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चंडीगढ़: बिना व्यवस्था 178 कर्मचारियों को निकाला, घर में हुआ प्रसव, जिम्मेदार कौन?

Sun, 07 Nov 2021 01:27 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Sun, 07 Nov 2021 01:27 AM IST
सार

मानक के अनुसार, एएनएम के क्षेत्र में घर पर प्रसव होने पर संबंधित एएनएम को दोषी ठहराया जाता है। उस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए उसे कार्रवाई की जद में लाया जाता है। मामले में जांच कमेटी गठित की जाती है। वहीं, घर में बच्चे का जन्म होने पर उसका जन्म प्रमाणपत्र बनवाने में भी काफी मुश्किलें आती हैं।

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Woman gave birth to a child at home after returning from the hospital in Chandigarh
घर में महिला ने बच्चे को दिया जन्म - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

स्वास्थ्य विभाग ने 178 एनएचएम कर्मचारियों को नौकरी से तो निकाल दिया लेकिन वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की। अब इसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है। एक ओर जहां शहर के आधा दर्जन स्वास्थ्य केंद्रों पर टीकाकरण ठप होने की शिकायत सामने आ रही है, वहीं चंडीगढ़ जैसे शहर में एक परिवार को मजबूरन घर में प्रसव कराना पड़ा।

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स्वास्थ्य विभाग की ओर से अचानक एनएचएम कर्मचारियों को निकालने के निर्णय से व्यवस्था चरमरा गई है। जिन कर्मचारियों को नौकरी से निकाला गया है, उनमें लगभग 40 एएनएम भी शामिल हैं। उनके नौकरी से निकाले जाने के बाद उनकी तैनाती वाले केंद्रों पर कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने से भारी परेशानी हो रही है। लोगों को कहना है कि इस स्थिति के लिए सीधे तौर पर स्वास्थ्य अधिकारी दोषी हैं।
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जीएमएसएच-16 में नहीं किया भर्ती, मजबूरन घर लौटी गर्भवती, दिया बच्चे को जन्म
धनास के मकान नंबर 1572/ सी निवासी ज्योति को 31 अक्तूबर को प्रसव पीड़ा हुई तो उनके पति हरकेश उन्हें लेकर सुबह 4 बजे जीएमएसएच-16 पहुंचे। इमरजेंसी में तीन घंटे प्रसव पीड़ा झेलने के बावजूद किसी स्वास्थ्यकर्मी ने उन्हें अटेंड नहीं किया। इसके बाद मजबूरन हरकेश ज्योति को लेकर घर लौट आए। घर आने के महज एक घंटे के अंदर ही ज्योति ने बच्चे को जन्म दिया। इस दौरान आसपास की महिलाओं ने मदद की और अपनी सूझबूझ से मां और बच्चे की जान बचाने में मदद की।
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डीसी रेट के मानकों के पालन का दबाव बनाए जाने पर की थी हड़ताल
पूर्व स्वास्थ्य निदेशक डॉ. अमनदीप कौर के कार्यकाल में एनएचएम कर्मचारियों को डीसी रेट के बराबर वेतन भुगतान की स्वीकृति दी गई थी लेकिन उनके सेवानिवृत्त होने के बाद उस आदेश में हेरफेर करने की रणनीति बनने लगी। 26 अक्तूबर को आदेश जारी कर कर्मचारियों पर डीसी रेट के मानकों का पालन करने के लिए दबाव बनाया गया, जिसके विरोध में एनएचएम कर्मचारियों ने 24 घंटे पहले सूचना देने के बाद 28 अक्तूबर से हड़ताल शुरू कर दी।

हड़ताल के पहले ही दिन स्वास्थ्य सचिव ने 178 कर्मचारियों पर अनुशासनहीनता का आरोप लगाते हुए उन्हें नौकरी से निकालने का आदेश जारी कर दिया। 10 दिनों बाद भी निकाले गए कर्मचारियों के तैनाती स्थल पर वैकल्पिक कर्मचारियों की व्यवस्था नहीं की गई है। इससे लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।


इन केंद्रों पर टीकाकरण ठप
धनास, दरिया, मौली गांव, खुड्डा अलीशेर, खुड्डा लाहौरा, सारंगपुर
 

जीएमएसएच-16 के स्त्रीरोग विभाग में कर्मचारियों की कमी दूर कर दी गई है। वहां से गर्भवती को बिना परामर्श लौटाने का आरोप निराधार है। जहां तक टीकाकरण न होने की बात है तो सभी केंद्रों पर वैक्सीनेटर तैनात हैं, जो प्रतिदिन वहां टीका लगा रहे हैं। -डॉ. सुमन सिंह, स्वास्थ्य निदेशक

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