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इंसान का जीवन अमावस्या की घोर रात जैसा: भारती
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 26 Jul 2016 01:09 AM IST
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दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान
- फोटो : अमर उजाला
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सेक्टर 16 स्थित अग्रवाल भवन में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से गुरू पूर्णिमा महोत्सव से मनाया गया। कार्यक्रम में संस्थान के प्रचारकों और साध्वियों ने सत्संग किया गया। जीवन में कल्याण के लिए सतगुरू की शरणागति के बारे में विस्तृत से जानकारी दी। आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी विश्वधारा भारती ने कहा गुरु पूजा का पावन पुनीत पर्व आषाढ़ शुक्लपक्ष की पूर्णिमा वाले दिन मनाया जाता है।
इस दिन महर्षि वेद व्यास का धरा पर अवतरण हुआ था और उनके शिष्यों ने इसी पुण्य दिवस को गुरु पूजन का दिन चुना। यही कारण है कि गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। साध्वी ने कहा कि गुरु की महिमा को कलमबद्ध नहीं किया जा सकता। शास्त्रों में तो गुरु को ईश्वर से भी बड़ा दर्जा दिया गया है, क्योंकि गुरु निगुर्ण ब्रह्म के अभौतिक तत्व का व्यक्ति के रूप में प्रकटीकरण हैं। साध्वी ने कहा इंसान का जीवन अमावस्या की घोर रात्रि जैसा है। जीवन में कुछ भव्य व्यक्तित्व, कुछ सदाचरण के कारण स्नेही होते हैं। पर जो सतगुरु ईश्वर का दर्शन करा जीवन में से अमावस्या को दूर कर पूर्णिमा लाते हैं वे साधक के सर्वस्व हुआ करते हैं और ऐसे गुरु की पूजा करना ही सार्थक है। कार्यक्रम का समापन पावन आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ हुआ।
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इस दिन महर्षि वेद व्यास का धरा पर अवतरण हुआ था और उनके शिष्यों ने इसी पुण्य दिवस को गुरु पूजन का दिन चुना। यही कारण है कि गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। साध्वी ने कहा कि गुरु की महिमा को कलमबद्ध नहीं किया जा सकता। शास्त्रों में तो गुरु को ईश्वर से भी बड़ा दर्जा दिया गया है, क्योंकि गुरु निगुर्ण ब्रह्म के अभौतिक तत्व का व्यक्ति के रूप में प्रकटीकरण हैं। साध्वी ने कहा इंसान का जीवन अमावस्या की घोर रात्रि जैसा है। जीवन में कुछ भव्य व्यक्तित्व, कुछ सदाचरण के कारण स्नेही होते हैं। पर जो सतगुरु ईश्वर का दर्शन करा जीवन में से अमावस्या को दूर कर पूर्णिमा लाते हैं वे साधक के सर्वस्व हुआ करते हैं और ऐसे गुरु की पूजा करना ही सार्थक है। कार्यक्रम का समापन पावन आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ हुआ।
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