पंचकूला प्रशासन बेपरवाह: विजिलेंस ने जिसे बताया 'वाटर बम', उसी कौशल्या डैम के सामने बन रही बहुमंजिला इमारतें
जिस कौशल्या डैम को सिंचाई विभाग की विजिलेंस रिपोर्ट में संभावित खतरे वाला वाटर बम बताया गया था उसी के सामने बहुमंजिला इमारतें खड़ी हो गई हैं। कौशल्या नदी के आसपास कई जगह निर्माण गतिविधियां चल रही हैं। अगर भारी बारिश में नदी का बहाव तेज हुआ तो पिंजौर के साथ पंचकूला और चंडीगढ़ तक बाढ़ की जद में आएंगे।
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यह ऊपर की जो तस्वीर आप देख रहे हैं वो बेहद खतरनाक है। क्योंकि काैशल्या डैम के फ्लड गेट के ठीक सामने नदी के कैचमेंट में ऊंची-ऊंची इमारतें खड़ी दी गई हैं। कुछ दिनों बाद लोग इन्हीं आशियानों में रहेंगे लेकिन कभी भीषण बाढ़ में जब ये फ्लड गेट खुलेंगे तो यही ऊंची इमारतें सबसे ज्यादा खतरे की जद में होंगी।
नेपाल में जलप्रलय के बाद जब शहर के आपसपास की नदियों के किनारे बसी आबादी की पड़ताल की तो पाया कि कई रिहायशी आबादी और इमारतें खतरे में हैं। नेपाल में हाल की भीषण प्राकृतिक आपदा ने हजारों जानें निगल लीं।
पानी के रास्ते पर खड़े हो रहे ढांचे
कौशल्या डैम के फ्लड गेट के आसपास का क्षेत्र जल निकासी और नदी के प्राकृतिक बहाव की दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नदी के बहाव क्षेत्र में पक्की दीवारें खड़ी कर धीरे-धीरे कंक्रीट के ढांचे तैयार किए जा रहे हैं।
लोगों का कहना है कि ऐसे क्षेत्र में किसी भी निर्माण की वैधता और अनुमति की तत्काल जांच होनी चाहिए। इस बारे में सिंचाई विभाग, पंचकूला के एसडीओ मुनीष ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है। क्षेत्र की जांच कराई जाएगी। यदि नियमों के विरुद्ध निर्माण या अतिक्रमण मिला तो नियमानुसार सख्त कार्रवाई होगी। जरूरत पड़ी तो नोटिस भी जारी किए जाएंगे।
नोटिस हुए लेकिन जमीन पर कार्रवाई का इंतजार
सूत्रों के अनुसार, पहले भी कुछ निर्माण पर नोटिस जारी किए गए थे। इसके बावजूद बड़ी कार्रवाई नजर नहीं आई। प्रभावशाली लोगों और राजनीतिक संरक्षण के कारण कार्रवाई प्रभावित होने के आरोप लग रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। 2023 की बाढ़ का मंजर पिंजौर और आसपास के लोगों के जेहन में अब भी ताजा है। उस दौरान उफनते पानी और तेज बहाव से कई इलाकों में नुकसान हुआ था। नेशनल हाईवे, पुलों और आसपास के क्षेत्रों में भी बाढ़ और जलभराव का असर दिखा था। ऐसे में नदी के प्राकृतिक रास्ते में किसी भी तरह की बाधा भविष्य का खतरा बढ़ा सकती है।
झाझरा नदी में भी बदला पानी का रुख, बाईपास पर खतरा
कौशल्या नदी से सटे झाझरा नदी क्षेत्र में भी निर्माण और अतिक्रमण की शिकायतें सामने आती रही हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, कई जगह नदी और नालों के प्राकृतिक बहाव क्षेत्र में निर्माण से पानी का रुख प्रभावित हुआ है। इससे सूरजपुर-सुखोमाजरी बाईपास और आसपास की सड़कों पर खतरे की आशंका जताई जा रही है। लोगों का कहना है कि पानी के दबाव और कटाव से कुछ स्थानों पर सड़क किनारे की जमीन कमजोर हो रही है।
विजिलेंस की रिपोर्ट के बाद भी खतरा जस का तस
मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि सिंचाई विभाग की विजिलेंस टीम पहले कौशल्या डैम के निर्माण और उससे जुड़े तकनीकी पहलुओं पर सवाल उठा चुकी है। रिपोर्ट में भविष्य में संभावित खतरे की आशंका जताई गई थी। इसके बावजूद फ्लड गेट के सामने निर्माण की शिकायतें सामने आना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। लोगों का आरोप है कि विभागीय कार्रवाई नोटिस और कागजी प्रक्रिया से आगे नहीं बढ़ पा रही।
क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार
अमरावती रेजिडेंशियल एसोसिएशन के प्रधान शमशेर शर्मा, समाजसेवी बबली रावत, भारत भूषण बंसल का कहना है कि हिमालयी क्षेत्रों में लगातार सामने आ रही बाढ़ और प्राकृतिक आपदाएं बताती हैं कि नदियों के प्राकृतिक बहाव क्षेत्र से छेड़छाड़ कितनी भारी पड़ सकती है। कौशल्या डैम के फ्लड गेट के सामने कथित निर्माणों की निष्पक्ष जांच अब जरूरी है। प्रशासन को स्पष्ट करना होगा कि ये निर्माण वैध हैं या नहीं और संवेदनशील नदी क्षेत्र को भविष्य की आपदा से बचाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
सिंचाई विभाग को पहले ही अल्टीमेटम दिया हुआ है। बताया गया है कि डेंजर जोन में जो भी अवैध कब्जे हैं उन्हें हटाया जाए। साथ ही इन विभाग को कहा है कि इन कब्जाधारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। -सतपाल शर्मा, डीसी पंचकूला