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पूर्व उपमुख्यमंत्री चंद्रमोहन बोले- नेता या मंत्री की सहमति के बिना नहीं हो सकता निगम में घोटाला
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पंचकूला। नगर निगम में बड़े पैमाने पर गोलमाल हो रहा है। इसके लिए जिम्मेदार कौन है। जब तक किसी बड़े नेता या फिर मंत्री का आशीर्वाद प्राप्त नहीं होगा कोई अधिकारी या कर्मचारी गोलमाल नहीं कर सकता है। यह आरोप प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री चंद्रमोहन ने लगाए हैं। स्थानीय लेखा निदेशालय द्वारा जिस तरह नगर निगम में भ्रष्टाचार की परतें उजागर की गई हैं उससे मुख्यमंत्री मनोहर लाल का प्रदेश के लोगों को पारदर्शी प्रशासन देने और भ्रष्टाचार कम होने का दावा खोखला साबित हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में भ्रष्टाचार की गंगोत्री बह रही है। अभी हरियाणा लोक सेवा आयोग का प्रदेश के युवाओं के साथ नौकरी फार सेल देने का मामला ठंडा नहीं हुआ है। सरकार इस घोटाले को दबाने में लगी हुई है। इसी बीच पंचकूला नगर निगम का भ्रष्टाचार का मामला भी उजागर हो गया है। निगम में करोड़ों का घोटाला स्थानीय नेताओं की जानकारी के बिना नहीं हो सकता है। चंद्रमोहन ने कहा कि जिस बेरहमी से पंचकूला की गरीब जनता से टैक्स के रूप में एकत्रित पैसे को दोनों हाथों से लूटा गया है, इसका सरकार के पास कोई भी जवाब नहीं है।
लेखा विभाग की रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा
लेखा रिपोर्ट का उल्लेख कर उन्होंने कहा कि किस प्रकार से अपने चहेतों को 51 लाख 12 हजार रुपये का रात्रि शेल्टर बनाने के लिए बिना ई-टेंडर के चंडीगढ़ की एक फर्म को केवल कोटेशन के आधार पर ठेका दे दिया गया। इसी प्रकार 43 लाख 97 हजार रुपये का नुकसान ई-कार्ट के वारंटी समय से पहले हुए नुकसान के रूप में झेलना पड़ा है। भूमिगत केबल बिछाने के लिए भी मिलीभगत से 29 लाख 12 हजार रुपये की राशि कम वसूल की गई। चंद्रमोहन ने मांग की है कि इन सभी मामलों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो से करवाई जाए, ताकि लोगों के सामने काले कारनामों की सच्चाई सामने आ सके। इसके साथ ही उन्होंने मेयर से त्याग पत्र की भी मांग की है। उन्होंने कहा कि निगम के भ्रष्टाचार के बारे में एक ज्ञापन हरियाणा के राज्यपाल को भी सौंपा जाएगा और मांग की जाएगी कि इस मामले की सीबीआई से जांच करवाई जाए।
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लेखा विभाग की रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा
लेखा रिपोर्ट का उल्लेख कर उन्होंने कहा कि किस प्रकार से अपने चहेतों को 51 लाख 12 हजार रुपये का रात्रि शेल्टर बनाने के लिए बिना ई-टेंडर के चंडीगढ़ की एक फर्म को केवल कोटेशन के आधार पर ठेका दे दिया गया। इसी प्रकार 43 लाख 97 हजार रुपये का नुकसान ई-कार्ट के वारंटी समय से पहले हुए नुकसान के रूप में झेलना पड़ा है। भूमिगत केबल बिछाने के लिए भी मिलीभगत से 29 लाख 12 हजार रुपये की राशि कम वसूल की गई। चंद्रमोहन ने मांग की है कि इन सभी मामलों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो से करवाई जाए, ताकि लोगों के सामने काले कारनामों की सच्चाई सामने आ सके। इसके साथ ही उन्होंने मेयर से त्याग पत्र की भी मांग की है। उन्होंने कहा कि निगम के भ्रष्टाचार के बारे में एक ज्ञापन हरियाणा के राज्यपाल को भी सौंपा जाएगा और मांग की जाएगी कि इस मामले की सीबीआई से जांच करवाई जाए।
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