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Panchkula News: पिस्टल के बल पर फार्च्यूनर लूट का आरोप नहीं हुआ साबित, तीन बरी
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छह साल पुराने मामले में अदालत ने कहा- पहचान और वारदात में संलिप्तता के पुख्ता साक्ष्य नहीं
हथियारों को भी लूट से नहीं जोड़ा जा सका, पहचान परेड नहीं कराई गई, अभियोजन पक्ष चश्मदीद गवाह भी पेश नहीं कर सका
माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। रैली मार्केट के बाहर पिस्टल के बल पर फार्च्यूनर कार लूटने के करीब छह साल पुराने मामले में जिला अदालत ने पंजाब निवासी तीन आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपियों की पहचान और वारदात में उनकी संलिप्तता को पुख्ता साक्ष्यों से साबित नहीं कर सका। बरामद हथियारों को भी लूट की वारदात से जोड़ने के पर्याप्त प्रमाण पेश नहीं किए गए। बरी किए गए आरोपियों में तरनतारन निवासी हरमनजीत सिंह (29) और फरीदकोट निवासी अमृतपाल सिंह (25) व अजय कुमार उर्फ मनी (26) शामिल हैं।
तीनों के खिलाफ सेक्टर-14 थाना पुलिस ने सुरेश कुमार की शिकायत पर 11 सितंबर 2020 को मामला दर्ज किया था। शिकायत के अनुसार सुरेश कुमार पंचकूला निवासी कुनाल गोयल की फार्च्यूनर कार का चालक था। घटना वाले दिन दोपहर करीब 3:30 बजे उसने रैली मार्केट के बाहर कार खड़ी की और टिश्यू पेपर लेने चला गया। करीब 10-15 मिनट बाद जब वह वापस लौटा तो चार युवक वहां पहुंचे। आरोप था कि एक युवक ने उसकी कनपटी पर पिस्टल तान दी और उसे कार से बाहर धक्का देकर तीन अन्य युवकों के साथ फार्च्यूनर लेकर फरार हो गया।
नशा तस्करी मामले में गिरफ्तारी के बाद सामने आए नाम
जांच के दौरान पंचकूला पुलिस को मोगा सीआईए से सूचना मिली कि अजय कुमार उर्फ मनी और अमृतपाल सिंह को नशा तस्करी के एक मामले में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में दोनों ने हरमनजीत सिंह उर्फ हरमन के साथ मिलकर फार्च्यूनर लूटने की बात कही थी। इसके बाद हरमनजीत को भी गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक मोगा के थाना मैहना में दर्ज एक अन्य मामले की जांच के दौरान फार्च्यूनर बरामद की गई थी। पंचकूला पुलिस ने तीनों आरोपियों को 3 दिसंबर 2020 को गिरफ्तार किया था।
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पहचान परेड नहीं हुई, चश्मदीद भी पेश नहीं कर सकी पुलिस
मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने आरोपियों के खिलाफ पेश किए गए साक्ष्यों पर सवाल उठाए। बचाव पक्ष ने दलील दी कि वारदात के समय शिकायत में किसी आरोपी का नाम दर्ज नहीं था। शिकायतकर्ता ने पहले चार युवकों और बाद में तीन आरोपियों का जिक्र किया। आरोपियों की पहचान के लिए टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड भी नहीं कराई गई। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि पुलिस अदालत में कोई चश्मदीद गवाह पेश नहीं कर सकी। अदालत ने मामले में पेश साक्ष्यों का मूल्यांकन करने के बाद अभियोजन पक्ष को आरोप साबित करने में असफल माना और तीनों आरोपियों को बरी करने का फैसला सुनाया।
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हथियारों को भी लूट से नहीं जोड़ा जा सका, पहचान परेड नहीं कराई गई, अभियोजन पक्ष चश्मदीद गवाह भी पेश नहीं कर सका
माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। रैली मार्केट के बाहर पिस्टल के बल पर फार्च्यूनर कार लूटने के करीब छह साल पुराने मामले में जिला अदालत ने पंजाब निवासी तीन आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपियों की पहचान और वारदात में उनकी संलिप्तता को पुख्ता साक्ष्यों से साबित नहीं कर सका। बरामद हथियारों को भी लूट की वारदात से जोड़ने के पर्याप्त प्रमाण पेश नहीं किए गए। बरी किए गए आरोपियों में तरनतारन निवासी हरमनजीत सिंह (29) और फरीदकोट निवासी अमृतपाल सिंह (25) व अजय कुमार उर्फ मनी (26) शामिल हैं।
तीनों के खिलाफ सेक्टर-14 थाना पुलिस ने सुरेश कुमार की शिकायत पर 11 सितंबर 2020 को मामला दर्ज किया था। शिकायत के अनुसार सुरेश कुमार पंचकूला निवासी कुनाल गोयल की फार्च्यूनर कार का चालक था। घटना वाले दिन दोपहर करीब 3:30 बजे उसने रैली मार्केट के बाहर कार खड़ी की और टिश्यू पेपर लेने चला गया। करीब 10-15 मिनट बाद जब वह वापस लौटा तो चार युवक वहां पहुंचे। आरोप था कि एक युवक ने उसकी कनपटी पर पिस्टल तान दी और उसे कार से बाहर धक्का देकर तीन अन्य युवकों के साथ फार्च्यूनर लेकर फरार हो गया।
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नशा तस्करी मामले में गिरफ्तारी के बाद सामने आए नाम
जांच के दौरान पंचकूला पुलिस को मोगा सीआईए से सूचना मिली कि अजय कुमार उर्फ मनी और अमृतपाल सिंह को नशा तस्करी के एक मामले में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में दोनों ने हरमनजीत सिंह उर्फ हरमन के साथ मिलकर फार्च्यूनर लूटने की बात कही थी। इसके बाद हरमनजीत को भी गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक मोगा के थाना मैहना में दर्ज एक अन्य मामले की जांच के दौरान फार्च्यूनर बरामद की गई थी। पंचकूला पुलिस ने तीनों आरोपियों को 3 दिसंबर 2020 को गिरफ्तार किया था।
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पहचान परेड नहीं हुई, चश्मदीद भी पेश नहीं कर सकी पुलिस
मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने आरोपियों के खिलाफ पेश किए गए साक्ष्यों पर सवाल उठाए। बचाव पक्ष ने दलील दी कि वारदात के समय शिकायत में किसी आरोपी का नाम दर्ज नहीं था। शिकायतकर्ता ने पहले चार युवकों और बाद में तीन आरोपियों का जिक्र किया। आरोपियों की पहचान के लिए टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड भी नहीं कराई गई। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि पुलिस अदालत में कोई चश्मदीद गवाह पेश नहीं कर सकी। अदालत ने मामले में पेश साक्ष्यों का मूल्यांकन करने के बाद अभियोजन पक्ष को आरोप साबित करने में असफल माना और तीनों आरोपियों को बरी करने का फैसला सुनाया।