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यहां मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना, सावन के माह में रहता है गांव में उत्सव का माहौल, मुस्लिम भी करते हैं सहयोग

Tue, 19 Jul 2022 01:21 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Tue, 19 Jul 2022 01:21 AM IST
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Here religion does not teach to keep enmity among themselves, there is a festive atmosphere in the village in the month of Sawan, Muslims also cooperate
पंचकूला। उर्दू के जाने-माने शायर मोहम्मद इकबाल की लिखी पंक्तियां ‘मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना’ फिल्मों और भाषणों में कई बार सुनने को मिलती हैं। असल में इन पंक्तियों को पंचकूला के साथ लगते गांव महादेवपुर (सकेतड़ी के नाम से प्रसिद्ध) के लोग चरितार्थ कर रहे हैं। मुस्लिम बहुल गांव होने के बावजूद यहां के प्राचीन शिव मंदिर में धूमधाम से पूजा अर्चना होती है। अब भगवान शिव का सबसे प्रिय सावन का महीना चल रहा है। मंदिर के धार्मिक आयोजनों का लोग कभी विरोध नहीं करते बल्कि आयोजन में जो भी मदद चाहिए होती है, गांव के लोग करते हैं। यह गांव उन लोगों को भी आइना दिखाने का काम करता है जो धर्म के नाम पर जहर उगलते हैं।
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श्री शिव मंदिर नवदुर्गा चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रधान केडी शर्मा ने बताया कि देवों के देव महादेव के नाम पर बसे महादेवपुर गांव में रहने वाले सभी लोग मुस्लिम समुदाय के हैं। यहां बने भगवान शिव के मंदिर को सकेतड़ी के शिव मंदिर के नाम से जाना जाता है। यहां स्वयंभू शिवलिंग है। मान्यता है कि यह शिवलिंग पांडवों के समय से है। पिछले लगभग 50 साल से यहां पर श्रद्धालुओं की आस्था बनी हुई है और धीरे-धीरे यहां पर मंदिर भी बना दिया गया। हर साल मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था बढ़ती जा रही है।
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आज तक एक भी शिकायत नहीं
महादेवपुर गांव में लगभग 300 से 400 मकान हैं। गांव की आबादी 1200 से 1500 है। पूरी आबादी मुस्लिमों की है। जब भी मंदिर में कोई बड़ा आयोजन होता है तो प्रदेशभर से ही नहीं बल्कि पंजाब, हिमाचल और चंडीगढ़ से भी श्रद्धालु दर्शन करने के लिए गांव में आते हैं। भीड़ बढ़ने के कारण कई बार अव्यवस्था की स्थिति भी बन जाती है और गंदगी का आलम भी। मगर आज तक महादेवपुर के किसी भी व्यक्ति ने इसकी कोई शिकायत नहीं की है।
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मंदिर गांव की और गांव मंदिर की मदद करता है
दूध का काम करने वाले गांव महादेवपुर निवासी मेहरदीन ने कहा कि जब हमें जरूरत होती है तो मंदिर मदद करता है। जब मंदिर को हमारी जरूरत होती है तो हम भी हमेशा तैयार रहते हैं। हमें समझ नहीं आता कि हिंदू-मुसलमान को लोग दुश्मन की तरह क्यों प्रस्तुत करते हैं। हमारे यहां दोनों ही समुदायों के लोग आपस में भाइयों की तरह रहते हैं।
चंदा मांगने बाहर नहीं जाता ट्रस्ट
केडी शर्मा ने बताया कि मंदिर की दान पर्ची की बुकलेट कभी मंदिर से बाहर नहीं जाती है। जिसको दान करना होता है वो मंदिर में ही आकर करता है। मंदिर में किसी भी दानवीर का नाम नहीं लिखा जाता है। उन्होंने बताया कि मंदिर में आने वाले चंदे के एक-एक रुपये का हिसाब रखा जाता है। इसके लिए सीए भी रखा गया है।

महादेवपुर में भगवान भोलेनाथ का मंदिर है और ये पूरा गांव मुस्लिम समुदाय का है। मगर यहां किसी के बीच कोई मतभेद नहीं है। मंदिर के आयोजनों में भी महादेवपुर के लोग बढ़ चढ़कर का सहयोग करते हैं। - नरेंद्रपाल लुभाना, पार्षद, वार्ड-1
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