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सैकड़ों जेबीटी से होगी एरियर की रिकवरी
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चंडीगढ़। हरियाणा स्कूल शिक्षा विभाग सैकड़ों जेबीटी से एरियर की रिकवरी करने जा रहा है। साथ ही वेतन का एरियर देने वाले डीडीओ यानि आहरण एवं वितरण अधिकारी भी नपेंगे। ये जेबीटी वरिष्ठता व अन्य लाभ के ही पात्र थे, लेकिन इन्हें तदर्थ सेवा अवधि के वेतन का एरियर भी पक्का होने पर दे दिया गया। 2019 के मोहिनी एवं अन्य के मामले में हाईकोर्ट के फैसले को लागू करने के लिए निदेशक मौलिक शिक्षा ने सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को कार्रवाई के आदेश जारी कर दिए हैं।
पंचकूला, झज्जर व फतेहाबाद जिलों को छोड़कर सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को एरियर की रिकवरी करने के साथ ही वेतन का एरियर देने वाले डीडीओ के नाम निदेशालय को भेजने होंगे। निदेशक ने कहा है कि 2019 के फैसले पर अमल के लिए तीन मार्च 2020 को आदेश जारी किए गए थे, लेकिन अभी तक उन पर कार्रवाई नहीं हुई। इसलिए तत्काल कार्रवाई कर रिपोर्ट भेजें। जिन चयनित उम्मीदवारों को उनके कनिष्ठ के बाद नियुक्ति प्राप्त हुई थी, उन्हें कनिष्ठ के बराबर ही वेतन दिया जाना था। यदि किसी वरिष्ठ उम्मीदवार की नियुक्ति के बाद वेतन निर्धारण में देरी हुई है तो वर्तमान व नए वेतनमान में आए अंतर का एरियर ही उसे मिलना था। निदेशक ने कहा कि कुछ उम्मीदवार लोअर मैरिट में आने पर तदर्थ सेवा के कारण नॉन ज्वाइनिंग रिपोर्ट के आधार पर नियमित हो गए थे। बाद में ये हाईकोर्ट चले गए, लेकिन उनकी तदर्थ सेवा को न्यायालय ने नियमित सेवा नहीं माना। इन जेबीटी को कुछ डीडीओ ने नियमित मानते हुए वेतन निर्धारण कर एरियर का लाभ दिया है। इसलिए 19 जिलों के डीईईओ निदेशालय के निर्देशों के विरुद्घ एरियर प्रदान करने वाले अधिकारियों के नाम भेजें ताकि उनके खिलाफ नियम-7 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सके।
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पंचकूला, झज्जर व फतेहाबाद जिलों को छोड़कर सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को एरियर की रिकवरी करने के साथ ही वेतन का एरियर देने वाले डीडीओ के नाम निदेशालय को भेजने होंगे। निदेशक ने कहा है कि 2019 के फैसले पर अमल के लिए तीन मार्च 2020 को आदेश जारी किए गए थे, लेकिन अभी तक उन पर कार्रवाई नहीं हुई। इसलिए तत्काल कार्रवाई कर रिपोर्ट भेजें। जिन चयनित उम्मीदवारों को उनके कनिष्ठ के बाद नियुक्ति प्राप्त हुई थी, उन्हें कनिष्ठ के बराबर ही वेतन दिया जाना था। यदि किसी वरिष्ठ उम्मीदवार की नियुक्ति के बाद वेतन निर्धारण में देरी हुई है तो वर्तमान व नए वेतनमान में आए अंतर का एरियर ही उसे मिलना था। निदेशक ने कहा कि कुछ उम्मीदवार लोअर मैरिट में आने पर तदर्थ सेवा के कारण नॉन ज्वाइनिंग रिपोर्ट के आधार पर नियमित हो गए थे। बाद में ये हाईकोर्ट चले गए, लेकिन उनकी तदर्थ सेवा को न्यायालय ने नियमित सेवा नहीं माना। इन जेबीटी को कुछ डीडीओ ने नियमित मानते हुए वेतन निर्धारण कर एरियर का लाभ दिया है। इसलिए 19 जिलों के डीईईओ निदेशालय के निर्देशों के विरुद्घ एरियर प्रदान करने वाले अधिकारियों के नाम भेजें ताकि उनके खिलाफ नियम-7 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सके।
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