फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Panipat News ›   1.8 lakh people of the district in the grip of diabetes

तनाव व खानपान से मधुमेह का बढ़ा खतरा, जिले के 1.8 लाख लोग मधुमेह की गिरफ्त में

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 14 Nov 2021 02:12 AM IST
विज्ञापन
1.8 lakh people of the district in the grip of diabetes
पानीपत। डॉ पवन वधावन - फोटो : Panipat
पानीपत। बदलती जीवनशैली और खान-पान व काम का बढ़ता बोझ हरियाणा के लोगों को मधुमेह की ओर धकेल रहा है। तनाव भी मधु मेह के मुख्य कारणों में से एक है। अब 30-35 आयु में भी मधुमेह के रोगी मिल रहे हैं। प्रदेश का हर पांचवां व्यक्ति मधुमेह और मोटापे का शिकार है। खास कर सामाजिक-आर्थिक रूप से अच्छी स्थिति वाले तबके के मुकाबले कमजोर वर्ग में मधुमेह के रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ी है। प्रदेश में शुगर के रोगियों में पानीपत तीसरे स्थान पर है। जबकि सोनीपत पहले व करनाल दूसरे स्थान पर है।
विज्ञापन

पानीपत में शुगर के रोगियों की संख्या लगभग 1.8 लाख हैं। इनमें से 65 प्रतिशत रोगी शहरी क्षेत्रों से हैं। डॉक्टरों के अनुुसार प्रदेश की कुल 20.57 फीसदी आबादी इस बीमारी से जूझ रही है। विशेषकर महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों पर खतरा ज्यादा है। सरकारी अस्पताल में शुगर के रोगियों के लिए प्राथमिक उपचार ही उपलब्ध है। यहां के रोगियों को निजी अस्पताल, खानपुर मेडिकल कॉलेज व रोहतक पीजीआई पर ही निर्भर होना पड़ रहा है।
विज्ञापन

शुगर के मरीजों की नसें होती हैं कमजोर, सरकारी अस्पताल में नहीं इलाज-
सिविल अस्पताल में नर्व कंडक्शन मशीन नहीं है। नर्व कंडक्शन मशीन से नसों की जांच होती है। मशीन के अभाव में सिविल अस्पताल में नसों का इलाज नहीं होता। जिले के मरीजों को नसों परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शुगर के मरीजों की नसें कमजोर जाती है। हाथ पैर काम करना बंद कर देते हैं। हाथ की हथेलियां पैर के पंजे सुन्न होने लगते हैं। नर्व कंडक्शन मशीन से जांच के बाद ही नसों की वास्तविक स्थिति का पता चल पाता है। लकवा, कार्पल टनल के मरीजों की जांच भी इसी मशीन के द्वारा होती है। सिविल अस्पताल में शुगर के मरीजों के लिए सिर्फ प्राथमिक उपचार ही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

800 से 1500 रुपये में नसों की जांच
शरीर के नसों की जांच का टेस्ट शहर के चार निजी अस्पतालों में है। इनमें टेस्ट की फीस 800 से 1500 रुपये तय है। इन्हीं अस्पतालों में नर्व कंडक्शन मशीन हैं। ऐसे में गरीब लोग टेस्ट की फीस देने के योग्य नहीं है। जोकि रोहतक पीजीआई में टेस्ट के लिए जाना पड़ता है।

मधुमेह के लक्षण-
- मधुमेह में कमजोरी
- ज्यादा मोटापा
- बार बार पेशाब आना
- आंख में कम रोशनी
- हाथ पैर में झनझनाहट
- ज्यादा प्यास लगना
वर्जन
मधुमेह आंख से लेकर दिल व किडनी पर यह अधिक असर करती है। इसे कंट्रोल करने के लिए काफी परहेज करना पड़ता है। इससे बचने के लिए जागरूकता बहुत जरूरी है। इस मीठे जहर से बचने के लिए सावधानी व सतर्कता दोनों जरूरी है। इससे बचने के लिए प्रतिदिन व्यायाम करना चाहिए। जक फूड से परहेज करें। खानपान के अंदर के कारण ही ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी क्षेत्रों के मुकाबले कम मरीज मिलते हैं।
डॉ. पवन वधावन, डॉक्टर रविंद्रा अस्पताल
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed