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मां की दूसरी शादी से बच्चे के जन्म प्रमाणपत्र में जैविक पिता का नाम नहीं बदलेगा: हाईकोर्ट

Sun, 06 Sep 2026 01:46 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 06 Sep 2026 01:46 AM IST
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Mother's remarriage will not change biological father's name in child's birth certificate: High Court
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बच्चे के जन्म प्रमाणपत्र में दर्ज जैविक माता-पिता का नाम नहीं बदला जा सकता। माता-पिता के वैवाहिक जीवन में बाद में आए बदलाव से इस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
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हाईकोर्ट ने कहा कि माता-पिता में से किसी एक की दूसरी शादी जैविक पिता का नाम बदलने का आधार नहीं बनती। जन्म प्रमाणपत्र बच्चे के जन्म और उसके माता-पिता से संबंधित उस समय के तथ्य को दर्ज करता है। इन तथ्यों को बाद की किसी घटना के आधार पर मिटाया नहीं जा सकता है। यह टिप्पणी एक महिला द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए की गई।
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याचिकाकर्ता ने अपने नाबालिग बच्चे के जन्म प्रमाणपत्र में पिता का नाम जगजीत सिंह करने की मांग की थी। वर्तमान प्रमाणपत्र में बच्चे के जैविक पिता के तौर पर अन्य नाम दर्ज था। याचिका का मुख्य आधार बच्चे की मां की दोबारा शादी था। इसी वजह से माता-पिता संबंधी विवरण में बदलाव की मांग की गई थी।
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हाईकोर्ट का स्पष्टीकरण :

अदालत ने स्पष्ट किया कि विवाह, तलाक या माता-पिता की दोबारा शादी का जन्म प्रमाणपत्र पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। जन्म प्रमाणपत्र का उद्देश्य बच्चे के जन्म और उसके जैविक माता-पिता के संबंध में तथ्य दर्ज करना है। बच्चे के जन्म के समय जो जैविक तथ्य मौजूद थे, उन्हें बाद की घटना से समाप्त नहीं किया जा सकता। जैविक माता-पिता का नाम बदलना स्वीकार्य नहीं है, भले ही बाद में माता या पिता ने दूसरी शादी कर ली हो।




पूर्व निर्णयों का उल्लेख :

अदालत ने इसी विषय से जुड़े अपने पहले के निर्णय का भी उल्लेख किया। पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि जैविक माता-पिता का नाम वैवाहिक परिस्थितियों के आधार पर नहीं बदला जा सकता। जन्म प्रमाणपत्र में दर्ज तथ्य किसी बाद की घटना से मिटाए नहीं जा सकते। सभी संबंधित पक्षों को इन तथ्यों को स्वीकार करना होगा। इस आधार पर अदालत ने याचिका में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं पाया और उसे खारिज कर दिया।
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