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कंडम बस स्टैंड का 15 साल में भी फैसला नहीं, गुरुद्वारा भवन को एक दिन में कंडम घोषित कर गिराने के अदेश जारी
Updated Sun, 18 Jun 2017 12:16 AM IST
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कंडम बस स्टैंड का 15 साल में भी फैसला नहीं, गुरुद्वारा भवन को एक दिन में कंडम घोषित कर गिराने के आदेश जारी
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। सरकार कंडम बस स्टैंड भवन को गिराने का फैसला हादसे के 15 साल बाद भी नहीं कर सकी और प्रशासन ने गुरुद्वारा पहली पातशाही के दुर्घटनाग्रस्त भवन को एक ही दिन में कंडम घोषित कर दो दिन में भवन को गिराने के नोटिस जारी कर दिए। सरकार व सरकारी तंत्र की अनदेखी के चलते बस स्टैंड का दो मंजिला भवन आज भी यात्रियों व कर्मचारियों पर खतरा बनकर मंडरा रहा है। सरकार व अधिकारी बस स्टैंड को जल्द ही शिफ्ट करने का दावा करते हैं, लेकिन वास्तव में सरकार अब तक बस स्टैंड के लिए जमीन तक फाइनल नहीं कर पाई है। सरकार व सरकारी अधिकारियों की दोहरी नीति के चलते लोगों में भी चर्चा हैं।
बस स्टैंड पानीपत की छत का एक हिस्सा 2002 में टूटकर गिर गया था। छत के मलबे के नीचे दबने से एक यात्री की मौत हो गई थी, जबकि आधा दर्जन घायल हो गए थे। निदेशालय स्तर के अधिकारियों ने मौका मुआयना कर बस स्टैंड की बिल्डिंग को कंडम घोषित कर दिया था और इसको नया रूप देेने का फैसला लिया था, लेकिन आज तक बस स्टैंड शिफ्ट नहीं हो सका है।
15 साल में कई बार नक्शे बने, कई बार जमीन देखी
निदेशालय स्तर के अधिकारियों के आदेश के बाद पानीपत बस स्टैंड को नया रूप देने को लेकर कई बार डिजाइन बने तो कई बार शहर से बाहर शिफ्ट करने को लेकर योजना बनी, लेकिन अब तक सब कुछ योजनाओं में ही सिमटकर रह गया है। बताया जा रहा है कि सबसे पहले बस स्टैंड को शिफ्ट करने के लिए लघु सचिवालय के पीछे रेलवे लाइन के साथ जमीन देखी गई, लेकिन एलिवेटिड हाईवे के डिजाइन के चलते यहां से कैंसिल कर दिया गया। इसके बाद बस स्टैंड को इसी जगह पर बहू मंजिला बनाने का फैसला लिया गया। इसका पूरा डिजाइन तैयार किया गया। मैदानी तल पर बस स्टैंड और प्रथम तल पर अधिकारियों व कर्मचारियों के ऑफिस बनाने और अंडर ग्राउंड में पार्किंग बनाने का फैसला हुआ। इसकी ऊपर की मंजिलों में दुकान बनाकर बाजार का रूप देेने का फैसला लिया गया। बस स्टैंड को एलिवेटिड हाईवे से कनेक्ट करने का प्रारूप भी तैयार किया गया, लेकिन एनएसएआईए ने एलिवेटिड हाईवे से किसी तरह की कनेक्टिविटी से इनकार कर दिया। इसके बाद सेक्टर -13/17 में जमीन देखी गई और हुडा द्वारा रोडवेज को जमीन ट्रांसफर कर दी गई, लेकिन यह प्रस्ताव भी अटक गया। प्रदेश सरकार ने पिछले साल सिवाह गांव में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर प्रदेश स्तरीय समारोह में पानीपत बस स्टैंड सिवाह में बनाने की घोषणा की थी। यह पूरा मामला राजनीतिज्ञों की मूंछों का सवाल बन गया। ऐसे में न तो बस स्टैंड शिफ्ट हो पाया है और न ही यहां पर नया बन पाया है।
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हर माह 36 लाख का राजस्व, सैकड़ों यात्री करते हैं आवागमन
पानीपत बस स्टैंड दिल्ली से चंडीगढ़ रूट पर जीटी रोड पर स्थित पहला बस स्टैंड है। बस स्टैंड का एक माह में करीब 36 लाख रुपये का राजस्व है। डिपो में बसों की संख्या मांग अनुसार बढ़ जाएं तो आय भी बढ़ सकती है। वहीं यहां से यूपी व प्रदेश के अन्य जिलों में आने-जाने के लिए बस पकड़ने के लिए यात्री आते हैं। बस स्टैंड के पूरे भवन में दरार आई हुई है और किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। बस स्टैंड में अधिकारी व कर्मचारी भी डरते-डरते काम कर रहे हैं।
मैंने कुछ दिन पहले ही चार्ज संभाला है। डिपो के कंडम होने या शिफ्ट होने की जानकारी पुख्ता नहीं है। मैं इस बारे में पूरी रिपोर्ट लेकर अधिकारियों से बात करूंगा। यात्रियों व कर्मचारियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ नहीं की जाएगी।
एके डोगरा, महाप्रबंधक, रोडवेज डिपो पानीपत।
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गुरुद्वारा भवन को गिराने का काम शुरू, जांच करने नहीं आई कमेटी
-दो क्रेनों की मदद से गुरुद्वारा गिराने का काम शुरू, गुंबद की पहली मंजिल को तोडव़
-गुरुद्वारा में निर्माण के चलते दो मंजिला भवन व तीन मंजिला गुंबद गिर गया था
फोटो-15 व 16
पानीपत। गुरुद्वारा पहली पातशाही के भवन को गिराने का काम शुरू कर दिया है। गुरुद्वारा प्रबंधन द्वारा दो क्रेन मंगवाई गई है। सबसे पहले गुंबद के मलबे को हटाना शुरू किया गया है और सोमवार तक इसको कंपलीट करने का दावा किया गया है। वहीं मुख्यमंत्री के आदेश पर गठित टीम जांच करने तक नहीं पहुंच सकी।
जीटी रोड स्थित गुरुद्वारा पहली पातशाही को गिराने का काम शनिवार सुबह पंज प्यारे की अरदास के बाद शुरू हुआ। गुरुद्वारा भवन पर पहुंची दो क्रेनों में एक क्रेन पर सबसे पहले तकनीकी विशेषज्ञों ने गुंबद का मुआयना किया और इसको हटाने के बारे में बारीकी से विचार विमर्श किया। इसके बाद एक क्रेन पर जाल के सहारे कारीगरों की टीम पहुंची और दूसरी क्रेन से गुंबद के मलबे को उतारा गया। गुरुद्वारा में सुबह से लेकर शाम तक मलबा हटाने काम चला। जिसके चलते गुरुद्वारा मार्केट पूरी तरह से बंद रही। दुकानदारों ने व्यापार ठप होने पर अफसोस व्यक्त किया। सोमवार सायं करीब साढ़े चार बजे गुरुद्वारा पहली पातशाही का दो मंजिला भवन व तीन मंजिला गुंबद गिर गया था। इस हादसे में पांच लोगों की मौत हो गई थी, जबकि करीब नौ लोग घायल हो गए थे। प्रशासन ने 36 घंटे लगातार रेसक्यू ऑपरेशन चलाया था।
जांच के बिना ही गुरुद्वारे का मलबा हटाया जाना शुरू
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने मंगलवार को गुरुद्वारे का मौका मुआयना कर हादसे की जांच के आदेश दिए थे। डीसी डॉ. चंद्रशेखर खरे ने एडीसी की अगुवाई में पांच सदस्यीय टीम का गठन किया था। टीम को 15 दिन में रिपोर्ट देने के आदेश दिए थे। इसी बीच हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान जगदीश झिंडा ने प्रशासन द्वारा गठित कमेटी पर सवाल उठाए थे और इसमें दो इंजीनियर एचएसजीपीसी के भी शामिल करने की मांग की थी और इनके बिना प्रशासन की कमेटी को गुरुद्वारे में दाखिल न होने देने की साफ शब्दों में चेतावनी दी थी। कमेटी अब तक जांच शुरू नहीं कर पाई है।
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अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। सरकार कंडम बस स्टैंड भवन को गिराने का फैसला हादसे के 15 साल बाद भी नहीं कर सकी और प्रशासन ने गुरुद्वारा पहली पातशाही के दुर्घटनाग्रस्त भवन को एक ही दिन में कंडम घोषित कर दो दिन में भवन को गिराने के नोटिस जारी कर दिए। सरकार व सरकारी तंत्र की अनदेखी के चलते बस स्टैंड का दो मंजिला भवन आज भी यात्रियों व कर्मचारियों पर खतरा बनकर मंडरा रहा है। सरकार व अधिकारी बस स्टैंड को जल्द ही शिफ्ट करने का दावा करते हैं, लेकिन वास्तव में सरकार अब तक बस स्टैंड के लिए जमीन तक फाइनल नहीं कर पाई है। सरकार व सरकारी अधिकारियों की दोहरी नीति के चलते लोगों में भी चर्चा हैं।
बस स्टैंड पानीपत की छत का एक हिस्सा 2002 में टूटकर गिर गया था। छत के मलबे के नीचे दबने से एक यात्री की मौत हो गई थी, जबकि आधा दर्जन घायल हो गए थे। निदेशालय स्तर के अधिकारियों ने मौका मुआयना कर बस स्टैंड की बिल्डिंग को कंडम घोषित कर दिया था और इसको नया रूप देेने का फैसला लिया था, लेकिन आज तक बस स्टैंड शिफ्ट नहीं हो सका है।
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15 साल में कई बार नक्शे बने, कई बार जमीन देखी
निदेशालय स्तर के अधिकारियों के आदेश के बाद पानीपत बस स्टैंड को नया रूप देने को लेकर कई बार डिजाइन बने तो कई बार शहर से बाहर शिफ्ट करने को लेकर योजना बनी, लेकिन अब तक सब कुछ योजनाओं में ही सिमटकर रह गया है। बताया जा रहा है कि सबसे पहले बस स्टैंड को शिफ्ट करने के लिए लघु सचिवालय के पीछे रेलवे लाइन के साथ जमीन देखी गई, लेकिन एलिवेटिड हाईवे के डिजाइन के चलते यहां से कैंसिल कर दिया गया। इसके बाद बस स्टैंड को इसी जगह पर बहू मंजिला बनाने का फैसला लिया गया। इसका पूरा डिजाइन तैयार किया गया। मैदानी तल पर बस स्टैंड और प्रथम तल पर अधिकारियों व कर्मचारियों के ऑफिस बनाने और अंडर ग्राउंड में पार्किंग बनाने का फैसला हुआ। इसकी ऊपर की मंजिलों में दुकान बनाकर बाजार का रूप देेने का फैसला लिया गया। बस स्टैंड को एलिवेटिड हाईवे से कनेक्ट करने का प्रारूप भी तैयार किया गया, लेकिन एनएसएआईए ने एलिवेटिड हाईवे से किसी तरह की कनेक्टिविटी से इनकार कर दिया। इसके बाद सेक्टर -13/17 में जमीन देखी गई और हुडा द्वारा रोडवेज को जमीन ट्रांसफर कर दी गई, लेकिन यह प्रस्ताव भी अटक गया। प्रदेश सरकार ने पिछले साल सिवाह गांव में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर प्रदेश स्तरीय समारोह में पानीपत बस स्टैंड सिवाह में बनाने की घोषणा की थी। यह पूरा मामला राजनीतिज्ञों की मूंछों का सवाल बन गया। ऐसे में न तो बस स्टैंड शिफ्ट हो पाया है और न ही यहां पर नया बन पाया है।
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हर माह 36 लाख का राजस्व, सैकड़ों यात्री करते हैं आवागमन
पानीपत बस स्टैंड दिल्ली से चंडीगढ़ रूट पर जीटी रोड पर स्थित पहला बस स्टैंड है। बस स्टैंड का एक माह में करीब 36 लाख रुपये का राजस्व है। डिपो में बसों की संख्या मांग अनुसार बढ़ जाएं तो आय भी बढ़ सकती है। वहीं यहां से यूपी व प्रदेश के अन्य जिलों में आने-जाने के लिए बस पकड़ने के लिए यात्री आते हैं। बस स्टैंड के पूरे भवन में दरार आई हुई है और किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। बस स्टैंड में अधिकारी व कर्मचारी भी डरते-डरते काम कर रहे हैं।
मैंने कुछ दिन पहले ही चार्ज संभाला है। डिपो के कंडम होने या शिफ्ट होने की जानकारी पुख्ता नहीं है। मैं इस बारे में पूरी रिपोर्ट लेकर अधिकारियों से बात करूंगा। यात्रियों व कर्मचारियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ नहीं की जाएगी।
एके डोगरा, महाप्रबंधक, रोडवेज डिपो पानीपत।
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गुरुद्वारा भवन को गिराने का काम शुरू, जांच करने नहीं आई कमेटी
-दो क्रेनों की मदद से गुरुद्वारा गिराने का काम शुरू, गुंबद की पहली मंजिल को तोडव़
-गुरुद्वारा में निर्माण के चलते दो मंजिला भवन व तीन मंजिला गुंबद गिर गया था
फोटो-15 व 16
पानीपत। गुरुद्वारा पहली पातशाही के भवन को गिराने का काम शुरू कर दिया है। गुरुद्वारा प्रबंधन द्वारा दो क्रेन मंगवाई गई है। सबसे पहले गुंबद के मलबे को हटाना शुरू किया गया है और सोमवार तक इसको कंपलीट करने का दावा किया गया है। वहीं मुख्यमंत्री के आदेश पर गठित टीम जांच करने तक नहीं पहुंच सकी।
जीटी रोड स्थित गुरुद्वारा पहली पातशाही को गिराने का काम शनिवार सुबह पंज प्यारे की अरदास के बाद शुरू हुआ। गुरुद्वारा भवन पर पहुंची दो क्रेनों में एक क्रेन पर सबसे पहले तकनीकी विशेषज्ञों ने गुंबद का मुआयना किया और इसको हटाने के बारे में बारीकी से विचार विमर्श किया। इसके बाद एक क्रेन पर जाल के सहारे कारीगरों की टीम पहुंची और दूसरी क्रेन से गुंबद के मलबे को उतारा गया। गुरुद्वारा में सुबह से लेकर शाम तक मलबा हटाने काम चला। जिसके चलते गुरुद्वारा मार्केट पूरी तरह से बंद रही। दुकानदारों ने व्यापार ठप होने पर अफसोस व्यक्त किया। सोमवार सायं करीब साढ़े चार बजे गुरुद्वारा पहली पातशाही का दो मंजिला भवन व तीन मंजिला गुंबद गिर गया था। इस हादसे में पांच लोगों की मौत हो गई थी, जबकि करीब नौ लोग घायल हो गए थे। प्रशासन ने 36 घंटे लगातार रेसक्यू ऑपरेशन चलाया था।
जांच के बिना ही गुरुद्वारे का मलबा हटाया जाना शुरू
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने मंगलवार को गुरुद्वारे का मौका मुआयना कर हादसे की जांच के आदेश दिए थे। डीसी डॉ. चंद्रशेखर खरे ने एडीसी की अगुवाई में पांच सदस्यीय टीम का गठन किया था। टीम को 15 दिन में रिपोर्ट देने के आदेश दिए थे। इसी बीच हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान जगदीश झिंडा ने प्रशासन द्वारा गठित कमेटी पर सवाल उठाए थे और इसमें दो इंजीनियर एचएसजीपीसी के भी शामिल करने की मांग की थी और इनके बिना प्रशासन की कमेटी को गुरुद्वारे में दाखिल न होने देने की साफ शब्दों में चेतावनी दी थी। कमेटी अब तक जांच शुरू नहीं कर पाई है।