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पंजाब यूनिवर्सिटी को सहयोग करेगा हरियाणा, ऑफर- हमारे कॉलेजों को मान्यता दें...हम बजट देंगे
Tue, 29 Oct 2019 11:06 AM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Tue, 29 Oct 2019 11:06 AM IST
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पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़
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पंजाब विश्वविद्यालय को आर्थिक तंगी से बाहर निकालने के लिए हरियाणा सरकार ने फिर हाथ बढ़ाया है। हरियाणा ने पीयू को प्रस्ताव दिया है कि वह पीयू को एक शानदार बजट मुहैया कराएगा। हालांकि इसके लिए पीयू को हरियाणा के कालेजों को मान्यता देनी होगी और हरियाणा के विद्यार्थियों के प्रवेश का कोटा तय करना होगा। इस प्रस्ताव पर दिसंबर में फिर से बैठक करने की तैयारी चल रही है। केंद्र सरकार व पंजाब सरकार इसके लिए राजी होंगे तभी इस प्रस्ताव पर मुहर लग सकती है। हालांकि दूसरे प्रदेशों से भी पंजाब सरकार इसके लिए राय लेगी।
हरियाणा, हिमाचल के कालेजों को मिली थी मान्यता
1954 में चंडीगढ़ में पीयू का कैंपस स्थापित किया गया था। 1966 में पंजाब राज्य को पुनर्गठित किए जाने से पहले हरियाणा के नए क्षेत्र के कालेजों को पीयू ने मान्यता प्रदान की थी। अंबाला और आसपास के जिलों के कालेजों को यहां से मान्यता मिली थी और उनका संचालन भी बेहतर तरीके से चला। यहां तक की हिमाचल प्रदेश के भी कालेजों को यहां से मान्यता प्रदान की गई थी। पीयू का नाम पूरे देश में अच्छे विश्वविद्यालयों में आता है। धीरे-धीरे समय बीता और पंजाब, हरियाणा व हिमाचल प्रदेश ने अपने-अपने यहां राज्य स्तरीय विश्वविद्यालयों की स्थापना कर ली।
इसके बाद पीयू ने मान्यता खत्म कर दी। बाद में पीयू में पैसे का संकट खड़ा होने लगा। शिक्षकों व कर्मचारियों की सैलरी तक नहीं मिल पा रही थी। आखिर में शिक्षकों का बड़ा प्रोटेस्ट चला और केंद्र सरकार पर दबाव बनाया गया। आखिर में केंद्र ने धारा 72 के तहत पीयू के शिक्षक व कर्मचारियों की सैलरी देने का निर्णय लिया। हर साल इस वेतन में छह प्रतिशत की बढ़ोत्तरी करने का भी प्रस्ताव पास हुआ। वेतन का बंदोबस्त होने के बाद भी पीयू दौड़ नहीं लगा पा रहा है। बजट की व्यवस्था करने के लिए पीयू के जिम्मेदार लोग लगे हुए हैं।
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बजट का टोटा विकास में नहीं बनेगा बाधा
सूत्रों का कहना है कि इसी बीच हरियाणा ने इच्छा जताई है कि उनके कालेजों को यहां से मान्यता प्रदान की जाए। उसी के साथ पीयू को बड़ा बजट भी दिया जाएगा। ऐसी व्यवस्था से पीयू और आगे बढ़ेगा। बजट का टोटा पीयू के विकास में बाधा नहीं बनेगा। पंजाब की शान पीयू माना जाता है। सूत्रों का कहना है कि पंजाब इसके लिए हामी नहीं भरेगा। हालांकि इसके लिए प्रयास चल रहे हैं। केंद्र ने हामी भरी तो उसके बाद पंजाब को भी मनाया जा सकता है।
सूत्रों का कहना है कि यदि शिक्षक व कर्मचारियों ने साथ दिया तो हरियाणा पीयू की मदद कर सकेगा। मालूम हो कि पहले भी ऐसी इच्छा हरियाणा की ओर से जताई गई थी लेकिन उसमें सफलता नहीं मिल पाई। अब फिर से प्रयास चल रहे हैं। 20 सितंबर को उत्तरी क्षेत्रीय परिषद की हुई बैठक में पहुंचे देश के गृहमंत्री अमित शाह के सामने प्रस्तुत की गई बुकलेट में भी पंजाब विश्वविद्यालय की स्थिति शुरू से लेकर आखिर तक दर्शाई गई थी।
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हरियाणा, हिमाचल के कालेजों को मिली थी मान्यता
1954 में चंडीगढ़ में पीयू का कैंपस स्थापित किया गया था। 1966 में पंजाब राज्य को पुनर्गठित किए जाने से पहले हरियाणा के नए क्षेत्र के कालेजों को पीयू ने मान्यता प्रदान की थी। अंबाला और आसपास के जिलों के कालेजों को यहां से मान्यता मिली थी और उनका संचालन भी बेहतर तरीके से चला। यहां तक की हिमाचल प्रदेश के भी कालेजों को यहां से मान्यता प्रदान की गई थी। पीयू का नाम पूरे देश में अच्छे विश्वविद्यालयों में आता है। धीरे-धीरे समय बीता और पंजाब, हरियाणा व हिमाचल प्रदेश ने अपने-अपने यहां राज्य स्तरीय विश्वविद्यालयों की स्थापना कर ली।
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इसके बाद पीयू ने मान्यता खत्म कर दी। बाद में पीयू में पैसे का संकट खड़ा होने लगा। शिक्षकों व कर्मचारियों की सैलरी तक नहीं मिल पा रही थी। आखिर में शिक्षकों का बड़ा प्रोटेस्ट चला और केंद्र सरकार पर दबाव बनाया गया। आखिर में केंद्र ने धारा 72 के तहत पीयू के शिक्षक व कर्मचारियों की सैलरी देने का निर्णय लिया। हर साल इस वेतन में छह प्रतिशत की बढ़ोत्तरी करने का भी प्रस्ताव पास हुआ। वेतन का बंदोबस्त होने के बाद भी पीयू दौड़ नहीं लगा पा रहा है। बजट की व्यवस्था करने के लिए पीयू के जिम्मेदार लोग लगे हुए हैं।
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बजट का टोटा विकास में नहीं बनेगा बाधा
सूत्रों का कहना है कि इसी बीच हरियाणा ने इच्छा जताई है कि उनके कालेजों को यहां से मान्यता प्रदान की जाए। उसी के साथ पीयू को बड़ा बजट भी दिया जाएगा। ऐसी व्यवस्था से पीयू और आगे बढ़ेगा। बजट का टोटा पीयू के विकास में बाधा नहीं बनेगा। पंजाब की शान पीयू माना जाता है। सूत्रों का कहना है कि पंजाब इसके लिए हामी नहीं भरेगा। हालांकि इसके लिए प्रयास चल रहे हैं। केंद्र ने हामी भरी तो उसके बाद पंजाब को भी मनाया जा सकता है।
सूत्रों का कहना है कि यदि शिक्षक व कर्मचारियों ने साथ दिया तो हरियाणा पीयू की मदद कर सकेगा। मालूम हो कि पहले भी ऐसी इच्छा हरियाणा की ओर से जताई गई थी लेकिन उसमें सफलता नहीं मिल पाई। अब फिर से प्रयास चल रहे हैं। 20 सितंबर को उत्तरी क्षेत्रीय परिषद की हुई बैठक में पहुंचे देश के गृहमंत्री अमित शाह के सामने प्रस्तुत की गई बुकलेट में भी पंजाब विश्वविद्यालय की स्थिति शुरू से लेकर आखिर तक दर्शाई गई थी।