते नजर आए। शहर के बड़े बाजार, खुले बाजार में तेल और साबुन के तीन उत्पादों के रेट में करीब छह रुपये का अंतर मिला। शहर के कपड़ा मार्केट में पूरा दिन सन्नाटा रहा। बाजार में भी अपेक्षाकृत लोग नहीं पहुंचे। दुकानदार अपने पुराने सामान को पहले निकालने में लगे रहे। इलेक्ट्रॉनिक्स सामान और दोपहिया वाहनों पर छूट शनिवार को भी अंदरखाते चलती रही। सेल टैक्स विभाग भी जीएसटी लागू होने के पहले दिन बेपरवाह दिखा। सेल टैक्स विभाग के अधिकारियों ने बाजार में जाकर जीएसटी को लागू होने या न होने की जानकारी तक नहीं ली।
अमर उजाला माई सिटी ने जीएसटी लागू होने के पहले दिन बड़े बाजारों, कैंटीन और दूसरे बाजार में जाकर जीएसटी का सच जाना। जीएसटी के विरोध के तीन दिन बाद शनिवार को शहर का कपड़ा बाजार खुल तो गया, लेकिन वहां सन्नाटा पसरा रहा। इंसार बाजार समेत दूसरे बाजारों में अपेक्षाकृत ग्राहक नहीं पहुंचे। सराफा बाजार में भी कम ही ग्राहक पहुंचे। बहुत जरूरत होने पर ही लोगों ने खरीदारी की। खाद और बीज की दुकानों पर भी हालत चिंताजनक थे। बड़े बाजारों में केवल जीएसटी में अपडेट सामान ही मिल सका। बिग बाजार और अन्य बाजारों में पहुंचे लोग कुछ ही सामान लेकर लौटे। सामान्य बाजार में सारा सामान पुराने ढर्रे पर बेचा गया। किरयाना की दुकानों और दूसरे बाजारों में इसका कोई असर नहीं दिखा। न ही दुकानदार इसको लेकर गंभीर नजर आए।
दुकानदारों को जीएसटी नहीं आ रहा समझ
आम बाजारों में मौजूद छोटे दुकानदारों को जीएसटी समझ में नहीं आ रहा। इस कारण छोटे दुकानदार एमआरपी पर सामान को बेच रहे है। इससे उपभोक्ताओं को नुकसान हो रहा है।
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ग्राहक नई दरों पर लेना चाहते हैं सामान
देशभर में जीएसटी लागू होने के बाद ग्राहक खरीदा जाने वाला सामान जीएसटी की दरों के आधार पर लेना चाहते हैं। लेकिन, आम बाजार के विक्रेता स्टॉक में रखे माल के रेट कम नहीं कर रहे। इससे बहुत से ग्राहकों को लौटना पड़ रहा है या फिर उन्हें एमआरपी पर ही सामान लेना पड़ रहा है।
पहले दिन कपड़ा बाजार रहा सूना
जीएसटी लागू होने के बाद पहले दिन जिले का कपड़ा बाजार सूना रहा। कपड़ा बाजार में उपभोक्ता न के बराबर दिखे। इस कारण कपड़ा बाजार के दुकानदार सारा दिन खाली बैठे रहे। बाजार में जीएसटी लागू होने के पहले दिन काम ठप रहा।
ये है बड़े बाजार और छोटे बाजार का सच
अमर उजाला माई सिटी ने जीएसटी लागू होने के बाद बाजार का सच जानने के लिए एक ही तरह के सामान की बिग बाजार से और खुले बाजार से खरीदारी की। बिग बाजार में पीयर्स साबुन 75 ग्राम खरीदा। जीएसटी लागू होने के बाद यह 34.20 पैसे का मिला। इस पर नौ प्रतिशत जीएसटी लगा था। बाजार में यही साबुन 36 रुपये का मिला। 60 ग्राम की डेटोल सेविंग क्रीम बिग बाजार में 14 प्रतिशत जीएसटी लगने के बाद 74 रुपये की मिली। इसका एमआरपी भी 74 रुपये है। जबकि बाजार में इसका एमआरपी 74 रुपये होने के बाद 70 रुपये में मिली। कोलगेट पेस्ट सौ ग्राम बिग बाजार में नौ प्रतिशत जीएसटी लगने के बाद 44.20 पैसे का मिला, जबकि बाजार में 50 रुपये का मिला। इस तरह से बिग बाजार में तीनों सामान पर 152.40 पैसे अदा किए, जबकि बाजार में 156 रुपये चुकाने पड़े।
सरकार नहीं जनता का सपना, साकार कराएंगे
ग्रामीण विधायक महिपाल ढांडा ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार ने जनता के हित में जीएसटी लागू किया गया है। इसके बाद पूरे देश में एक समान पर एक समान टैक्स दर होंगी। जनता का सपना सरकार ने साकार किया है। अब इसे बाजार में लागू भी कराया जाएगा। इसके लिए सरकार और सरकारी विभाग गंभीर हैं। सरकार ने लोगों की मांग के अनुसार कुछ सामान पर टैक्स की दर कमी भी की है।
व्यापारी और उद्यमी बोले, पटरी पर आने में लगेगा समय
व्यापारी और उद्यमी जीएसटी लागू होने के बाद असमंजस में हैं। हरियाणा व्यापार मंडल के युवा प्रदेशाध्यक्ष राकेश चुघ ने बताया कि कपड़े पर जीएसटी लागू करना गंभीर है। शनिवार को बाजार में सन्नाटा रहा। उनकी जीएसटी की दर कम करने के लिए सरकार के साथ बातचीत चल रही है। उद्यमियों और व्यापारियों को जीएसटी नंबर लेना होगा।उसके बाद ही आगे काम कर सकेंगे। ऐसा न करने पर व्यापार भी नहीं चला सकेंगे। सरकार को 20 लाख की सीमा को बढ़ाकर 50 लाख करना चाहिए।
दुकानदार वस्तु पर प्रिंट एमआरपी तक सामान को बेच सकते हैं। पहले दिन विभाग ने बाजार में जांच नहीं की है। आदेश आते हैं तो उसी प्रकार से कार्रवाई की जाएगी। यदि उपभोक्ता को कोई परेशानी है तो वे विभाग के कार्यालय में शिकायत दे सकता है। इसके बाद विक्रेता पर कार्रवाई की जाएगी।
वीके बैनीवाल, डीटीसी, सेल टैक्स, पानीपत।
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पानीपत। एक देश, एक टैक्स और एक बाजार यानी गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) शनिवार को लागू हो गया, लेकिन बाजार में सब अलग-अलग मिला। बड़े बाजारों में गिनेचुने उत्पादों पर जीएसटी लागू हो गया, जबकि बाहर बाजार में जीएसटी का कोई असर नहीं देखा गया। किरयाना दुकानदार मनमर्जी से सामान बेचते नजर आए। शहर के बड़े बाजार, खुले बाजार में तेल और साबुन के तीन उत्पादों के रेट में करीब छह रुपये का अंतर मिला। शहर के कपड़ा मार्केट में पूरा दिन सन्नाटा रहा। बाजार में भी अपेक्षाकृत लोग नहीं पहुंचे। दुकानदार अपने पुराने सामान को पहले निकालने में लगे रहे। इलेक्ट्रॉनिक्स सामान और दोपहिया वाहनों पर छूट शनिवार को भी अंदरखाते चलती रही। सेल टैक्स विभाग भी जीएसटी लागू होने के पहले दिन बेपरवाह दिखा। सेल टैक्स विभाग के अधिकारियों ने बाजार में जाकर जीएसटी को लागू होने या न होने की जानकारी तक नहीं ली।
अमर उजाला माई सिटी ने जीएसटी लागू होने के पहले दिन बड़े बाजारों, कैंटीन और दूसरे बाजार में जाकर जीएसटी का सच जाना। जीएसटी के विरोध के तीन दिन बाद शनिवार को शहर का कपड़ा बाजार खुल तो गया, लेकिन वहां सन्नाटा पसरा रहा। इंसार बाजार समेत दूसरे बाजारों में अपेक्षाकृत ग्राहक नहीं पहुंचे। सराफा बाजार में भी कम ही ग्राहक पहुंचे। बहुत जरूरत होने पर ही लोगों ने खरीदारी की। खाद और बीज की दुकानों पर भी हालत चिंताजनक थे। बड़े बाजारों में केवल जीएसटी में अपडेट सामान ही मिल सका। बिग बाजार और अन्य बाजारों में पहुंचे लोग कुछ ही सामान लेकर लौटे। सामान्य बाजार में सारा सामान पुराने ढर्रे पर बेचा गया। किरयाना की दुकानों और दूसरे बाजारों में इसका कोई असर नहीं दिखा। न ही दुकानदार इसको लेकर गंभीर नजर आए।
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दुकानदारों को जीएसटी नहीं आ रहा समझ
आम बाजारों में मौजूद छोटे दुकानदारों को जीएसटी समझ में नहीं आ रहा। इस कारण छोटे दुकानदार एमआरपी पर सामान को बेच रहे है। इससे उपभोक्ताओं को नुकसान हो रहा है।
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ग्राहक नई दरों पर लेना चाहते हैं सामान
देशभर में जीएसटी लागू होने के बाद ग्राहक खरीदा जाने वाला सामान जीएसटी की दरों के आधार पर लेना चाहते हैं। लेकिन, आम बाजार के विक्रेता स्टॉक में रखे माल के रेट कम नहीं कर रहे। इससे बहुत से ग्राहकों को लौटना पड़ रहा है या फिर उन्हें एमआरपी पर ही सामान लेना पड़ रहा है।
पहले दिन कपड़ा बाजार रहा सूना
जीएसटी लागू होने के बाद पहले दिन जिले का कपड़ा बाजार सूना रहा। कपड़ा बाजार में उपभोक्ता न के बराबर दिखे। इस कारण कपड़ा बाजार के दुकानदार सारा दिन खाली बैठे रहे। बाजार में जीएसटी लागू होने के पहले दिन काम ठप रहा।
ये है बड़े बाजार और छोटे बाजार का सच
अमर उजाला माई सिटी ने जीएसटी लागू होने के बाद बाजार का सच जानने के लिए एक ही तरह के सामान की बिग बाजार से और खुले बाजार से खरीदारी की। बिग बाजार में पीयर्स साबुन 75 ग्राम खरीदा। जीएसटी लागू होने के बाद यह 34.20 पैसे का मिला। इस पर नौ प्रतिशत जीएसटी लगा था। बाजार में यही साबुन 36 रुपये का मिला। 60 ग्राम की डेटोल सेविंग क्रीम बिग बाजार में 14 प्रतिशत जीएसटी लगने के बाद 74 रुपये की मिली। इसका एमआरपी भी 74 रुपये है। जबकि बाजार में इसका एमआरपी 74 रुपये होने के बाद 70 रुपये में मिली। कोलगेट पेस्ट सौ ग्राम बिग बाजार में नौ प्रतिशत जीएसटी लगने के बाद 44.20 पैसे का मिला, जबकि बाजार में 50 रुपये का मिला। इस तरह से बिग बाजार में तीनों सामान पर 152.40 पैसे अदा किए, जबकि बाजार में 156 रुपये चुकाने पड़े।
सरकार नहीं जनता का सपना, साकार कराएंगे
ग्रामीण विधायक महिपाल ढांडा ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार ने जनता के हित में जीएसटी लागू किया गया है। इसके बाद पूरे देश में एक समान पर एक समान टैक्स दर होंगी। जनता का सपना सरकार ने साकार किया है। अब इसे बाजार में लागू भी कराया जाएगा। इसके लिए सरकार और सरकारी विभाग गंभीर हैं। सरकार ने लोगों की मांग के अनुसार कुछ सामान पर टैक्स की दर कमी भी की है।
व्यापारी और उद्यमी बोले, पटरी पर आने में लगेगा समय
व्यापारी और उद्यमी जीएसटी लागू होने के बाद असमंजस में हैं। हरियाणा व्यापार मंडल के युवा प्रदेशाध्यक्ष राकेश चुघ ने बताया कि कपड़े पर जीएसटी लागू करना गंभीर है। शनिवार को बाजार में सन्नाटा रहा। उनकी जीएसटी की दर कम करने के लिए सरकार के साथ बातचीत चल रही है। उद्यमियों और व्यापारियों को जीएसटी नंबर लेना होगा।उसके बाद ही आगे काम कर सकेंगे। ऐसा न करने पर व्यापार भी नहीं चला सकेंगे। सरकार को 20 लाख की सीमा को बढ़ाकर 50 लाख करना चाहिए।
दुकानदार वस्तु पर प्रिंट एमआरपी तक सामान को बेच सकते हैं। पहले दिन विभाग ने बाजार में जांच नहीं की है। आदेश आते हैं तो उसी प्रकार से कार्रवाई की जाएगी। यदि उपभोक्ता को कोई परेशानी है तो वे विभाग के कार्यालय में शिकायत दे सकता है। इसके बाद विक्रेता पर कार्रवाई की जाएगी।
वीके बैनीवाल, डीटीसी, सेल टैक्स, पानीपत।