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पीजीआई ने अध्ययन से किया साबित: बढ़ता ब्लड शुगर और अधिक मात्रा में स्टेरॉयड देने से पांव पसार रहा ब्लैक फंगस

Sun, 06 Jun 2021 08:33 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Sun, 06 Jun 2021 08:33 AM IST
सार

पीजीआई के माइक्रोबायलॉजी विभाग के प्रमुख प्रो. अरुणालोक चक्रवर्ती के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन को इमर्जिंग इंफेक्शियस डिजीज जरनल में प्रकाशित किया गया है।

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Black fungus spreading due to high blood sugar and giving steroids in excess
पीजीआई चंडीगढ़

विस्तार

पीजीआई के विशेषज्ञों ने कोरोना महामारी के साथ तेजी से बढ़ते ब्लैक फंगस के कारणों की खोज करने में सफलता हासिल कर ली है। सितंबर से दिसंबर 2020 तक देश के 16 केंद्रों में भर्ती ब्लैक फंगस के मरीजों पर किए अध्ययन से इसके कारणों का खुलासा हुआ है। इसमें पता चला है कि बढ़ता हुआ ब्लड शुगर और ज्यादा मात्रा में दिया गया स्टेरॉयड इस मर्ज को तेजी से बढ़ा रहा है।

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एक साल में मरीजों की संख्या में 2.1 गुना का इजाफा
प्रो. अरुणालोक चक्रवर्ती ने बताया कि देश में 2019 और 2020 के बीच मिले मरीजों में 2.1 गुना वृद्धि दर दर्ज की गई है। इसके कारण इसकी भयावहता का अनुमान लगाते हुए इसके वास्तविक कारणों की खोज जरूरी हो गई। इसलिए पीजीआई ने उस दौरान देश के जिन केंद्रों पर ब्लैक फंगस के मरीज मिलते गए उन्हें अध्ययन में शामिल कर इसके कारणों की पड़ताल शुरू की। इसके तहत एक सितंबर से 31 दिसंबर 2020 के बीच मिले मरीजों पर अध्ययन किया गया।
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अध्ययन में यह बात सामने आई कि कोरोना संक्रमित सामान्य मरीजों में इसका संक्रमण 0.27 प्रतिशत और आईसीयू में भर्ती संक्रमित मरीज में 2.1 प्रतिशत पाया गया। वहीं सामान्य मरीजों में संक्रमण के 18वें दिन के बाद इसके लक्षण सामने आए।

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आंखों पर सबसे ज्यादा खतरा

अध्ययन से मिले परिणाम में मरीजों की आंखों पर 58 प्रतिशत, नाक, आंख और दिमाग पर 27 प्रतिशत और फेफड़ों पर 9 प्रतिशत असर पड़ा। यह बात भी सामने आई कि मर्ज के लक्षण आने के बावजूद इलाज में देरी से संक्रमण मस्तिष्क तक पहुंचा। प्रो. चक्रवर्ती का कहना है कि इस बीमारी में इलाज में देरी मौत का कारण बन सकती है, इसलिए लक्षण दिखते ही तत्काल इलाज शुरू करवाएं।

ब्लड शुगर और स्टेरॉयड पर नियंत्रण से ही बचाव संभव
प्रो. चक्रवर्ती ने बताया कि अध्ययन के दौरान सामने आए तथ्यों से यह बात साफ हो चुकी है कि अनियंत्रित ब्लड शुगर और ज्यादा मात्रा में दिया गया स्टेरॉयड इसका मुख्य कारण है। ऐसे में जरूरी है कि कोरोना के सभी मरीजों को स्टेरॉयड की डोज न दी जाए। वहीं, डॉक्टर मरीजों को तय मात्रा में सिर्फ 10 दिनों तक ही स्टेरॉयड दें न कि 30 दिनों तक। प्रो. चक्रवर्ती का कहना है कि ज्यादा मात्रा में स्टेरॉयड देने के बजाय मरीज को वेंटिलेटर या अन्य साधनों से सुरक्षित करने का प्रयास होना चाहिए।

मृतकों में 54 साल से अधिक उम्र के मरीज ज्यादा
अध्ययन से यह भी साबित हुआ है कि ब्लैग फंगस का खतरा 54 साल से अधिक उम्र के मरीजों में ज्यादा है। अध्ययन के दौरान इससे होने वाली मौतों में 6 सप्ताह के दौरान 38.3 फीसदी और 12 सप्ताह के बाद 45.7 फीसदी दर्ज की गई है। यह भी साबित हुआ है कि 54 साल के ज्यादा उम्र के जो कोरोना संक्रमित होकर आईसीयू में भर्ती हुए उन्हें ब्लैक फंगस होने के बाद मौत का जोखिम अधिक था।

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