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मानवता : हर साल 50 बच्चों को मां-बाप का साया दे रहा बाल कल्याण विभाग
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पंचकूला। महिला एवं बाल कल्याण विभाग प्रतिवर्ष औसतन 50 अनाथ बच्चों को माता-पिता का साया दे रहा है। प्रदेश के सात एडॉप्शन सेंटरों में विभाग मानवता का यह कार्य कर रहा है। विभाग के इस प्रयोजन से जहां अनाथ बच्चों को माता-पिता का सुख और परिवार का माहौल मिल रहा है, वहीं निसंतान दंपति भी संतान सुख लाभ ले रहे हैं। विभाग ने नौ साल में 468 बच्चों को गोद दिया है। वर्तमान में प्रदेश में सात एडॉप्शन सेंटरों में 71 बच्चे हैं, जिनका लालन-पालन और देखभाल विभाग कर रहा है।
कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो किसी कारण से जन्म के बाद बच्चों को नहीं रखना चाहते हैं। ऐसे बच्चों के साथ कुछ गलत न हो इसके लिए महिला एवं बाल कल्याण विभाग ने विशेष योजना तैयार की है। विभाग ने प्रदेश में सात एडॉप्शन सेंटर बनाए हैं। इन सेंटरों पर विभाग ने पालने लगाए हैं। जो अपने बच्चों को नहीं पालना चाहते वे उनको विभाग द्वारा लगाए पालने में रख देते हैं। उसके बाद उन बच्चों का लालन-पालन विभाग द्वारा किया जाता है। बच्चों को गोद देने के बाद विभाग दो साल तक उसका फीडबैक लेता है। बच्चे का लालन-पालन नियमानुसार किया जा रहा है या नहीं, इसकी लगातार जानकारी रखी जाती है।
इन जिलों में लगाए गए हैं पालने
महिला एवं बाल कल्याण विभाग ने प्रदेश के पंचकूला, कैथल, झज्जर, रेवाड़ी और फरीदाबाद में एक-एक सेंटर बनाया है। इसके अलावा हिसार में दो अडोप्शन सेंटर बनाए गए हैं। फिलहाल इन सभी सात सेंटरों में 71 बच्चों का लालन-पालन चल रहा है।
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बच्चों को ऐसे किया जाता है एडॉप्ट
बच्चे को गोद लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होता है। आवेदक को अपनी पूरी जानकारी अपलोड करनी होती है। इसके अलावा यह जानकारी भी देनी होती है कि उन्हें कितनी उम्र का बच्चा चाहिए। इसके अलावा बच्चे को लेकर अन्य जरूरी मांग भी अपलोड करनी होती है। उसके बाद जब उनका नंबर आता है तो विभाग द्वारा उनसे संपर्क किया जाता है।
कब कितने बच्चों को गोद दिया
वर्ष बच्चों की संख्या
2013-14 41
2014-15 34
2015-16 57
2016-17 54
2017-18 47
2018-19 62
2019-20 86
2020-21 37
2021-22 50
कुल 468
विभाग द्वारा महिलाओं और बच्चों के कल्याण के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। बच्चों को गोद दिए जाना भी इन्हीं में से एक है। विभाग ने प्रदेश में सात एडॉप्शन सेंटर बनाए हैं। विभाग के इन सेंटरों में फिलहाल 71 बच्चे हैं। इन बच्चों की देखभाल अच्छे से की जा रही है और उनकी हर जरूरी सुख-सुविधा का ख्याल रखा जा रहा है। - हितेंद्र शर्मा, ज्वाइंट डॉयरेक्टर, महिला एवं बाल कल्याण विभाग।
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कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो किसी कारण से जन्म के बाद बच्चों को नहीं रखना चाहते हैं। ऐसे बच्चों के साथ कुछ गलत न हो इसके लिए महिला एवं बाल कल्याण विभाग ने विशेष योजना तैयार की है। विभाग ने प्रदेश में सात एडॉप्शन सेंटर बनाए हैं। इन सेंटरों पर विभाग ने पालने लगाए हैं। जो अपने बच्चों को नहीं पालना चाहते वे उनको विभाग द्वारा लगाए पालने में रख देते हैं। उसके बाद उन बच्चों का लालन-पालन विभाग द्वारा किया जाता है। बच्चों को गोद देने के बाद विभाग दो साल तक उसका फीडबैक लेता है। बच्चे का लालन-पालन नियमानुसार किया जा रहा है या नहीं, इसकी लगातार जानकारी रखी जाती है।
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इन जिलों में लगाए गए हैं पालने
महिला एवं बाल कल्याण विभाग ने प्रदेश के पंचकूला, कैथल, झज्जर, रेवाड़ी और फरीदाबाद में एक-एक सेंटर बनाया है। इसके अलावा हिसार में दो अडोप्शन सेंटर बनाए गए हैं। फिलहाल इन सभी सात सेंटरों में 71 बच्चों का लालन-पालन चल रहा है।
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बच्चों को ऐसे किया जाता है एडॉप्ट
बच्चे को गोद लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होता है। आवेदक को अपनी पूरी जानकारी अपलोड करनी होती है। इसके अलावा यह जानकारी भी देनी होती है कि उन्हें कितनी उम्र का बच्चा चाहिए। इसके अलावा बच्चे को लेकर अन्य जरूरी मांग भी अपलोड करनी होती है। उसके बाद जब उनका नंबर आता है तो विभाग द्वारा उनसे संपर्क किया जाता है।
कब कितने बच्चों को गोद दिया
वर्ष बच्चों की संख्या
2013-14 41
2014-15 34
2015-16 57
2016-17 54
2017-18 47
2018-19 62
2019-20 86
2020-21 37
2021-22 50
कुल 468
विभाग द्वारा महिलाओं और बच्चों के कल्याण के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। बच्चों को गोद दिए जाना भी इन्हीं में से एक है। विभाग ने प्रदेश में सात एडॉप्शन सेंटर बनाए हैं। विभाग के इन सेंटरों में फिलहाल 71 बच्चे हैं। इन बच्चों की देखभाल अच्छे से की जा रही है और उनकी हर जरूरी सुख-सुविधा का ख्याल रखा जा रहा है। - हितेंद्र शर्मा, ज्वाइंट डॉयरेक्टर, महिला एवं बाल कल्याण विभाग।