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किसान आंदोलन की अगली रणनीति आठ अक्तूबर को बनेगी, कुरुक्षेत्र में जुटेंगी हरियाणा की यूनियनें
Tue, 29 Sep 2020 03:31 AM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, कुरुक्षेत्र
अमर उजाला, कुरुक्षेत्र
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Tue, 29 Sep 2020 03:31 AM IST
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विरोध प्रदर्शन करते किसान
- फोटो : अमर उजाला
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हरियाणा सहित देश भर में किसान आंदोलन को तेज करने की अगली रणनीति कुरुक्षेत्र में बनाई जाएगी। देश के तमाम किसान संगठनों के प्रतिनिधि 8 अक्तूबर को कुरुक्षेत्र की कंबोज धर्मशाला में जुटेंगे। भारतीय किसान यूनियन बैठक की तैयारियों में जुट गई है।
यूनियन की हरियाणा इकाई के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि पूरा देश पूंजीपतियों का गुलाम होने जा रहा है। राष्ट्रपति से मंजूरी मिल गई है। इसलिए इन्हें अब किसानों पर केंद्र सरकार किसी भी समय थोप सकती है। जिसका डटकर विरोध किया जाएगा।
रविवार को देश के कई मुख्य किसान नेताओं ने अगले आंदोलन को लेकर चर्चा की और तय किया गया कि किसान आंदोलन को पूरे देश में तेज करने के लिए 8 अक्तूबर को पूरे सभी किसान संगठनों के प्रतिनिधियों की बैठक कुरुक्षेत्र में सुबह 11 बजे शुरू होगी। भाकियू के प्रवक्ता राकेश बैंस ने बताया कि यह बैठक ठोस निर्णय होने तक चलेगी।
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इसलिए मीटिंग में एक या 2 दिन लग सकते हैं। सभी किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से अनुरोध है कि बैठक में उपस्थित होकर आंदोलन को लेकर अपने सुझाव दें। राकेश ने कहा कि नए कानूनों को लेकर किसानों में काफी गुस्सा है। धान सीजन खत्म होने के बाद पर दमखम से आंदोलन शुरू किया जाएगा।
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यूनियन की हरियाणा इकाई के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि पूरा देश पूंजीपतियों का गुलाम होने जा रहा है। राष्ट्रपति से मंजूरी मिल गई है। इसलिए इन्हें अब किसानों पर केंद्र सरकार किसी भी समय थोप सकती है। जिसका डटकर विरोध किया जाएगा।
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रविवार को देश के कई मुख्य किसान नेताओं ने अगले आंदोलन को लेकर चर्चा की और तय किया गया कि किसान आंदोलन को पूरे देश में तेज करने के लिए 8 अक्तूबर को पूरे सभी किसान संगठनों के प्रतिनिधियों की बैठक कुरुक्षेत्र में सुबह 11 बजे शुरू होगी। भाकियू के प्रवक्ता राकेश बैंस ने बताया कि यह बैठक ठोस निर्णय होने तक चलेगी।
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इसलिए मीटिंग में एक या 2 दिन लग सकते हैं। सभी किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से अनुरोध है कि बैठक में उपस्थित होकर आंदोलन को लेकर अपने सुझाव दें। राकेश ने कहा कि नए कानूनों को लेकर किसानों में काफी गुस्सा है। धान सीजन खत्म होने के बाद पर दमखम से आंदोलन शुरू किया जाएगा।