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हर घर नल से जल योजना : पानी से ज्यादा बहता है पसीना, उसमें भी पनपता है डेंगू

Sat, 13 Aug 2022 01:33 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sat, 13 Aug 2022 01:33 AM IST
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Har Ghar Nal Se Jal Yojana: Sweat flows more than water, dengue also flourishes in it
पंचकूला। सुबह नींद में ही बाल्टी लेकर दौड़ना, दिनभर इंतजार और शाम तक केवल एक -दो बाल्टी पानी लेकर संतोष करना ही कालका के खेड़ा सीताराम के लोगों की नियति बन गई है। समस्या यहीं खत्म नहीं होती है। कुछ क्षेत्रों में पाइप की लाइन इतनी छोटी है कि यहां तक केवल दो से पांच मिनट ही पानी पहुंच पाता है। हताश लोग पानी के लिए करीब दो किलोमीटर दूर स्थित सेंट्रल गुरुद्वारा जाते हैं। इसके अलावा गंदे बावड़ी और अन्य स्रोतों से पानी जमा करते हैं।
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ऐसे में इकट्ठा किए पानी में डेंगू के मच्छर पनप जाते हैं। वर्तमान में यह क्षेत्र डेंगू की चपेट में है। सरकार की महत्वाकांक्षी योजना हर घर नल से जल योजना सरकारी उदासीनता के कारण अनियमितताओं की भेंट चढ़ गई है। अब यहां के लोगों का धैर्य जवाब देने लगा है। पूरे कालका में 24 घंटे में लोगों को महज 20 मिनट ही जलापूर्ति होती है। इसका खुलासा अमर उजाला के रियलिटी चेक में हुआ है। यहां के करीब 4000 लोग पेयजल की समस्या से जूझ रहे हैं। पानी से ज्यादा लोग सुबह से शाम तक पसीना बहा देते हैं।
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कई लोग हैं डेंगू के शिकार
कालका खेड़ा सीताराम में अब तक करीब 25 लोग डेंगू के शिकार हो चुके हैं। वजह पानी स्टोर करना है। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्या करें। जीने के लिए पानी जरूरी है। बिना जल के जीवन संभव नहीं है। स्थानीय लोगों की माने तो कई दिन तो ऐसे होते हैं कि प्यास से हलक सूखने लगता है तो मजबूरन मार्केट से पानी खरीदकर पीना पड़ता है।
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यहां हालात इतने खराब हैं कि घर का एक सदस्य पूरे दिन पानी के इंतजार में बैठा रहता है। 5 से 10 मिनट तक मिलने वाले पानी का कोई समय सीमा निर्धारित नहीं है।
बरसाती नाले में नहाते और धोते हैं कपड़े
हरिपुर बाबा स्थान के पास पानी की बहुत किल्लत है। लोगों को हाथ-मुंह धोने से लेकर कपड़ा धोने और नहाने के लिए बरसाती नाले का गंदा पानी इस्तेमाल करना पड़ता है। यहां के स्थानीय बुजुर्ग कृष्ण कुमार बताते हैं कि 1975 से यहां बसा हूं। पहले बावड़ी के प्राकृतिक पानी से काम चल जाता था। अब बावड़ी गंदी हो चुकी है। अब बरसाती नाले के पानी का सहारा है।
मेरा घर सबसे लास्ट में है। वहां तक तो पानी का पाइप लाइन भी नहीं पहुंच पाया है। मेरे घर से चंद कदमों की दूरी पर पानी का एक इंच का पाइप लाइन है, यहां 24 घंटे में महज एक से दो बाल्टी पानी ही मिल पाता है। ऐसे में बरसाती नाले के पानी से काम चलाना पड़ता है। - रचना, निवासी खेड़ासीता राम कालका।
किल्लत होने की वजह से पानी स्टोर करना पड़ता है। इस कारण डेंगू के मच्छर पनपते हैं। एक सप्ताह से मैं बीमार था। डेंगू की वजह से प्लेटलेट्स 13 हजार पहुंच गया। बड़ी मुश्किल से बच पाया हूं। सेक्टर-6 के नागरिक अस्पताल में मेरा इलाज चला। अब प्लेटलेट्स 60 हजार के करीब पहुंचा है तो थोड़ी बहुत राहत मिली है। क्या करें न नगर परिषद और ना ही प्रशासन हमारी मदद कर रहा है। जीने के लिए पानी मजबूरी में एकत्रित करना पड़ता है। - राज कुमार, स्थानीय निवासी।
पानी स्टोर करना हम लोगों की मजबूरी है। इस कारण कॉलोनी में अधिकतर लोग बीमार हैं। मुझे डेंगू हो गया था, एक माह से बीमार हूं। मेरा प्लेटलेट्स 27 हजार पहुंच गया था। सेक्टर-6 के नागरिक अस्पताल में कई दिनों तक दाखिल रही। अभी तक रिकवर नहीं कर पाई हूं। महज 45 हजार प्लेटलेट्स पहुंच पाया है। - रीता देवी, बीमार महिला।
रक्षाबंधन का त्योहार है, घर में एक बाल्टी तक पानी नहीं है। वीरवार को सेंट्रल गुरुद्वारा से पानी भरकर मंगवाया था। स्वास्थ्य विभाग की टीम जांच के लिए आई और ड्रम में भरे पानी को गिरा दिया। इस समय घर में पीने के लिए पानी तक नहीं है। बिना पानी के कैसे रहें। प्रशासन और नगर परिषद का इस तरफ ध्यान नहीं है। - तान्या, स्थानीय निवासी।
महज 5 से 10 मिनट जलापूर्ति होती है। परिवार में दस सदस्य हैं। पानी आने का समय भी तय नहीं है। मजबूरन पानी स्टोर करना पड़ता है। अगर पानी स्टोर करते हैं तो डेंगू का खतरा है। आखिर हम लोग क्या करें। पब्लिक हेल्थ के जेई से लेकर तमाम लोगों को अपनी समस्या बता चुके हैं। समाधान किसी ने नहीं किया। - संगीता, स्थानीय निवासी।

कालका के खेड़ा सीताराम में जलापूर्ति की समस्या है। यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। कहीं पेयजल की आपूर्ति नहीं हो रही है तो उसे जांच के बाद तत्काल सही करवाया जाएगा। - विकास लाठर, एक्सईएन पब्लिक हेल्थ।
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