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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम के निरीक्षण से पहले प्लांट संचालकों ने किया पानी का छिड़काव
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पंचकूला। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने वीरवार को रायपुररानी समेत कई जगह स्थित स्टोन क्रशर और स्क्रीनिंग प्लांट का औचक निरीक्षण किया। सूचना लीक होने पर संचालकों ने आनन-फानन में प्लांटों के चारों तरफ पानी का छिड़काव करवा दिया। ऐसा इसलिए ताकि टीम के सदस्यों को कहीं धूल न दिखाई दे। टीम के जाने के कुछ घंटे बाद हालात पहले जैसे ही हो गए। अमर उजाला ने प्लांट संचालकों द्वारा नियमों की अनदेखी करने का समाचार प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इस पर संज्ञान लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम निरीक्षण करने पहुंची थी।
वहीं, रायपुररानी, टिब्बा, बड़ौना खुर्द और पिंजौर एरिया में संचालित स्टोन क्रशर और स्क्रीनिंग प्लांट मालिकों द्वारा नियमों की अनदेखी करने के मामले की लिखित शिकायत पंचकूला उपायुक्त मुकेश कुमार आहूजा को सौंपा था। ग्रामीणों ने शिकायत में आरोप लगाया था कि प्लांट संचालक लगातार भूजल का दोहन कर रहे हैं। उन्हें 90 फीसदी जल स्टोर करना होता है, लेकिन वह प्लांट से निकलने वाले गंदे पानी को नदियों में छोड़ रहे हैं। इससे उन्हें कई तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं प्लांट संचालकों ने भूमि को भी पक्का नहीं किया है, जिससे धूल उड़ती है, यहां से गुजरने वाले वाहन चालकों को परेशानी होती है। धूल नहीं उड़े इसके लिए प्लांट संचालकों को जल छिड़कने वाली मशीन को लगाना अनिवार्य है। इसके अलावा प्लांट के चारों तरफ दीवार होनी चाहिए और आसपास पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधे लगे होने चाहिए। किसी भी प्लांट संचालक ने ऐसा नहीं किया है।
उधर, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक्सईएन वीरेंद्र पुनिया का कहना है कि वह लगातार प्लांट का निरीक्षण कर रहे हैं। जहां भी नियमों की अनदेखी पाई जाती है वहां सख्त कार्रवाई की जाती है। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले ही निरीक्षण के दौरान खामी मिलने पर 10 प्लांटों को बंद कर दिया गया था। टीमें लगातार निरीक्षण कर रही हैं।
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वहीं, रायपुररानी, टिब्बा, बड़ौना खुर्द और पिंजौर एरिया में संचालित स्टोन क्रशर और स्क्रीनिंग प्लांट मालिकों द्वारा नियमों की अनदेखी करने के मामले की लिखित शिकायत पंचकूला उपायुक्त मुकेश कुमार आहूजा को सौंपा था। ग्रामीणों ने शिकायत में आरोप लगाया था कि प्लांट संचालक लगातार भूजल का दोहन कर रहे हैं। उन्हें 90 फीसदी जल स्टोर करना होता है, लेकिन वह प्लांट से निकलने वाले गंदे पानी को नदियों में छोड़ रहे हैं। इससे उन्हें कई तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं प्लांट संचालकों ने भूमि को भी पक्का नहीं किया है, जिससे धूल उड़ती है, यहां से गुजरने वाले वाहन चालकों को परेशानी होती है। धूल नहीं उड़े इसके लिए प्लांट संचालकों को जल छिड़कने वाली मशीन को लगाना अनिवार्य है। इसके अलावा प्लांट के चारों तरफ दीवार होनी चाहिए और आसपास पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधे लगे होने चाहिए। किसी भी प्लांट संचालक ने ऐसा नहीं किया है।
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उधर, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक्सईएन वीरेंद्र पुनिया का कहना है कि वह लगातार प्लांट का निरीक्षण कर रहे हैं। जहां भी नियमों की अनदेखी पाई जाती है वहां सख्त कार्रवाई की जाती है। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले ही निरीक्षण के दौरान खामी मिलने पर 10 प्लांटों को बंद कर दिया गया था। टीमें लगातार निरीक्षण कर रही हैं।
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