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Panchkula News: आनंद कारज एक्ट चंडीगढ़ में लागू, पंजाब में नहीं

Thu, 08 Jun 2023 10:56 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 08 Jun 2023 10:56 PM IST
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Anand Kaaraj Act applicable in Chandigarh, not in Punjab
पंजाब सरकार अब तक प्रारूप तैयार करने में व्यस्त
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राज्य में 2016 से एक्ट लागू करने पर चल रहा विचार
हरियाणा समेत देश के 22 राज्यों में लागू हो चुका है एक्ट
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। चंडीगढ़ प्रशासन ने वीरवार को शहर के सिखों को बड़ा तोहफा देते हुए आनंद कारज एक्ट-1909 लागू करने संबंधी नोटिफिकेशन जारी कर दिया लेकिन सिख समुदाय की वर्षों पुरानी मांग के बावजूद पंजाब में यह एक्ट अब तक लागू नहीं हो सका है। आनंद कारज एक्ट-1909 हरियाणा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, राजस्थान और दिल्ली सहित देश के 22 राज्यों में लागू किया जा चुका है।
गौरतलब है कि पंजाब में वर्ष 2016 में तत्कालीन अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार के समय आनंद कारज एक्ट अस्तित्व में आया था, लेकिन इसे ढंग से लागू नहीं किया जा सका। इसके बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार और उसके बाद चरणजीत सिंह चन्नी की सरकार भी इसे लागू नहीं कर सकी। मौजूदा भगवंत मान सरकार ने नवंबर 2022 में इसे राज्य में लागू करने का एलान किया था। राज्य सरकार ने आनंद कारज मैरिज एक्ट में संशोधन की तैयारी भी शुरू की लेकिन यह मामला अभी तक अधर में है।
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सिख समुदाय लंबे समय से उनके रीति-रिवाज के अनुसार विवाह के पंजीकरण की व्यवस्था की मांग करता रहा है। इस एक्ट के वजूद में आने से पहले सिखों के विवाह भी हिंदू मैरिज एक्ट के तहत ही रजिस्टर होते रहे हैं। इससे सिखों को सबसे बड़ी समस्या विदेश जाने के समय होती है, क्योंकि सिख दंपती को विदेश पहुंचते ही यह साबित करना होता है कि वह हिंदू दंपती हैं या सिख। इसके चलते 1909 के एक्ट में संशोधन तो किया गया लेकिन इसमें भी सिखों के लिए समस्या यह रही कि आनंद कारज एक्ट में विवाह उसी जगह पंजीकृत हो सकता है, जहां विवाह हुआ हो। इस तरह पंजाब में सिखों के लिए समस्या बनी रही, क्योंकि राज्य में आनंद कारज एक्ट लागू नहीं हो सका। जिन राज्यों में यह एक्ट लागू हो चुका हैं, वहां 7 हजार से अधिक विवाह पंजीकृत हो चुके हैं।
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2012 में संसद में पारित हुआ था विधेयक
हालांकि आनंद कारज अधिनियम-1909 में नोटिफाई हुआ था, लेकिन इसके तहत शादियों के पंजीकरण का कोई प्रावधान नहीं था और सिखों को हिंदू विवाह अधिनियम- 1955 के तहत ही अपने विवाह को पंजीकृत कराना होता था। 2012 में, संसद ने मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान आनंद कारज (संशोधन) विधेयक पारित किया। बजट सत्र में पारित विधेयक को उसी वर्ष 7 जून को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल की स्वीकृति भी दे दी, जिससे सिखों के लिए हिंदू विवाह अधिनियम के बजाय आनंद कारज अधिनियम के तहत अपने विवाह को पंजीकृत करने का मार्ग प्रशस्त हुआ।
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