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दोस्त बन गए धोखेबाज, नई पार्टी बनाने को सुखदेव ढींढसा ने मुझसे न पूछा न सलाह लीः ब्रह्मपुरा
Thu, 09 Jul 2020 11:07 AM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Thu, 09 Jul 2020 11:07 AM IST
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रंजीत सिंह ब्रह्मपुरा
- फोटो : फाइल फोटो
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अकाली दल टकसाली के प्रधान रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा ने कहा है, नई पार्टी बनाने के बारे में सुखदेव सिंह ढींढसा ने न तो मुझसे कोई सलाह की और न ही इस बारे में मुझसे कुछ पूछा था, जबकि मैंने तो उन्हें पहले ही प्रधानगी की पेशकश की थी।
बुधवार को चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत में ब्रह्मपुरा ने कहा- मैंने तो प्रधानगी की पेशकश करते हुए कोई शर्त भी नहीं रखी थी, फिर ढींढसा ने नई पार्टी क्यों बनाई, मुझे समझ नहीं आ रहा। मुझे सुनने में आया है कि ढींढसा को शायद टकसाली शब्द से कोई एतराज था, लेकिन काफी पुराने कांग्रेसी भी अपने आप को टकसाली कांग्रेसी कहलाते हैं और अगर लोग उन्हें वोट डाल सकते हैं तो हमें वोट क्यों नहीं डालेंगे?
ब्रह्मपुरा ने आगे कहा, जब मैंने अकाली दल टकसाली का गठन किया तो कुछ लोगों ने मुझे आकर कहा कि ढींढसा को प्रधान बनाया जाए और पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि ढींढसा कह रहे हैं कि वे सीनियर हैं। ब्रह्मपुरा ने कहा- जितनी जेलों की सजाएं मैंने काटी हैं और जितने चुनाव मैंने जीते हैं, मेरे मुकाबले ढींढसा ने न तो चुनाव जीते होंगे और न ही जेलों की सजाएं काटी होंगी।
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लेकिन मैं फिर भी उन्हें सम्मान देते हुए पार्टी प्रधान बनाने की पेशकश की थी। उन्होंने कहा- जो नेता चले गए, उनकी मरजी लेकिन अकाली दल टकसाली कायम है, जिसकी कोर कमेटी समेत अन्य जत्थेबंधक ढांचा बन चुका है और जिसका काम जारी रहेगा। ब्रह्मपुरा ने कहा कि हरसुखिंदर सिंह बब्बी बादल अभी बच्चे हैं। उनके बारे नहीं पता कि वे आगे जाकर क्या करेंगे।
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बुधवार को चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत में ब्रह्मपुरा ने कहा- मैंने तो प्रधानगी की पेशकश करते हुए कोई शर्त भी नहीं रखी थी, फिर ढींढसा ने नई पार्टी क्यों बनाई, मुझे समझ नहीं आ रहा। मुझे सुनने में आया है कि ढींढसा को शायद टकसाली शब्द से कोई एतराज था, लेकिन काफी पुराने कांग्रेसी भी अपने आप को टकसाली कांग्रेसी कहलाते हैं और अगर लोग उन्हें वोट डाल सकते हैं तो हमें वोट क्यों नहीं डालेंगे?
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ब्रह्मपुरा ने आगे कहा, जब मैंने अकाली दल टकसाली का गठन किया तो कुछ लोगों ने मुझे आकर कहा कि ढींढसा को प्रधान बनाया जाए और पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि ढींढसा कह रहे हैं कि वे सीनियर हैं। ब्रह्मपुरा ने कहा- जितनी जेलों की सजाएं मैंने काटी हैं और जितने चुनाव मैंने जीते हैं, मेरे मुकाबले ढींढसा ने न तो चुनाव जीते होंगे और न ही जेलों की सजाएं काटी होंगी।
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लेकिन मैं फिर भी उन्हें सम्मान देते हुए पार्टी प्रधान बनाने की पेशकश की थी। उन्होंने कहा- जो नेता चले गए, उनकी मरजी लेकिन अकाली दल टकसाली कायम है, जिसकी कोर कमेटी समेत अन्य जत्थेबंधक ढांचा बन चुका है और जिसका काम जारी रहेगा। ब्रह्मपुरा ने कहा कि हरसुखिंदर सिंह बब्बी बादल अभी बच्चे हैं। उनके बारे नहीं पता कि वे आगे जाकर क्या करेंगे।
दोस्त धोखेबाज हो गए : ब्रह्मपुरा
पत्रकारों से बातचीत के दौरान भावुक हुए रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा ने कहा- कोरोना का कहर जारी है लेकिन लोग अब भी परमात्मा से नहीं डरते और कई लोगों ने धर्म का झूठा बाना पहन रखा है। मुझे दुख हैं कि दोस्त ही धोखेबाज हो गए, लेकिन आने वाला समय तय करेगा कि लोग किसे मंजूर करते हैं और किसे नहीं। अकाली दल टकसाली ऐसे ही चलता रहेगा।
ब्रह्मपुरा मेरे भाई हैं, जो चाहे कह लें : ढींढसा
सुखदेव सिंह ढींढसा से जब ब्रह्मपुरा के बयान पर प्रक्रिया चाही गई तो उन्होंने कहा- मुझे प्रधानगी की पेशकश की गई थी लेकिन मैं साफ कर दिया था कि मेरे वर्कर नहीं मान रहे। ब्रह्मपुरा मेरे भाई हैं, जो मरजी कह लें लेकिन मैं कोई टिप्पणी नहीं करुंगा। फिर भी अच्छा होगा कि वे गुस्सा छोड़कर मेरे साथ मिलकर वे लड़ाई लड़ें, जिसकी बात वे पहले से साझा करते रहे हैं। मिल बैठकर हर मसला हल हो सकता है।
सुखदेव ढींढसा लोकतांत्रिक मानदंडों का सम्मान करें : शिअद
शिरोमणि अकाली दल ने बुधवार को नई अकाली दल (डेमोक्रेटिक) जत्थेबंदी के नेता सुखदेव सिंह ढींढसा से कहा कि वे लोकतांत्रिक मानदंडों का सम्मान करें और झूठे दावे करने से परहेज करें। यह उनके कद को शोभा नहीं देता, यहां तक कि अकाली दल (टकसाली) के अध्यक्ष रंजीत सिंह ब्रहमपुरा को अपमानित करने के लिए उनकी आलोचना की।
व
रिष्ठ अकाली नेता जिसमें सांसद बलविंदर सिंह भूंदड़ तथा पूर्व मंत्री जत्थेदार तोता सिंह ने कहा कि ढींढसा को पता है कि राजनीतिक दल कैसे काम करते हैं और झूठे दावों से लोगों को गुमराह करने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए। सुखदेव सिंह ढींढसा अपनी ही पार्टी के प्रतिनिधि नहीं हैं, जिसमें से उन्हें निष्कासित कर दिया गया था। ढींढसा ने पिछले साल अकाली दल के पार्टी सदस्यता अभियान में भी भाग नहीं लिया था।
ब्रह्मपुरा मेरे भाई हैं, जो चाहे कह लें : ढींढसा
सुखदेव सिंह ढींढसा से जब ब्रह्मपुरा के बयान पर प्रक्रिया चाही गई तो उन्होंने कहा- मुझे प्रधानगी की पेशकश की गई थी लेकिन मैं साफ कर दिया था कि मेरे वर्कर नहीं मान रहे। ब्रह्मपुरा मेरे भाई हैं, जो मरजी कह लें लेकिन मैं कोई टिप्पणी नहीं करुंगा। फिर भी अच्छा होगा कि वे गुस्सा छोड़कर मेरे साथ मिलकर वे लड़ाई लड़ें, जिसकी बात वे पहले से साझा करते रहे हैं। मिल बैठकर हर मसला हल हो सकता है।
सुखदेव ढींढसा लोकतांत्रिक मानदंडों का सम्मान करें : शिअद
शिरोमणि अकाली दल ने बुधवार को नई अकाली दल (डेमोक्रेटिक) जत्थेबंदी के नेता सुखदेव सिंह ढींढसा से कहा कि वे लोकतांत्रिक मानदंडों का सम्मान करें और झूठे दावे करने से परहेज करें। यह उनके कद को शोभा नहीं देता, यहां तक कि अकाली दल (टकसाली) के अध्यक्ष रंजीत सिंह ब्रहमपुरा को अपमानित करने के लिए उनकी आलोचना की।
व
रिष्ठ अकाली नेता जिसमें सांसद बलविंदर सिंह भूंदड़ तथा पूर्व मंत्री जत्थेदार तोता सिंह ने कहा कि ढींढसा को पता है कि राजनीतिक दल कैसे काम करते हैं और झूठे दावों से लोगों को गुमराह करने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए। सुखदेव सिंह ढींढसा अपनी ही पार्टी के प्रतिनिधि नहीं हैं, जिसमें से उन्हें निष्कासित कर दिया गया था। ढींढसा ने पिछले साल अकाली दल के पार्टी सदस्यता अभियान में भी भाग नहीं लिया था।
एआईएसएसएफ और अकाली दल-1920 का ढींढसा को समर्थन
राज्यसभा सदस्य और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुखदेव सिंह ढींढसा द्वारा शिरोमणि अकाली दल (डेमोक्रेटिक) के गठन का एलान किए जाने के बाद बुधवार को चंडीगढ़ में उनसे मिलने वालों का तांता लगा रहा। उनसे मिलने पहुंचे आल इंडिया सिख स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआईएसएसएफ) के नेताओं और शिरोमणि अकाली दल-1920 के प्रधान और राज्य के पूर्व स्पीकर रविइंदर सिंह ने ढींढसा की नई पार्टी को समर्थन देने का एलान किया।
इस मौके पर रविइंदर सिंह ने कहा कि समान विचारधारा की पार्टियों के सहयोग से बादल परिवार से शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, शिरोमणि अकाली दल और श्री अकाल तख्त साहिब को आजाद कराने के बाद सिख कौम को समर्पित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रकाश सिंह बादल ने 1978 से पार्टी को ध्वस्त करना शुरू किया जो अब तक जारी है। उन्होंने कहा कि उनसे गुरु घर और सिखों की मिनी संसद एसजीपीसी को मुक्त कराना जरूरी है, क्योंकि उन्होंने इन्हें घपलों का स्थान बना दिया है।
रविइंदर सिंह ने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी बादल सरकार के समय हुई, दो सिख नौजवान पुलिस गोली से शहीद हुए लेकिन इंसाफ की जगह वोटों के लिए राम रहीम के आगे घुटने टेकते हुए उसे बिना पेशी ही जत्थेदारों से माफी दिलवाई गई। रविइंदर सिंह ने दावा किया कि सभी पंथक संगठनों को साथ लेकर साझा फ्रंट सिख कौम के हितों के लिए बनाया जाएगा।
उन्होंने बादल दल में बैठे अन्य अकाली नेताओं और वर्करों से भी अपील की कि वे अकाली दल और शिरोमणि कमेटी को आजाद कराने के लिए आगे आएं। ढींढसा के घर पहुंचे अकाली दल टकसाली के नेता गुरसेव सिंह हरपालपुर और फेडरेशन के सदस्यों ने ढींढसा को बधाई दी। इस मौके पर हरपालपुर ने कहा कि अब समय आ गया है कि रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा भी अपना दल भंग करके ढींढसा के साथ मिलकर नए दल की अगुवाई करें। उन्होंने कहा कि हम सभी अकाली दल के वारिस हैं और ढींढसा को आगे करके पंथक संस्थाओं और अकाली दल को दोबारा पुरानी ऊंचाइयों पर ले जाने के उपाय कर रहे हैं।
इस मौके पर रविइंदर सिंह ने कहा कि समान विचारधारा की पार्टियों के सहयोग से बादल परिवार से शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, शिरोमणि अकाली दल और श्री अकाल तख्त साहिब को आजाद कराने के बाद सिख कौम को समर्पित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रकाश सिंह बादल ने 1978 से पार्टी को ध्वस्त करना शुरू किया जो अब तक जारी है। उन्होंने कहा कि उनसे गुरु घर और सिखों की मिनी संसद एसजीपीसी को मुक्त कराना जरूरी है, क्योंकि उन्होंने इन्हें घपलों का स्थान बना दिया है।
रविइंदर सिंह ने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी बादल सरकार के समय हुई, दो सिख नौजवान पुलिस गोली से शहीद हुए लेकिन इंसाफ की जगह वोटों के लिए राम रहीम के आगे घुटने टेकते हुए उसे बिना पेशी ही जत्थेदारों से माफी दिलवाई गई। रविइंदर सिंह ने दावा किया कि सभी पंथक संगठनों को साथ लेकर साझा फ्रंट सिख कौम के हितों के लिए बनाया जाएगा।
उन्होंने बादल दल में बैठे अन्य अकाली नेताओं और वर्करों से भी अपील की कि वे अकाली दल और शिरोमणि कमेटी को आजाद कराने के लिए आगे आएं। ढींढसा के घर पहुंचे अकाली दल टकसाली के नेता गुरसेव सिंह हरपालपुर और फेडरेशन के सदस्यों ने ढींढसा को बधाई दी। इस मौके पर हरपालपुर ने कहा कि अब समय आ गया है कि रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा भी अपना दल भंग करके ढींढसा के साथ मिलकर नए दल की अगुवाई करें। उन्होंने कहा कि हम सभी अकाली दल के वारिस हैं और ढींढसा को आगे करके पंथक संस्थाओं और अकाली दल को दोबारा पुरानी ऊंचाइयों पर ले जाने के उपाय कर रहे हैं।