फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Punjab Assembly, SC-ST Reservation extended for 10 years

पंजाब में 10 साल और बढ़ी एससी-एसटी आरक्षण अवधि, विधानसभा में सहमति से प्रस्ताव परित

Sat, 18 Jan 2020 03:22 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Sat, 18 Jan 2020 03:22 PM IST
विज्ञापन
Punjab Assembly, SC-ST Reservation extended for 10 years
सांकेतिक तस्वीर
पंजाब विधानसभा ने शुक्त्रस्वार को संविधान के 126वें संशोधन की पुष्टि करने संबंधी प्रस्ताव को सर्वसम्मति के साथ पास कर दिया। इससे पंजाब में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण में 10 सालों का और विस्तार हो जाएगा।
विज्ञापन


सदन में प्रस्ताव पेश करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संविधान के संशोधनों की पुष्टि करने के बहुत ही अहम एजेंडे की ख़ातिर विधानसभा का दो-दिवसीय विशेष सत्र बुलाया गया है। यह संशोधन जो अनुच्छेद 368 की क्लॉज (2) की धारा की क्लॉज (स) के उपबंध के अधीन आते हैं, की पुष्टि संविधान (126वां संशोधन) बिल-2019 के द्वारा की गई है, जिन्हें संसद के दोनों सदनों की तरफ से पहले ही पास किया जा चुका है।
विज्ञापन


मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. बीआर आंबेडकर के नेतृत्व में संविधान के निर्माताओं द्वारा अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए 10 सालों के समय के लिए आरक्षण दिया गया था और उस समय से अब तक समय -समय की सरकारों द्वारा इसमें विस्तार किया जाता रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


उन्होंने कहा कि हालाँकि भेदभाव विरोधी नीतियाँ और राजनैतिक नुमायंदगी और नौकरियों में आरक्षण के स्वरूप बीते 70 सालों में इन भाईचारों के सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है परन्तु इसके बावजूद वह बाकी समाज के बराबर नहीं रहे। उन्होंने कहा कि इसके नतीजे के तौर पर अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षण में 10 सालों का और विस्तार करने का मज़बूत केस बनता है जिससे समाज के गरीबों और दबे-कुचले वर्गों के विकास के अधूरे कार्य को मुकम्मल किया जा सके।

कैप्टन सिंह ने कहा, ‘‘मुझे पता है कि अनुसूचित जातियों के विकास के साथ सम्बन्धित बहुत से मुद्दे हैं और मेरी सरकार इसके प्रति पूर्ण तौर पर वचनबद्ध है परन्तु यह प्रस्ताव बिना किसी देरी के सर्वसम्मति से पास किया जाना चाहिए।’’ उन्होंने अच्छी शिक्षा, प्रशिक्षण और नौकरियों में नुमायंदगी देकर इन वर्गों की भलाई के प्रति अपनी वचनबद्धता के लिए साझे यत्न करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।

लगातार बढ़ाया जाता रहा है आरक्षण
भारत के संविधान की धारा 334, लोकसभा और विधानसभा में अनुसूचित जातियों /अनुसूचित जनजातियों के लिए सीटों का आरक्षण और एंग्लो इंडियन की विशेष नुमायंदगी मुहैया कराती है। शुरू में यह आरक्षण साल 1960 में ख़त्म हो जाना था परंतु संविधान के 8वें संशोधन के द्वारा यह आरक्षण साल 1970 तक बढ़ा दिया गया था। इसके बाद संविधान के 23वें और 45वें संशोधन के द्वारा आरक्षण क्त्रस्मवार 1980 और 1990 तक बढ़ाया गया था।


संविधान के 62वें संशोधन के द्वारा आरक्षण साल 2000 तक बढ़ा दिया गया था। इसके उपरांत संविधान के 79वें और 95वें संशोधन के द्वारा आरक्षण क्त्रस्मश: 2010 और 2020 तक बढ़ाया गया। आरक्षण और विशेष नुमायंदगी के लिए 95वें संशोधन के द्वारा 10 सालों का किया गया विस्तार 25 जनवरी, 2020 को ख़त्म हो जाना है। 126वें संशोधन को लोकसभा द्वारा 10 दिसंबर, 2019 को और राज्यसभा द्वारा 12 दिसंबर, 2019 को पास किया गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed