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नए टेंडर से होगा 100 करोड़ का नुकसान : दुष्यंत भट्ट
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पानीपत। पत्रकार वार्ता कर जानकारी देते हुए सीनियर डिप्टी मेयर दुष्यंत भट्ट।
- फोटो : Panipat
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पानीपत। शहर की सफाई पर विवाद बढ़ता जा रहा है। दो जोन में 3.52 करोड़ प्रति माह की लागत के टेंडर से नगर निगम को पांच वर्ष 100 करोड़ से अधिक का नुकसान होगा। वरिष्ठ उपमहापौर दुष्यंत भट्ट ने सफाई के टेंडर पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह इसे रद कराएंगे। उन्होंने कहा कि जब सरकार 1.60 करोड़ की मंजूरी दी और दूसरे ठेकेदार भी इसी कीमत पर सफाई करने को तैयार हैं तो 3.52 करोड़ रुपये खर्च क्यों किया जाए।
वरिष्ठ उपमहापौर ने वीरवार को पालिका बाजार निगम कार्यालय में प्रेसवार्ता की। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी शहर की छह सड़कों के लिए लगाए गए टेंडर में निगम को करीब 40 करोड़ का नुकसान हो चुका है, जिससे रद कराया गया था। अब इस टेंडर को भी रद कराया जाएगा। उन्होंने आरोप लगा कि रोड स्वीपिंग के टेंडर लेने वाले ठेकेदार और दो जोन में सफाई का टेंडर लेने वाले ठेकेदार में संबंध हैं। शहर को लूटने नहीं दिया जाएगा। इस टेंडर प्रक्रिया में भ्रष्टाचार छिपा है।
भाजपा संगठन को सौंपी रिपोर्ट
वरिष्ठ उपमहापौर दुष्यंत भट्ट ने बताया कि उन्होंने दो दिन तक टेंडर की प्रक्रिया और शहर में चल रही गतिविधियों का गहनता से अध्ययन किया। इसके बाद बनाई गई रिपोर्ट भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष संगठन को सौंप दी गई। इस टेंडर को रद कराया जाएगा। इनमें निगम अधिकारियों के साथ ही कुछ जनप्रतिनिधियों की संलिप्तता भी है।
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इस तरह होगा 100 करोड़ का नुकसान
वरिष्ठ उप महापौर ने कहा कि सरकार ने शहर की सफाई के लिए 1.60 करोड़ रुपये का मासिक बजट प्रस्तावित किया था। इसी बजट में दूसरी एजेंसियां तक शहर की सफाई करने के लिए तैयार हैं। शर्तें लगाकर इन एजेंसियों को जानबूझकर बाहर कर दिया गया। दोगुने से अधिक कीमत पर लगे टेंडर से निगम को प्रति माह दो करोड़, एक वर्ष में 24 और पांच वर्ष 100 करोड़ से अधिक का नुकसान होगा।
पहले ऐसे हो चुका है 40 करोड़ का नुकसान
उन्होंने बताया कि छह रोड की सफाई के लिए निगम हर माह करीब एक करोड़ रुपये खर्च करता आया है। इनमें से तीन रोड तो निर्माणाधीन हैं। जीटी रोड की सफाई का काम एलएंडटी के पास है, बावजूद इसके सिर्फ दो सड़कों की सफाई के लिए एक करोड़ रुपये महीना दिया जाता रहा।
हैरानी की बात ये है कि निगम सदन में प्रस्ताव पास करने के छह महीने बाद तक इसे बढ़ाया जाता रहा और कोई इसके खिलाफ बोलने को तैयार नहीं हुआ। साढ़े तीन साल तक चले इस टेंडर में एक करोड़ रुपये महीना के हिसाब से निगम को करीब 40 करोड़ का नुकसान हुआ।
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वरिष्ठ उपमहापौर ने वीरवार को पालिका बाजार निगम कार्यालय में प्रेसवार्ता की। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी शहर की छह सड़कों के लिए लगाए गए टेंडर में निगम को करीब 40 करोड़ का नुकसान हो चुका है, जिससे रद कराया गया था। अब इस टेंडर को भी रद कराया जाएगा। उन्होंने आरोप लगा कि रोड स्वीपिंग के टेंडर लेने वाले ठेकेदार और दो जोन में सफाई का टेंडर लेने वाले ठेकेदार में संबंध हैं। शहर को लूटने नहीं दिया जाएगा। इस टेंडर प्रक्रिया में भ्रष्टाचार छिपा है।
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भाजपा संगठन को सौंपी रिपोर्ट
वरिष्ठ उपमहापौर दुष्यंत भट्ट ने बताया कि उन्होंने दो दिन तक टेंडर की प्रक्रिया और शहर में चल रही गतिविधियों का गहनता से अध्ययन किया। इसके बाद बनाई गई रिपोर्ट भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष संगठन को सौंप दी गई। इस टेंडर को रद कराया जाएगा। इनमें निगम अधिकारियों के साथ ही कुछ जनप्रतिनिधियों की संलिप्तता भी है।
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इस तरह होगा 100 करोड़ का नुकसान
वरिष्ठ उप महापौर ने कहा कि सरकार ने शहर की सफाई के लिए 1.60 करोड़ रुपये का मासिक बजट प्रस्तावित किया था। इसी बजट में दूसरी एजेंसियां तक शहर की सफाई करने के लिए तैयार हैं। शर्तें लगाकर इन एजेंसियों को जानबूझकर बाहर कर दिया गया। दोगुने से अधिक कीमत पर लगे टेंडर से निगम को प्रति माह दो करोड़, एक वर्ष में 24 और पांच वर्ष 100 करोड़ से अधिक का नुकसान होगा।
पहले ऐसे हो चुका है 40 करोड़ का नुकसान
उन्होंने बताया कि छह रोड की सफाई के लिए निगम हर माह करीब एक करोड़ रुपये खर्च करता आया है। इनमें से तीन रोड तो निर्माणाधीन हैं। जीटी रोड की सफाई का काम एलएंडटी के पास है, बावजूद इसके सिर्फ दो सड़कों की सफाई के लिए एक करोड़ रुपये महीना दिया जाता रहा।
हैरानी की बात ये है कि निगम सदन में प्रस्ताव पास करने के छह महीने बाद तक इसे बढ़ाया जाता रहा और कोई इसके खिलाफ बोलने को तैयार नहीं हुआ। साढ़े तीन साल तक चले इस टेंडर में एक करोड़ रुपये महीना के हिसाब से निगम को करीब 40 करोड़ का नुकसान हुआ।