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पंजाब यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट सेंटर की दुकानें सील, पुलिस और छात्रों में हाथापाई...जोरदार हंगामा
Sat, 02 Nov 2019 12:44 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Sat, 02 Nov 2019 12:44 PM IST
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स्टूडेंट सेंटर पर मम्मा मियां दुकान को सील करने पहुंचे सिक्योरिटी अफसरों से बहस करते स्टूडेंट
- फोटो : अमर उजाला
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पीयू स्टूडेंट सेंटर स्थित दो दुकानें सील करने को लेकर शुक्रवार को हंगामा हो गया। छात्र नेताओं और पुलिस में पहले नोकझोंक हुई। मामला इतना बढ़ा की हाथापाई हो गई। मामला कुछ देर के लिए शांत हुआ, लेकिन छात्रों में फिर उबाल आ गया। उन्होंने एक दुकान का ताला तोड़ दिया, लेकिन बाद में सुरक्षा कर्मियों ने फिर ताला जड़ दिया।
शाम को कमेटी की बैठक हुई, लेकिन पीयू प्रशासन ने कह दिया कि स्टूडेंट सेंटर हेरिटेज है, यहां दोबारा दुकानें नहीं खोली जाएंगी। इसके बाद फिर छात्रों ने दुकानों के ताले रात को तोड़कर खोलने की कोशिश की, लेकिन अथॉरिटी ने उन्हें समझाया कि शनिवार को कुछ हल निकाला जाएगा, उसके बाद सभी छात्र नेता वहां से चले गए।
ये है ‘मम्मा मियां व ‘नेसकैफे’ की दुकान का मामला
स्टूडेंट सेंटर स्थित दो दुकानें वर्ष 2014-15 से संचालित हैं। आरोप है कि इन दुकानों के लिए न तो कोई टेंडर किया गया और न अन्य प्रक्रिया। सीधे ही एक छात्र नेता को यह आवंटित कर दी गईं। जून 2018 में पीयू प्रशासन ने दुकान संचालकों को नोटिस जारी करते हुए कहा कि स्टूडेंट सेंटर हेरिटेज है, यहां कमर्शियल कार्य नहीं हो सकता है, ऐसे में दुकानें खाली करनी होंगी।
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दुकानदारों को दो माह का समय दिया गया। बाद में फिर दो माह का कार्यकाल बढ़ा दिया गया। दो माह पूरे होने के बाद फिर पीयू प्रशासन ने आखिरी नोटिस दिया, लेकिन दुकानें खाली नहीं हुईं। वीरवार को नोटिस का समय पूरा हो गया तो शुक्रवार को रजिस्ट्रार प्रो. करमजीत सिंह, डीएसडब्ल्यू प्रो. इमैनुअल नाहर, चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर प्रो. अश्वनी कौल सुरक्षा कर्मियों के साथ स्टूडेंट सेंटर पहुंचे और उन्होंने काम कर रहे कर्मचारियों को बाहर आने को कहा। उसी दौरान हंगामा खड़ा हो गया।
छात्र नेताओं ने दुकान सील करने का जमकर विरोध किया। इस दौरान पुलिस और छात्र नेताओं में धक्कामुक्की व हाथापाई भी हो गई। पुलिस बल अधिक होने के कारण ‘मम्मा मियां’ व ‘नेसकैफे’ की दुकान सील कर दी गईं। जैसे ही वहां से अथॉरिटी के अधिकारी गए तो छात्र नेताओं ने एक दुकान के ताले तोड़ दिए। उसके बाद वह डीएसडब्ल्यू से मिलने पहुंचे। शाम इस इस पर बैठक हुई लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। उसके बाद छात्र नेताओं ने सेंटर पहुंचकर ताला तोड़ने की कोशिश की लेकिन यह नहीं होने दिया।
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शाम को कमेटी की बैठक हुई, लेकिन पीयू प्रशासन ने कह दिया कि स्टूडेंट सेंटर हेरिटेज है, यहां दोबारा दुकानें नहीं खोली जाएंगी। इसके बाद फिर छात्रों ने दुकानों के ताले रात को तोड़कर खोलने की कोशिश की, लेकिन अथॉरिटी ने उन्हें समझाया कि शनिवार को कुछ हल निकाला जाएगा, उसके बाद सभी छात्र नेता वहां से चले गए।
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ये है ‘मम्मा मियां व ‘नेसकैफे’ की दुकान का मामला
स्टूडेंट सेंटर स्थित दो दुकानें वर्ष 2014-15 से संचालित हैं। आरोप है कि इन दुकानों के लिए न तो कोई टेंडर किया गया और न अन्य प्रक्रिया। सीधे ही एक छात्र नेता को यह आवंटित कर दी गईं। जून 2018 में पीयू प्रशासन ने दुकान संचालकों को नोटिस जारी करते हुए कहा कि स्टूडेंट सेंटर हेरिटेज है, यहां कमर्शियल कार्य नहीं हो सकता है, ऐसे में दुकानें खाली करनी होंगी।
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दुकानदारों को दो माह का समय दिया गया। बाद में फिर दो माह का कार्यकाल बढ़ा दिया गया। दो माह पूरे होने के बाद फिर पीयू प्रशासन ने आखिरी नोटिस दिया, लेकिन दुकानें खाली नहीं हुईं। वीरवार को नोटिस का समय पूरा हो गया तो शुक्रवार को रजिस्ट्रार प्रो. करमजीत सिंह, डीएसडब्ल्यू प्रो. इमैनुअल नाहर, चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर प्रो. अश्वनी कौल सुरक्षा कर्मियों के साथ स्टूडेंट सेंटर पहुंचे और उन्होंने काम कर रहे कर्मचारियों को बाहर आने को कहा। उसी दौरान हंगामा खड़ा हो गया।
छात्र नेताओं ने दुकान सील करने का जमकर विरोध किया। इस दौरान पुलिस और छात्र नेताओं में धक्कामुक्की व हाथापाई भी हो गई। पुलिस बल अधिक होने के कारण ‘मम्मा मियां’ व ‘नेसकैफे’ की दुकान सील कर दी गईं। जैसे ही वहां से अथॉरिटी के अधिकारी गए तो छात्र नेताओं ने एक दुकान के ताले तोड़ दिए। उसके बाद वह डीएसडब्ल्यू से मिलने पहुंचे। शाम इस इस पर बैठक हुई लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। उसके बाद छात्र नेताओं ने सेंटर पहुंचकर ताला तोड़ने की कोशिश की लेकिन यह नहीं होने दिया।
सीनेटरों ने भी कई बार उठाया मामला, लेकिन किसी ने नहीं सुनी
इस प्रकरण को सीनेटरों ने भी कई बार उठाया। नियमों की दुहाई दी, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। लगातार नियमों की अनदेखी होती रही। अब जाकर दुकान खाली करवाने की पीयू अथॉरिटी ने जहमत उठाई तो उस दुकान को बचाने के लिए पूरा अमला जुट गया। तमाम छात्र संगठन के नेता प्रदर्शन करने लगे। वहीं सीनेटर भी दुकान बचाने को ताकत झोंके हुए हैं।
कुछ शिक्षकों ने खड़े किए सवाल...
कुछ शिक्षकों का कहना है कि छात्र नेताओं को छात्रों की समस्याओं को उजागर करना चाहिए। पीयू का यह सेंटर हेरिटेज है, इसे बचाने के लिए छात्र नेताओं को पहल करनी चाहिए और वह दुकान को बचाने में लगे हैं। यदि वह दूसरी जगह इसी दुकान को खोलने की मांग कर रहे हैं तो उनकी मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पीयू के पुराने शिक्षक बोले- अथॉरिटी ने सही कदम उठाया
पीयू के पुराने शिक्षकों ने कहा है कि सेंटर स्थित दो दुकानों को खाली करवाकर भवन को हेरिटेज बनाए रखने का यह कदम अच्छा है, लेकिन अब अथॉरिटी को और भी काम करने की जरूरत है। स्टूडेंट सेंटर स्थित सभी दुकानें बिना टेंडर के आवंटित की गई हैं, अब उन्हें भी खाली करवाना चाहिए।
शिक्षकों का कहना है कि पीयू ने इसे कमाई का जरिया बनाया और नियमों को ताक पर रखते गए। इन दुकानों पर वर्षों से दुकानदारों का कब्जा है, जो अपनी मनमानी पर उतारू हैं। शिक्षकों का कहना है कि यह सभी दुकानें खाली करवानी चाहिए और हर साल दुकानों के लिए टेंडर होने चाहिए। इन सभी दुकानों के हर साल टेंडर होंगे तो छात्रों को खाना भी अच्छा और सस्ता मिलेगा।
स्टूडेंट सेंटर स्थित दुकानें पांच साल के लिए आवंटित की गई थीं, जिनकी अवधि पूरी हो गई। शुक्रवार को टीम ने दुकानों को सील कर दिया है। साथ ही कमेटी भी बना दी गई है। यह कमेटी आगे जो निर्णय लेगी वह लागू होगा।
- प्रो. करमजीत सिंह, रजिस्ट्रार
स्टूडेंट सेंटर स्थित दुकानों के बंद होने से छात्रों को दिक्कतें होंगी। कई छात्रों ने दुकानें फिर से खोलने की मांग की है। उन्हीं छात्रों की बात हमने अथॉरिटी के सामने रखी है। शनिवार को अथॉरिटी ने दुकानें खोलने का आश्वासन दिया है।
- चेतन चौधरी, अध्यक्ष पीयूसीएससी
कुछ शिक्षकों ने खड़े किए सवाल...
कुछ शिक्षकों का कहना है कि छात्र नेताओं को छात्रों की समस्याओं को उजागर करना चाहिए। पीयू का यह सेंटर हेरिटेज है, इसे बचाने के लिए छात्र नेताओं को पहल करनी चाहिए और वह दुकान को बचाने में लगे हैं। यदि वह दूसरी जगह इसी दुकान को खोलने की मांग कर रहे हैं तो उनकी मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पीयू के पुराने शिक्षक बोले- अथॉरिटी ने सही कदम उठाया
पीयू के पुराने शिक्षकों ने कहा है कि सेंटर स्थित दो दुकानों को खाली करवाकर भवन को हेरिटेज बनाए रखने का यह कदम अच्छा है, लेकिन अब अथॉरिटी को और भी काम करने की जरूरत है। स्टूडेंट सेंटर स्थित सभी दुकानें बिना टेंडर के आवंटित की गई हैं, अब उन्हें भी खाली करवाना चाहिए।
शिक्षकों का कहना है कि पीयू ने इसे कमाई का जरिया बनाया और नियमों को ताक पर रखते गए। इन दुकानों पर वर्षों से दुकानदारों का कब्जा है, जो अपनी मनमानी पर उतारू हैं। शिक्षकों का कहना है कि यह सभी दुकानें खाली करवानी चाहिए और हर साल दुकानों के लिए टेंडर होने चाहिए। इन सभी दुकानों के हर साल टेंडर होंगे तो छात्रों को खाना भी अच्छा और सस्ता मिलेगा।
स्टूडेंट सेंटर स्थित दुकानें पांच साल के लिए आवंटित की गई थीं, जिनकी अवधि पूरी हो गई। शुक्रवार को टीम ने दुकानों को सील कर दिया है। साथ ही कमेटी भी बना दी गई है। यह कमेटी आगे जो निर्णय लेगी वह लागू होगा।
- प्रो. करमजीत सिंह, रजिस्ट्रार
स्टूडेंट सेंटर स्थित दुकानों के बंद होने से छात्रों को दिक्कतें होंगी। कई छात्रों ने दुकानें फिर से खोलने की मांग की है। उन्हीं छात्रों की बात हमने अथॉरिटी के सामने रखी है। शनिवार को अथॉरिटी ने दुकानें खोलने का आश्वासन दिया है।
- चेतन चौधरी, अध्यक्ष पीयूसीएससी