फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   SET investigation extended for two months in alcohol scam

शराब घोटाला की जांच कर रही एसईटी का कार्यकाल दो माह बढ़ा, एडीजीपी अकील मोहम्मद शामिल

Sat, 30 May 2020 11:12 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Sat, 30 May 2020 11:12 PM IST
विज्ञापन
SET investigation extended for two months in alcohol scam
सांकेतिक तस्वीर।

हरियाणा में शराब घोटाले की जांच कर रही एसईटी का कार्यकाल दो माह के लिए बढ़ा दिया गया है। सीएम मनोहर लाल ने एसईटी का कार्यकाल बढ़ाने की फाइल को अनुमति दे दी है। अब एसईटी में सुभाष यादव के स्थान पर गुरुग्राम पुलिस कमिश्रर एडीजीपी अकील मोहम्मद को शामिल किया गया है। सुभाष यादव 31 मई को रिटायर हो जाएंगे।

विज्ञापन


हालांकि गृह मंत्री अनिल विज ने रोहतक रेंज के एडीजीपी संदीप खिरवार का नाम एसईटी में शामिल करने के लिए सुझाया था लेकिन सीएम ने अकील मोहम्मद को जिम्मेदारी दी है। विज ने बताया कि एसईटी से हमने पूछा था कि वे कब तक अपनी रिपोर्ट दे सकते हैं। जिसके बाद एसईटी के मुखिया टीसी गुप्ता ने लिखकर दिया कि दो माह का समय चाहिए। उनके कहने पर सरकार ने दो माह का समय दिया है। साथ ही विज ने यह भी कहा है कि अकील मोहम्मद अच्छे अफसर हैं।
विज्ञापन



यह भी पढ़ें- भीख मांगकर समाजसेवा करते हैं राजू, पीएम मोदी भी मुरीद, मन की बात में किया जिक्र, पढ़ें- कौन हैं
विज्ञापन
विज्ञापन


विज के गृह जिले अंबाला में रहते हुए भी अकील मोहम्मद ने बढ़िया काम किया है। विज ने उनकी कार्यप्रणाली पर संतोष जताया है। मालूम हो कि शुरुआत से ही एसईटी के गठन को लेकर सरकार में सियासत गरमाई रही है। वर्तमान में अनिल विज ने एसईटी की पावर बढ़ाने की मांग की थी।

इस बार भी विज की नहीं चली

एसईटी की पावर तो नहीं बढ़ी अलबत्ता सरकार ने एसईटी में खिरवार का नाम किनारे कर अकील मोहम्मद का नाम शािमल कर लिया है। पहले भी विज ने एसईटी के गठन के समय यह कोशिश की थी कि आईएएस अधिकारी अशोक खेमका की अध्यक्षता में एसईटी गठित की जाए लेकिन सरकार ने टीसी गुप्ता पर भरोसा जताया। इस बार विज संदीप खिरवार को चाह रहे थे, लेकिन इस बार भी उनकी नहीं चली।

सेक्शन 32 के तहत पावर चाहते थे विज
दरअसल इस पूरे मामले में एसईटी को एसआईटी बनवाने के लिए अनिल विज प्रयत्नशील थे। एसआईटी बनती तो उसे आरोपियों से पूछताछ की पावर मिल जाती, लेकिन कानूनी दांवपेंच आड़े आ गए।

सीआरपीसी के सेक्शन 32 के तहत विज ने पावर देने की अपील की थी, लेकिन सीआरपीसी का सेक्शन 36 आड़े आ गया और विधि परामर्शी ने राय देने से मना कर दी। सेक्शन 36 के तहत आरोपी से पूछताछ की पावर एसएचओ को होती है। बाद में इस मामले में महाधिवक्ता से राय मांगी गई। वहां से भी अनिल विज के अरमानों पर पानी फेर दिया गया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed