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पूर्व केंद्रीय रेलमंत्री बोले- चंडीगढ़ प्रशासन ने कांग्रेस को मजदूरों का किराया जमा कराने को कहा था

Tue, 12 May 2020 12:34 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो रिशु राज सिंह, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Tue, 12 May 2020 12:34 PM IST
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Coronavirus, Lockdown, Migrant Workers, Congress, Former Rail Minister Pawan Bansal Interview
फाइल फोटो
करीब डेढ़ महीने से बंद ट्रेनों को रेलवे मंगलवार से आंशिक रूप से बहाल करने जा रहा है। शहर के पूर्व सांसद और पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री पवन बंसल ने सरकार के इस फैसले को सही ठहराया है। उनका कहना है कि ट्रेनें चलाने का फैसला सही है, लेकिन सरकार नीति को लेकर स्पष्ट नहीं है। उन्होंने बताया कि मजदूरों का खर्चा उठाने की कांग्रेस की घोषणा के बाद चंडीगढ़ प्रशासन की तरफ से पैसा जमा कराने को भी कहा गया था, बाद में कहा गया कि पैसा जमा करा दिया गया है। इसके अलावा उन्होंने शहर में प्रवासी मजदूरों को लेकर हो रही राजनीति पर भी अमर उजाला से खुलकर बातचीत की। पेश है बातचीत के कुछ अंश...
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सवाल: वर्तमान स्थिति को देखते हुए कुछ ट्रेन चलाने का फैसला कितना सही है?
जवाब:
केंद्र सरकार का ट्रेन चलाने का फैसला ठीक है। लॉकडाउन से देश को फायदा हुआ है, लेकिन यह कोरोना वायरस का इलाज नहीं है। भारत में अभी भी करीब 10 लाख लोगों की मौत टीबी के कारण हो जाती है। अन्य कई बीमारियों की वजह से लाखों लोगों की जान जा रही है। कोरोना वायरस की दवाई अभी तक बनी नहीं है। ऐसे में अब सावधानी के साथ ट्रेन चलाने का समय आ गया है।
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सवाल: रेलवे के वर्तमान इंफ्रास्ट्रक्चर को देखते हुए ट्रेन चलाना कितना व्यावहारिक है?
जवाब:
धीरे-धीरे ही ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जाएगी। कुछ बदलाव करने की जरूरत होगी। कम टिकटें दी जाएं। ट्रेन के डिब्बे के अंदर सोशल डिस्टेंसिंग की पालना की जानी चाहिए। इसलिए मिडिल बर्थ की सीट को फिलहाल के लिए रिजर्वेशन नहीं देनी चाहिए। समस्या यह भी है कि सरकार को पता ही नहीं है कि करना क्या है। प्रवासी मजदूर फंसे हुए हैं। पहले बसें चला दीं। कांग्रेस ने विरोध किया तो ट्रेनें चलाई गईं। सरकार की नीति स्पष्ट नहीं है।
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सवाल: प्रवासी मजदूरों पर शहर में काफी राजनीति हो रही है। यह कितना जायज है?
जवाब:
प्रवासी मजदूरों के नाम पर राजनीति किसी को नहीं करनी चाहिए। आपको जानकर हैरानी होगी कि पहले मेरे पार्टी के नेताओं ने मुझे बताया कि मजदूरों का खर्चा उठाने के एलान के बाद चंडीगढ़ प्रशासन की तरफ से कहा गया कि वह पैसा जमा करा दें। इसके बाद मैंने वित्त सचिव एके सिन्हा से बात की तो उन्होंने कहा कि हम कोई पैसा नहीं मांग रहे हैं। प्रशासन पहले ही पैसा जमा करा चुका है। इस पर पूछा कि फिर पहले पैसे किसकी तरफ से मांगे गए, इस पर कोई जवाब नहीं मिला। हालांकि, अब सुनने को आया है कि पूरा खर्चा प्रशासन ने उठाया है। भाजपा शासित राज्यों में मजदूरों से टिकट के पैसे मांगे गए हैं।

सवाल: संक्रमण को रोकने के लिए प्रशासन की तरफ से उठाए जा रहे प्रयास कितने ठीक हैं?
जवाब:
यह सही है कि कर्फ्यू को हटाने का समय आ गया था। लोगों को कुछ छूट देने की जरूरत थी, लेकिन शराब के ठेके खोलने की कोई आवश्यकता नहीं थी। मार्केट को ऑड-ईवन के हिसाब से खोलना भी सही है, यह सुझाव भी मैंने लिखकर प्रशासन को दिया था। केंद्र सरकार ने जिस तरह से बिना तैयारी के लॉकडाउन कर दिया। इसी तरह प्रशासन ने भी बिना किसी तैयारी के कर्फ्यू को हटा दिया। इसे चरणबद्ध तरीके से खोलना चाहिए था।

सवाल: कोरोना वायरस के बाद क्या रेलवे में अब व्यापक बदलाव करने की जरूरत होगी?
जवाब:
बदलाव तो जरूरी है। लोगों को भी अब अपने व्यवहार में बदलाव करने की जरूरत होगी। रेलवे ने उनमें से कुछ की शुरुआत भी कर दी है, जैसे डेढ़ घंटे पहले यात्रियों को रेलवे स्टेशन पहुंचना होगा। इसके अलावा सोशल डिस्टेंसिंग और सैनिटाइजेशन का ध्यान रखना होगा। एक समस्या जो मुझे नजर आ रही है कि सरकार अब लोगों के जीवन में ज्यादा हस्तक्षेप कर रही है। सरकार किसी भी फैसले में पार्लियामेंट कमेटी की सलाह नहीं लेती है। फैसले खुद-ब-खुद लिए जा रहे हैं। लोगों की मंशा तो सिर्फ कहने की बात रह गई है। हर चीज के लिए समय तय कर दिया गया है। वर्तमान समय के लिए जरूरी है, लेकिन लोकतंत्र में किसी भी फैसले में लोगों का मत भी होना चाहिए।
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