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दूर होगा बिजली संकट, झारखंड के पचवारा में कोयला खदान का होगा संचालन
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चंडीगढ़। पंजाब में जल्द ही बिजली संकट दूर होगा। झारखंड के पचवारा में कोयला खदान का संचालन जल्द शुरू होने जा रहा है। पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) के अधिकारियों ने हाल ही में कोयला खदान का दौरा किया है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि अप्रैल के अंत तक कोयला खदान में खनन का कार्य शुरू हो जाएगा।
पीएसपीसीएल के सूत्रों ने बताया कि विभाग के शीर्ष अधिकारियों ने हाल ही में कोयला ब्लॉक का दौरा किया और परिचालन शुरू करने के लिए सभी व्यवस्थाएं भी कीं हैं। पीएसपीसीएल की ओर से धान के मौसम से पहले इस कोयला खदान से खनन शुरू करने और कोयले की आपूर्ति प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। पंजाब को कई महीनों से प्रतिबंधित कोयले की आपूर्ति ही मिल रही है। धान के सीजन में पानी की होने वाली दिक्कत को देखते हुए पीएसपीसीएल पहले ही तैयारी में जुट गया है। पंजाब में धान की हर साल सरप्लस खेती होती है। 2021-22 में 180 लाख टन धान पैदा हुआ। यहां पर अधिकांश किसान धान की फसल की एमएसपी पर खरीद होने के कारण धान की पैदावार करते हैं। यही कारण है कि देश भर में पंजाब धान की पैदावार करने में तीसरे नंबर पर है। पंजाब के 1.90 लाख किसानों को 8 हजार करोड़ रुपये से अधिक की निशुल्क में बिजली दी जाती है।
तलवंडी साबो में बचा है 2.5 दिन का कोयला
रोपड़ और लहर मोहब्बत में राज्य द्वारा संचालित थर्मल प्लांट में क्रमश: 25 और 21 दिनों के लिए कोयले का भंडार है। नाभा पावर प्लांट में सिर्फ साढ़े छह दिन का भंडारण है। तलवंडी साबो प्लांट में 2.5 दिन का और जीवीके प्लांट में पांच दिनों का कोयले का भंडारण बचा है।
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पीएसपीसीएल के सूत्रों ने बताया कि विभाग के शीर्ष अधिकारियों ने हाल ही में कोयला ब्लॉक का दौरा किया और परिचालन शुरू करने के लिए सभी व्यवस्थाएं भी कीं हैं। पीएसपीसीएल की ओर से धान के मौसम से पहले इस कोयला खदान से खनन शुरू करने और कोयले की आपूर्ति प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। पंजाब को कई महीनों से प्रतिबंधित कोयले की आपूर्ति ही मिल रही है। धान के सीजन में पानी की होने वाली दिक्कत को देखते हुए पीएसपीसीएल पहले ही तैयारी में जुट गया है। पंजाब में धान की हर साल सरप्लस खेती होती है। 2021-22 में 180 लाख टन धान पैदा हुआ। यहां पर अधिकांश किसान धान की फसल की एमएसपी पर खरीद होने के कारण धान की पैदावार करते हैं। यही कारण है कि देश भर में पंजाब धान की पैदावार करने में तीसरे नंबर पर है। पंजाब के 1.90 लाख किसानों को 8 हजार करोड़ रुपये से अधिक की निशुल्क में बिजली दी जाती है।
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रोपड़ और लहर मोहब्बत में राज्य द्वारा संचालित थर्मल प्लांट में क्रमश: 25 और 21 दिनों के लिए कोयले का भंडार है। नाभा पावर प्लांट में सिर्फ साढ़े छह दिन का भंडारण है। तलवंडी साबो प्लांट में 2.5 दिन का और जीवीके प्लांट में पांच दिनों का कोयले का भंडारण बचा है।
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