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कथाकार तेजेंद्र शर्मा को विशेष साहित्य सेवी सम्मान
Panchkula
Updated Mon, 29 Jul 2013 05:34 AM IST
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पंचकूला। हरियाणा साहित्य अकादमी सेक्टर-14 की ओर से रविवार को कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर युवा कहानी पुरस्कार समारोह और राष्ट्रीय कथा संगोष्ठी आयोजित की गई। संगोष्ठी में डा. अजय नावरिया, एसोसिएट प्रोफेसर हिन्दी विभाग जामिया मिल्लिया विश्वविद्यालय, नई दिल्ली मुख्य वक्ता थे, जबकि केके रत्तू, निदेशक दूरदर्शन केन्द्र देहरादून और तेजेन्द्र शर्मा, सुप्रसिद्ध कथाकार (लंदन) विशिष्ट अतिथि थे। समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार विजय सहगल ने की। अकादमी के निदेशक डा. श्याम सखा ‘श्याम’ ने समारोह में आए मेहमानाें का स्वागत किया। समारोह में सुप्रसिद्ध कथाकार (लंदन) तेजेंद्र शर्मा को 2012 के लिए विशेष साहित्य सेवी सम्मान दिया गया। इसके साथ वर्ष 2012 के युवा कहानी प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया गया। इसमें पहले, दूसरे और तीसरे पुरस्कार के अलावा 8 सांत्वना पुरस्कार भी दिए गए। इस मौके पर दस्तक-2012 पुस्तक का लोकार्पण भी किया गया। कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. विजेन्द्र कुमार ने किया।
इन्हें मिला सम्मान
हरियाणा साहित्य अकादमी की ओर से 11 लोगों को युवा कहानी पुरस्कार दिया गया। इसमें मालविका सिंह पंचकूला को पहला, अमित मनोज महेन्द्रगढ़ को दूसरा और डा. पूनम अरोड़ा फरीदाबाद को तीसरा पुरस्कार मिला। इसके अलावा बल्लभगढ़ के सुनील भादू, फतेहाबाद के दिनेश पराशर, हिसार के नीलम नरेश, कुरुक्षेत्र के मलखान सिंह, कैथल के भारती शर्मा, यमुनानगर के आकांक्षा त्यागी, सोनीपत के लीना कपूर को सम्मानित किया गया। अकादमी निदेशक डॉ. श्याम सखा ‘श्याम’ ने कहानी का मूल लोककथा को बताया। उन्होंने कहा कि लोककथा आज भी कहानी से अधिक मारक और प्रभावी होती है।
मुंशी प्रेमचंद साहित्य एवं राजनीति के मशाल थे : डॉ. अजय नावरिया
डॉ. अजय नावरिया ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद एक ऐसे साहित्यकार थे, जो पूरी विधा के निर्णायक रहे और साहित्य एवं राजनीति के आगे चलने वाली मशाल थे। उनकी राजपुत्र कहानी सामाजिक, मानसिक एवं अंतरजातीय संबंधों पर आधारित एक सकारात्मक कहानी थी। तेजेंद्र शर्मा ने युवा कथाकारों को अपनी रचना में पाठक को भी हिस्सा बनाने की अपील की। डॉ. केके रत्तू ने ‘कथा साहित्य की परंपरा की वर्तमान दशा एवं दिशा’ पर सारगर्भित वक्तव्य दिए।
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इन्हें मिला सम्मान
हरियाणा साहित्य अकादमी की ओर से 11 लोगों को युवा कहानी पुरस्कार दिया गया। इसमें मालविका सिंह पंचकूला को पहला, अमित मनोज महेन्द्रगढ़ को दूसरा और डा. पूनम अरोड़ा फरीदाबाद को तीसरा पुरस्कार मिला। इसके अलावा बल्लभगढ़ के सुनील भादू, फतेहाबाद के दिनेश पराशर, हिसार के नीलम नरेश, कुरुक्षेत्र के मलखान सिंह, कैथल के भारती शर्मा, यमुनानगर के आकांक्षा त्यागी, सोनीपत के लीना कपूर को सम्मानित किया गया। अकादमी निदेशक डॉ. श्याम सखा ‘श्याम’ ने कहानी का मूल लोककथा को बताया। उन्होंने कहा कि लोककथा आज भी कहानी से अधिक मारक और प्रभावी होती है।
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मुंशी प्रेमचंद साहित्य एवं राजनीति के मशाल थे : डॉ. अजय नावरिया
डॉ. अजय नावरिया ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद एक ऐसे साहित्यकार थे, जो पूरी विधा के निर्णायक रहे और साहित्य एवं राजनीति के आगे चलने वाली मशाल थे। उनकी राजपुत्र कहानी सामाजिक, मानसिक एवं अंतरजातीय संबंधों पर आधारित एक सकारात्मक कहानी थी। तेजेंद्र शर्मा ने युवा कथाकारों को अपनी रचना में पाठक को भी हिस्सा बनाने की अपील की। डॉ. केके रत्तू ने ‘कथा साहित्य की परंपरा की वर्तमान दशा एवं दिशा’ पर सारगर्भित वक्तव्य दिए।
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